दलाल स्ट्रीट पर सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाताओं के शेयरों ने हाल के कारोबारी सत्रों में आश्चर्यजनक मजबूती दिखाई है। लंबे समय से सुस्ती और नीतिगत दबावों का सामना कर रहे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में अचानक आया यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में बड़ी तकनीकी फेरबदल देखने को मिल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यह उछाल केवल घरेलू मजबूती का परिचायक नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रौद्योगिकी खंडों के बीच बदलती प्राथमिकताओं से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
घरेलू सॉफ्टवेयर दिग्गजों के प्रदर्शन में जोरदार तेजी
चालू महीने के शुरुआती पखवाड़े में भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन दर्ज किया। 1 से 14 अक्टूबर के कारोबारी आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि इस समयावधि में एचसीएल टेक ने सबसे आगे रहते हुए 12.8 फीसदी का जबर्दस्त लाभ दर्ज किया। इसी क्रम में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने 11 फीसदी की बढ़त बनाई। प्रमुख टेक दिग्गज इन्फोसिस के शेयरों में 9.6 फीसदी की वृद्धि देखी गई, जबकि विप्रो ने भी 7.6 फीसदी की ठोस बढ़त हासिल करने में कामयाबी पाई। मध्यम आकार की कंपनियों में कोफोर्ज 6.2 फीसदी ऊपर चढ़ा, वहीं टेक महिंद्रा में 4.4 फीसदी की सकारात्मक चाल देखने को मिली।
यह तेजी उस प्रतिकूल माहौल के बावजूद सामने आई है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीन कार्ड तथा कार्य वीजा के प्रावधानों को कड़ा करने के फैसले लागू किए गए हैं। सामान्य तौर पर अमेरिकी आव्रजन और वीजा नियमों में ऐसी सख्ती भारतीय सॉफ्टवेयर सेवा निर्यातकों के कारोबारी संचालन और मार्जिन के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जाती रही है, फिर भी शेयर कीमतों ने इन चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
निफ्टी आईटी में उछाल और अंतरराष्ट्रीय बिकवाली का दबाव
घरेलू बाजार में तेजी की रफ्तार इतनी तेज रही कि 15 अक्टूबर के सत्र में निफ्टी आईटी सूचकांक में 2 फीसदी की छलांग लगी। इसके साथ ही केवल 3 कारोबारी सत्रों के भीतर इस सेक्टर इंडेक्स ने कुल 8 फीसदी की जोरदार छलांग लगाई। हालांकि इस घरेलू चमक-दमक के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ एक बड़ा घटनाक्रम भी सक्रिय है।
अमेरिका और एशियाई बाजारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा सेमीकंडक्टर विनिर्माण से जुड़े शेयरों में तीव्र गिरावट का सिलसिला चल पड़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिप निर्माताओं और उभरती तकनीक से जुड़ी कंपनियों की भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का आकलन है कि वैश्विक पोर्टफोलियो प्रबंधक अब अधिक जोखिम वाले सेमीकंडक्टर और प्रायोगिक एआई खंड से अपने पैसे निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवा शेयरों की ओर मोड़ रहे हैं। इस सेक्टर रोटेशन की मुख्य लाभार्थी वही भारतीय आईटी फर्में बन रही हैं, जिनका बड़ा राजस्व अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत पर निर्भर है।
एआई पर भारी पूंजी निवेश और अनिश्चित मुनाफे की चुनौती
अमेरिका तथा प्रमुख एशियाई वित्तीय केंद्रों में एआई केंद्रित उद्यमों की कीमतों में आई गिरावट केवल अल्पकालिक लाभ काटने की सामान्य प्रक्रिया नहीं है। इसके पीछे आधारभूत चिंताएं हैं। एआई से जुड़ी बहुराष्ट्रीय फर्में आधुनिक डाटा सेंटर खड़े करने, अत्याधुनिक चिप्स खरीदने तथा भारी कंप्यूटिंग क्षमता जुटाने पर अरबों डॉलर का अनियंत्रित पूंजीगत व्यय कर रही हैं।
अब संस्थागत निवेशक यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या यह भारी-भरकम लागत तय समय में मुनाफे में तब्दील हो पाएगी। इसके अलावा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार बनी हुई महंगाई भी चिंता का बड़ा सबब है। इस महंगाई के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने का दबाव बना हुआ है। यदि केंद्रीय बैंक उधारी लागत बढ़ाता है, तो अत्यधिक मूल्यवान टेक शेयरों के मूल्यांकन पर और अधिक नकारात्मक असर पड़ने की पूरी आशंका है।
एशियाई सेमीकंडक्टर बाजारों में तेज गिरावट
सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े पूर्वी एशियाई शेयर बाजारों में दबाव का स्तर काफी गंभीर रहा है। 15 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक कॉस्पी 8 फीसदी से भी अधिक लुढ़क गया। उसी दिन टोक्यो के निक्केई सूचकांक में 5 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। मेमोरी चिप और उन्नत हार्डवेयर उत्पादन करने वाले वैश्विक महारथियों, जिनमें सैमसंग और हायनिक्स शामिल हैं, के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई है। हार्डवेयर और फैब्रिकेशन कंपनियों पर आए इस दबाव ने वैश्विक फंड्स को अपनी रणनीति बदलने पर विवश कर दिया है।
पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं की ओर मुड़ता वैश्विक रुझान
चिप निर्माताओं और हार्डवेयर उत्पादकों की तुलना में भारतीय तकनीकी उद्यमों का कारोबारी मॉडल काफी भिन्न और विविध है। भारतीय कंपनियां केवल चिप या हार्डवेयर बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक उद्यमों को क्लाउड माइग्रेशन, साइबर सुरक्षा, जटिल सॉफ्टवेयर सेवाएं, सिस्टम इंटीग्रेशन और व्यावहारिक एआई टूल्स को लागू करने में मदद करती हैं।
जब हार्डवेयर और महंगे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठते हैं, तो निवेशक उन फर्मों को प्राथमिकता देने लगते हैं जो असल व्यापारिक समाधान उपलब्ध कराती हैं। इस संदर्भ में बाजार विशेषज्ञ वीके विजयकुमार का कहना है कि एआई से जुड़े शेयरों में आया यह सुधार भारतीय बाजार के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित हो सकता है। उनके मुताबिक इस बदलाव से घरेलू इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार निकासी को थामने में भी मदद मिल सकती है।
मजबूत नतीजे और भविष्य की चुनौतियां
भारतीय आईटी सेक्टर में दिखने वाली चमक केवल बाहरी सेक्टर रोटेशन पर ही टिकी नहीं है। कंपनियों के अपने वित्तीय प्रदर्शन ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उदाहरण के तौर पर, एचसीएल टेक को अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति का पूरा समर्थन मिला है। कंपनी ने सितंबर तिमाही में 21 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जबकि अकेले एआई से उसका वार्षिक राजस्व लगभग 22 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है।
दूसरी ओर, विप्रो जैसी कंपनियों को तिमाही आंकड़ों का उतना व्यापक सहारा नहीं मिला, लेकिन पूरे सेक्टर में सकारात्मक माहौल बनने और टीसीएस में आए तेज उछाल का लाभ उन्हें भी मिला है। आने वाले समय में इस गति के टिके रहने को लेकर कुछ सावधानियां जरूरी हैं। यह उछाल इस बात पर निर्भर करेगा कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से बिकवाली घटाते हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त, यदि अमेरिका में मुद्रास्फीति के दबाव में उधारी दरें बढ़ती हैं और वहां के कॉर्पोरेट अपने आईटी बजट को रोकते हैं, तो भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के आगामी ऑर्डर पर दोबारा दबाव आ सकता है।



















