पाली जिले के प्रसिद्ध जवाई क्षेत्र में वन्यजीवों की हिफाजत और सफारी को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन ने सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब इस इलाके में पर्यटकों को घुमाने वाले हर वाहन में नोडल एजेंसी से प्रमाणित जीपीएस ट्रैकर और चालू डैशबोर्ड कैमरा लगाना जरूरी होगा। सुरक्षा तंत्र को चाक-चौबंद करने के लिए सभी चालकों की पृष्ठभूमि जांची जाएगी और वाहनों को अलग पहचान देने के लिए विशेष यूनिक आईडी आवंटित की जाएगी। यदि कोई संचालक इन निर्देशों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसका पंजीयन रद्द करने सहित सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह पूरा फैसला पर्यावरण संतुलन और वन्यजीव सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से लिया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के तहत हुआ फैसला
प्रशासन की ओर से यह कदम उच्च न्यायालय जोधपुर में दायर डीबी सिविल रिट याचिका संख्या 5128/2026 में पारित निर्णय की अनुपालना में उठाया गया है। अदालत के निर्देशों को जमीन पर उतारने के लिए 8 अक्टूबर को जवाई प्रबंधन समिति की एक अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त कलेक्टर शैलेंद्र सिंह ने की, जिसमें सफारी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि जंगल और वन्यजीवों के प्राकृतिक पर्यावास में पर्यटकों की आवाजाही को मनमाने ढंग से नहीं चलने दिया जाएगा, बल्कि हर गतिविधि की निगरानी तकनीकी साधनों से होगी।
सुमेरपुर डीटीओ दफ्तर में 15 से 30 अक्टूबर तक विशेष शिविर
जिला परिवहन अधिकारी अनूप चौधरी के अनुसार, नए नियमों को अमलीजामा पहनाने के लिए सुमेरपुर स्थित परिवहन कार्यालय में 15 से 30 अक्टूबर तक एक विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में सफारी जिप्सी मालिकों को रियायती दरों पर जीपीएस अथवा वीएलटीडी उपकरण लगवाने की सहूलियत दी जा रही है। इसी दौरान वाहनों की तकनीकी और यांत्रिक फिटनेस की बारीकी से जांच होगी। फिटनेस सही पाए जाने पर ही वाहन को खास यूनिक आईडी नंबर जारी किया जाएगा और पात्र चालकों को अधिकृत पहचान पत्र प्रदान किए जाएंगे।
पंजीकरण, बीमा और वाहन के ढांचे से जुड़े कड़े मापदंड
सफारी कार्य में उपयोग होने वाले वाहनों के लिए व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत होना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक वाहन के पास वैध फिटनेस प्रमाण पत्र और थर्ड पार्टी अथवा व्यावसायिक बीमा होना जरूरी रहेगा। नोडल प्राधिकरण से अलग से पंजीकरण करवाकर मिलने वाली यूनिक आईडी को हर साल नवीनीकृत कराना होगा। वाहनों की देखरेख अधिकृत सर्विस सेंटर से होनी चाहिए। सफारी के लिए चलने वाला वाहन या तो ओपन टॉप स्वरूप में हो या फिर वन्यजीव दर्शन के अनुकूल इस तरह संशोधित हो कि यात्रियों को सुरक्षा के साथ देखने की सुविधा मिले।
चालकों और मालिकों का होगा पुलिस सत्यापन
सफारी संचालन की अनुमति देने से पहले संचालकों और वाहन मालिकों का विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया जाएगा। इस जांच प्रक्रिया में पुलिस सत्यापन रिपोर्ट देखी जाएगी। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि आवेदक का वन्यजीव अपराधों या किसी अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में कोई पुराना रिकॉर्ड न हो। इसके अलावा पूर्व में किए गए गंभीर यातायात या वन नियमों के उल्लंघनों की भी गहन समीक्षा की जाएगी, ताकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को इस संवेदनशील क्षेत्र से दूर रखा जा सके।



















