मध्य यूरोप के चार प्रभावशाली देशों के गठबंधन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए नई दिल्ली के लंबे प्रयास को जोरदार ताकत दी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित एक विशेष राजनयिक संवाद में विसेग्राद समूह के सभी घटक राष्ट्रों ने स्पष्ट रूप से यह माना कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक और आर्थिक केंद्र को वैश्विक निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था में स्थायी भागीदारी मिलनी चाहिए। इस उच्चस्तरीय वार्ता में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया तथा चेक गणराज्य के विदेश मंत्रियों ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ पहली बार साझा मंच तैयार किया।
वैश्विक मंच पर नई दिल्ली के प्रभाव की खुली स्वीकारोक्ति
विसेग्राद ब्लॉक के प्रतिनिधियों ने आधुनिक भू-राजनीति में उभरते संतुलन पर बात करते हुए भारत की बढ़ती हैसियत को रेखांकित किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने चारों देशों की तरफ से साझा रुख सामने रखा। ब्लानार ने कहा कि विसेग्राद समूह इस बात पर पूरी तरह एकमत है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शक्ति और ग्लोबल साउथ के प्रमुख प्रतिनिधि के तौर पर भारत को सुरक्षा परिषद की मुख्य मेज पर स्थायी जगह मिलनी जरूरी है। मध्य यूरोप के इस ब्लॉक का यह सामूहिक रुख सुरक्षा परिषद के ढांचे में लंबे समय से लंबित सुधारों की दिशा में बेहद प्रभावी कदम माना जा रहा है।
वार्षिक विदेश मंत्री संवाद और व्यापार मंच की शुरुआत
इस औपचारिक राजनयिक सत्र को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया और ऐतिहासिक मोड़ करार दिया। दोनों पक्षों ने भविष्य के रणनीतिक तालमेल को नियमित और संस्थागत रूप देने के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार करने का फैसला किया है। इसके अंतर्गत भारत और चारों विसेग्राद देशों के विदेश मंत्री अब हर साल नियमित बैठक करेंगे। साथ ही दोनों क्षेत्रों के कॉरपोरेट और औद्योगिक घरानों को जोड़ने के लिए एक वार्षिक बिजनेस फोरम भी स्थापित किया जाएगा, जिससे निवेश और द्विपक्षीय व्यापार के अवसरों को तेजी से धरातल पर उतारा जा सके।
रक्षा साझेदारी और ऐतिहासिक संबंधों को नई धार
बैठक के एजेंडे में सुरक्षा और सैन्य सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। भारत और इन चारों मध्य यूरोपीय राष्ट्रों के बीच सैन्य आपूर्ति, आधुनिकीकरण और उपकरण निर्माण का पुराना आधार मौजूद रहा है। दोनों पक्षों ने इस ऐतिहासिक तालमेल को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप ढालने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि रक्षा विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और सामरिक उपकरणों के क्षेत्र में साझा काम को और विस्तृत किया जाएगा। इसके जरिए पुरानी सैन्य साझेदारियों को पुनर्जीवित कर नई तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
तकनीक, नवाचार और अंतरिक्ष अनुसंधान में नया गठजोड़
वार्ता के दौरान तकनीकी प्रगति, अंतरिक्ष अनुसंधान, कनेक्टिविटी और अकादमिक आदान-प्रदान से जुड़े आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई। शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को लेकर यह रेखांकित किया गया कि पोलैंड, चेक गणराज्य, हंगरी और स्लोवाकिया के विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थानों में भारतीय छात्रों की उल्लेखनीय उपस्थिति है। दोनों पक्षों ने शोध और नवाचार के प्रोजेक्ट्स में आपसी साझेदारी बढ़ाने पर बल दिया, ताकि दोनों क्षेत्रों की युवा प्रतिभाओं को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान का सीधा फायदा मिल सके।
वैश्विक संकटों और बहुपक्षीय व्यवस्था पर साझा विचार
इस बैठक में केवल क्षेत्रीय मुद्दे ही नहीं उठे, बल्कि दुनिया को प्रभावित कर रहे प्रमुख भू-राजनीतिक तनावों पर भी गहन विमर्श हुआ। सभी मंत्रियों ने यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के हालात पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर सहमति बनी। वार्ता के बाद विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक संवाद बढ़ाने, आर्थिक तंत्र मजबूत करने, नवाचार और जन-जन के आपसी संपर्क को गहरा करने के साथ-साथ रक्षा सहयोग को आगे ले जाना इस नई कूटनीतिक शुरुआत का मुख्य उद्देश्य है।






















