बिहार के जमुई जिले में कोचिंग से लौट रही एक नाबालिग छात्रा के साथ सरेराह हुई दरिंदगी और बदसलूकी के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन ने इस जघन्य घटना पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सात नामजद आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल तीन नाबालिग लड़कों को हिरासत में ले लिया है, जबकि घटना का मुख्य अभियुक्त अपने तीन अन्य साथियों के साथ अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर है। वारदात के साठ घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी के न पकड़े जाने को लेकर स्थानीय स्तर से लेकर सियासी गलियारों तक लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सड़क पर दरिंदगी और वीडियो वायरल करने का सनसनीखेज मामला
यह दर्दनाक वारदात 19 सितंबर की शाम को घटित हुई, जब एक किशोर और उसकी नाबालिग सहेली कोचिंग क्लास समाप्त होने के बाद घर लौट रहे थे। रास्ते में वे दोनों सड़क के किनारे रुक कर कुछ तस्वीरें खींचने लगे। ठीक उसी समय कुछ असामाजिक तत्व और उपद्रवी वहां आ धमके और उन्होंने बिना किसी कारण दोनों को घेर लिया। गुंडों ने नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी शुरू कर दी, उसके कपड़े फाड़ डाले और अभद्र आचरण किया। कुछ दरिंदे उसे जबरन उठाकर एकांत की तरफ ले गए और लगातार प्रताड़ित किया। पीड़िता उन बदमाशों के सामने खुद को छोड़ने के लिए हाथ जोड़कर मिन्नतें करती रही और गिड़गिड़ाती रही, मगर दरिंदों का दिल नहीं पसीजा। हैवानियत यहीं नहीं थमी, उन गुंडों ने दोनों नाबालिगों को अपमानित करते हुए पूरी घटना का वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड किया और बाद में उसे इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया।
एसआईटी का गठन और पुलिस की तेज छापेमारी
मामले की गंभीरता और लोगों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए जमुई की अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी की टीमें फरार आरोपियों की संभावित शरणगाहों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल फुटेज में गमछा ओढ़े नजर आ रहा शख्स इस पूरे कांड का मुख्य सूत्रधार है। हालांकि, घटना के कई दिन गुजर जाने के बावजूद उसकी गिरफ्तारी न हो पाना पुलिस महकमे के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है। फिलहाल हिरासत में लिए गए तीनों नाबालिगों से पूछताछ की जा रही है ताकि बाकी बचे चार फरार आरोपियों के सटीक ठिकानों का पता लगाया जा सके।
वीडियो फैलाने वाले बत्तीस सोशल मीडिया हैंडल्स पर शिकंजा
पीड़िता के सम्मान और पहचान की रक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने वीडियो को ऑनलाइन सर्कुलेट करने वालों पर भी कड़ा रुख अपनाया है। अपराध अनुसंधान विभाग और साइबर सेल ने ऐसे तमाम अकाउंट्स की गहन जांच-पड़ताल की है जिन्होंने इस अशोभनीय वीडियो को आगे बढ़ाया। बिहार पुलिस ने इस संबंध में कुल 32 सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को चिन्हित किया है, जिनमें 13 फेसबुक अकाउंट, 12 इंस्टाग्राम प्रोफाइल और 7 ट्विटर अकाउंट शामिल हैं। इन सभी चिन्हित हैंडल्स के संचालकों के विरुद्ध आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मुख्य आरोपी की पहचान पुख्ता हो चुकी है और उसे जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
घटना को लेकर पटना से दिल्ली तक गरमाई राजनीति
जमुई की इस शर्मनाक घटना को लेकर राजधानी पटना से लेकर देश की संसद और राष्ट्रीय राजधानी तक राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सम्राट चौधरी की सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति पर तीखा प्रहार किया और सवाल उठाया कि क्या हुकूमत को बेटियों की सुरक्षा की रत्ती भर भी फिक्र नहीं है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पुलिस की सुस्ती पर घेराव करते हुए पूछा कि जब 19 सितंबर को इतनी घिनौनी वारदात हुई थी, तो पुलिस प्रशासन दो दिनों तक सोता क्यों रहा। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस कांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला। इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए जमुई की घटना पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।






















