भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी कई दिलचस्प कहानियां दर्ज हैं जहां एक ही नाम से बनी फिल्मों ने अलग-अलग दौर में इतिहास रचा है। वर्ष 1947 और वर्ष 1968 में ठीक 21 साल के अंतराल पर नील कमल नाम से दो हिंदी फिल्में पर्दे पर आईं। इनमें से पहली फिल्म ने जहां एक तरफ दिग्गज अभिनेता राज कपूर को मुख्य अभिनेता के रूप में पहचान दी, वहीं दूसरी फिल्म ने वहीदा रहमान के अभिनय करियर में रिकॉर्ड तोड़ सफलता का नया अध्याय जोड़ा। दोनों ही फिल्में अपने समय के शीर्ष कलाकारों और बेहतरीन संगीत के लिए जानी जाती हैं।
1947 की नील कमल और राज कपूर के लीड डेब्यू की अनकही कहानी
वर्ष 1947 में जब नील कमल का निर्माण हो रहा था, तब उस दौर के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक केदार शर्मा एक नई जोड़ी को पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे थे। उस समय राज कपूर युवावस्था की दहलीज पर थे और उनके पिता उनके व्यवहार तथा रेड लाइट एरिया में आवाजाही को लेकर काफी चिंतित रहते थे। ऐसे समय में निर्देशक केदार शर्मा ने राज कपूर को सही दिशा में लाने का जिम्मा उठाया और अपनी फिल्म में उन्हें मुख्य भूमिका देने का फैसला किया।
शुरुआत में राज कपूर इस बात को लेकर काफी झिझक रहे थे। उन्होंने निर्देशक केदार शर्मा से यहां तक कह दिया था कि वे एक नए कलाकार को कास्ट करके अपनी फिल्म का नुकसान क्यों करना चाहते हैं। हालांकि, केदार शर्मा अपने फैसले पर अडिग रहे और उन्होंने राज कपूर के साथ अभिनेत्री मधुबाला को इस फिल्म में कास्ट किया। फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शकों ने राज कपूर और मधुबाला की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को काफी सराहा, लेकिन व्यापारिक दृष्टिकोण से फिल्म को शुरुआती समय में बहुत बड़ी सफलता नहीं मिल सकी। बाद के वर्षों में जब राज कपूर और मधुबाला दोनों ही भारतीय सिनेमा के बहुत बड़े स्टार बन गए, तब दर्शकों ने इस क्लासिक फिल्म को दोबारा देखा और इसे काफी पसंद किया।
1968 में 21 साल बाद बनी नील कमल और वहीदा रहमान का डबल रोल
पहली फिल्म के ठीक 21 साल बाद, वर्ष 1968 में निर्देशक राम माहेश्वरी एक नई कहानी के साथ नील कमल नाम की फिल्म लेकर आए। इस फिल्म की स्टार कास्ट बेहद मजबूत थी, जिसमें वहीदा रहमान और राजकुमार मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म में अभिनेता मनोज कुमार ने एक महत्वपूर्ण कमियो निभाया था, जबकि दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी ने भी एक अहम किरदार साकार किया था।
यह 1968 की नील कमल पुनर्जन्म के विषय पर आधारित एक भावनात्मक और रहस्यमयी ड्रामा फिल्म थी। फिल्म में अभिनेत्री वहीदा रहमान ने दोहरी भूमिका यानी डबल रोल निभाया था। कहानी के पहले जन्म वाले हिस्से में वहीदा रहमान ने नील कमल नाम की राजकन्या का किरदार निभाया, जिससे राजकुमार का किरदार निस्वार्थ प्रेम करता है। वहीं दूसरे जन्म के हिस्से में वह बलराज साहनी की बेटी सीता के रूप में दिखाई देती हैं, जिनकी शादी मनोज कुमार के किरदार से होती है। इस अनोखी प्रेम कहानी और पुनर्जन्म के ताने-बाने ने दर्शकों को गहराई से सोचने और जुड़ाव महसूस करने पर मजबूर कर दिया था।
बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड और दोनों फिल्मों की साझी विरासत
राम माहेश्वरी के निर्देशन में बनी 1968 की नील कमल बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट साबित हुई। इस फिल्म में वहीदा रहमान और राजकुमार की जोड़ी को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया और दोनों के अभिनय की जमकर तारीफ हुई। इसके साथ ही फिल्म के मधुर गानों ने रेडियो और संगीत प्रेमियों के बीच अपार लोकप्रियता हासिल की। कमाई के आंकड़ों की बात करें तो यह फिल्म वर्ष 1968 में भारत की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी थी।
हालांकि 1947 और 1968 में बनी नील कमल फिल्मों की कहानियां एक-दूसरे से पूरी तरह अलग थीं, लेकिन दोनों ही फिल्मों ने भारतीय सिनेमा के पन्नों में अपनी खास जगह बनाई। जहां एक फिल्म ने हिंदी सिनेमा के शोमैन राज कपूर के अभिनय सफर की नींव रखी, वहीं दूसरी फिल्म ने वहीदा रहमान के स्टारडम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। दोनों ही फिल्मों में मुख्य कलाकारों की केमिस्ट्री और उनके यादगार प्रदर्शन को आज भी सिनेमा प्रेमी बड़ी आदर के साथ याद करते हैं।


















