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भरतनाट्यम की मंच प्रस्तुतियों ने बदली किस्मत, यूं फिल्मी दुनिया तक पहुंचीं वहीदा रहमानबॉलीवुड
6 सित॰ 2026, 11:55 pm (52 दिन पहले)· 2

भरतनाट्यम की मंच प्रस्तुतियों ने बदली किस्मत, यूं फिल्मी दुनिया तक पहुंचीं वहीदा रहमान

वहीदा रहमान ने बताया था कि कैसे बचपन में भरतनाट्यम सीखने से लेकर सिर्फ 13 साल की उम्र में घर बैठे मिले फिल्मी ऑफर तक, उनका सफर पूरी तरह किस्मत का खेल रहा।

तेरह साल की उम्र में घर बैठे फिल्मों के प्रस्ताव मिलना, यह किस्सा वहीदा रहमान ने खुद साल 2019 में कपिल शर्मा के शो में सुनाया था, जब आशा पारेख और हेलेन के साथ वो उस एपिसोड में मेहमान बनकर पहुंची थीं और कपिल ने उनसे उनके फिल्मी सफर की शुरुआत के बारे में पूछा था।

खुद को मानती हैं बेहद खुशकिस्मत

वहीदा रहमान ने बताया कि उनकी एंट्री महज एक इत्तेफाक और उनकी किस्मत का नतीजा थी। बचपन से ही वो भरतनाट्यम में ट्रेंड थीं और मंच पर नृत्य प्रस्तुतियां दिया करती थीं। शास्त्रीय नृत्य की इसी बुनियाद की वजह से लोगों की नजर उन पर पड़ी, वरना उस दौर में उनका फिल्मों तक पहुंचना आसान नहीं था। उस समय ज्यादातर साउथ और क्षेत्रीय फिल्मों की शूटिंग चेन्नई में हुआ करती थी, इसलिए वहां की स्टेज परफॉर्मेंस पर फिल्म इंडस्ट्री की नजर भी बनी रहती थी।

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13 साल की उम्र में आया प्रस्ताव, पेरेंट्स ने कहा ना

वहीदा जी की मंच प्रस्तुतियों की तस्वीरें किसी की नजर में आईं, और सिर्फ 13 साल की उम्र में उनके घर फिल्मों के प्रस्ताव पहुंचने लगे। मगर उनके माता-पिता ने यह कहकर इनकार कर दिया कि एक्टिंग के लिए वो अभी बहुत छोटी हैं।

तेलुगु फिल्म के लोकगीत ने खोला रास्ता

वहीदा रहमान को इसके बाद एक तेलुगु मूवी में लोक नृत्य करने का मौका मिला, और वो गीत जबरदस्त हिट रहा। इसी कामयाबी की बदौलत उन्हें एक और तेलुगु फिल्म में दिग्गज एक्टर एनटी रामा राव के अपोजिट लीड रोल मिला। उनके करियर की असली शुरुआत हैदराबाद में हुई, जहां उनकी भेंट मशहूर फिल्मकार गुरु दत्त से हुई। गुरु दत्त के कहने पर वो मुंबई आ गईं, जिसने उनके करियर की दिशा पूरी तरह बदल दी।

सीआईडी से हिंदी सिनेमा में कदम, गुरु दत्त के साथ यादगार फिल्में

वहीदा रहमान के करियर की शुरुआत साल 1955 में तेलुगु फिल्म रोजुलु मरायी से हुई थी। एक साल बाद यानी 1956 में हिंदी सिनेमा में उनकी एंट्री हुई। हिंदी सिनेमा में उनकी पहली फिल्म सीआईडी थी, जिसका निर्देशन राज खोसला ने किया था और जिसे गुरु दत्त ने प्रोड्यूस किया। इसके बाद गुरु दत्त के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं, जिनमें शामिल हैं

  • प्यासा
  • कागज के फूल
  • चौदहवीं का चांद
  • साहिब बीबी और गुलाम

गाइड, नीलकमल, खामोशी से मिली अलग पहचान, फिर मिले पद्म सम्मान

इसके बाद गाइड, नीलकमल और खामोशी जैसी सुपरहिट फिल्मों ने वहीदा रहमान को बॉलीवुड में एक अलग मुकाम दिलाया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के बड़े नागरिक सम्मान भी दिए गए। 1972 में उन्हें पद्मश्री मिला, और 2011 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया।

सवाल-जवाब

वहीदा रहमान को फिल्मों का पहला ऑफर किस उम्र में मिला था?
उन्हें सिर्फ 13 साल की उम्र में घर बैठे फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे थे।
उनके पेरेंट्स ने पहला ऑफर क्यों ठुकराया था?
उन्होंने यह कहकर मना कर दिया था कि एक्टिंग शुरू करने के लिए वो अभी बहुत छोटी हैं।
वहीदा रहमान की पहली हिंदी फिल्म कौन सी थी?
उनकी पहली हिंदी फिल्म सीआईडी थी, जिसका निर्देशन राज खोसला ने किया और जिसे गुरु दत्त ने प्रोड्यूस किया था।
वहीदा रहमान के करियर की शुरुआत किस फिल्म से हुई थी?
उनके करियर की शुरुआत 1955 में तेलुगु फिल्म रोजुलु मरायी से हुई थी।
उनका बॉलीवुड सफर कैसे शुरू हुआ?
हैदराबाद में गुरु दत्त से मुलाकात के बाद उन्हें मुंबई आने के लिए कहा गया, और वहीं से उनका बॉलीवुड करियर शुरू हुआ।
वहीदा रहमान को कौन-कौन से राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं?
उन्हें 1972 में पद्मश्री और 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
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