भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी कहानियां हैं जहां एक कलाकार को पहली ही फिल्म से अपार लोकप्रियता मिली, लेकिन किसी एक गलती या मजबूरी ने उनके बढ़ते करियर के पंख काट दिए। साल 1992 में जब फिल्म 'दिल का क्या कसूर' बड़े पर्दे पर आई, तो इसके गानों ने पूरे देश में तहलका मचा दिया था। इस फिल्म से नए अभिनेता पृथ्वी ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। उनके साथ पर्दे पर अभिनेत्री दिव्या भारती की जोड़ी बनी थी, जिसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई ऐतिहासिक सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन पृथ्वी की आकर्षक शख्सियत और गानों की लोकप्रियता ने उन्हें रातोंरात चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया।
1992 का वह दौर और ब्लॉकबस्टर गानों से मिला रातोंरात स्टारडम
साल 1992 में रिलीज हुई फिल्म 'दिल का क्या कसूर' भले ही सिनेमाघरों में टिकट खिड़की पर बहुत बड़ा कमाल न दिखा सकी हो, लेकिन इसके संगीत ने संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया था। जब भी सिनेमाघरों के अंदर फिल्म का सदाबहार गाना 'गा रहा हूं इस महफिल में, आपकी इनायत है…' बजता था, तब दर्शक दीवाने हो उठते थे। थिएटर के भीतर सीटियों और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गूंज उठता था। हर कोई इस नए कलाकार की तारीफ करते नहीं थकता था।
अपने करियर की पहली ही फिल्म में लंबे बाल, गहरी आंखें और एक बेहद खूबसूरत चेहरे वाले पृथ्वी को एक विशिष्ट पहचान हासिल हुई। खासतौर पर जब गाना 'दिल जिगर नजर क्या है, मैं तो तेरे लिए जान भी दे दूं' लोगों की जुबान पर चढ़ा, तो पृथ्वी रातोंरात स्टार बन गए। उनकी इसी नई छवि के कारण फिल्म जगत के कई बड़े निर्माता और निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेने के लिए तलाश करने लगे थे और उनके घर के चक्कर काटने लगे थे।
पिता के दोस्त का कॉन्ट्रैक्ट और हाथ से निकलीं 'दीवाना' और 'डर'
फिल्म उद्योग में पृथ्वी को लॉन्च करने का श्रेय उनके पिता के करीबी दोस्त और जाने-माने निर्माता मुकेश दुग्गल को जाता है। मुकेश दुग्गल ने ही पृथ्वी को 'दिल का क्या कसूर' में मुख्य अभिनेता के रूप में मौका दिया था। लेकिन इस लॉन्च के साथ एक शर्त भी जुड़ी हुई थी। फिल्म की शुरुआत के दौरान मुकेश दुग्गल ने पृथ्वी से एक कानूनी कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया था। इस शर्त के मुताबिक, अपने करियर के शुरुआती चरण में पृथ्वी किसी भी अन्य प्रोडक्शन हाउस या निर्माता के साथ काम नहीं कर सकते थे और उन्हें केवल मुकेश दुग्गल के बैनर तले ही काम करना था।
किस्मत का खेल ऐसा रहा कि पहली फिल्म के सुपरहिट गानों के बाद जब बड़े-बड़े फिल्म मेकर्स पृथ्वी के पास बेहतरीन कहानियों के ऑफर लेकर पहुंचे, तो वे चाहकर भी उन्हें स्वीकार नहीं कर पाए। लीगल कॉन्ट्रैक्ट की इसी मजबूरी के कारण उन्हें उस दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल 'दीवाना' और 'डर' जैसी शानदार फिल्मों को ठुकराना पड़ा या उनके हाथ से ये फिल्में निकल गईं। इन फिल्मों ने बाद में अन्य कलाकारों के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
फ्लॉप होतीं फिल्में और डूबता बॉलीवुड करियर
डेब्यू के बाद पृथ्वी ने अपने कॉन्ट्रैक्ट का पालन करते हुए निर्माता मुकेश दुग्गल के साथ ही काम जारी रखा। उन्होंने मुकेश दुग्गल के प्रोडक्शन में बनी फिल्मों जैसे 'मंचली' और 'इक्का राजा रानी' में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। हालांकि, ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह से असफल साबित हुईं और 'दिल का क्या कसूर' जैसा जादू दोबारा नहीं दोहरा सकीं। लगातार मिल रही असफलताओं और पुराने कॉन्ट्रैक्ट की पाबंदियों के कारण अन्य बड़े प्रोडक्शन हाउसों ने भी धीरे-धीरे पृथ्वी से दूरी बनाना शुरू कर दिया।
परिणामस्वरूप, जो अभिनेता एक समय सुपरस्टार बनने की राह पर अग्रसर दिखाई दे रहा था, उसकी मांग बाजार में घटती चली गई। नए मौकों के दरवाजे बंद होने के साथ ही उनका अभिनय करियर डूबता चला गया। इस तरह एक बेहतरीन शुरुआत मिलने के बावजूद पृथ्वी बॉलीवुड की उस चमक-दमक भरी दुनिया में खो गए, जहां असफलता मिलते ही रास्ते बंद हो जाते हैं।



















