निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ सनी देओल की जोड़ी एक बार फिर पर्दे पर लौटने वाली है और इस बार दोनों साथ मिलकर फिल्म 'बंटवारा 1947' बना रहे हैं. इस प्रोजेक्ट को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है और सनी देओल खुद फिल्म की तैयारियों में जुटे हुए हैं. हाल ही में एक बातचीत में सनी देओल ने खुलासा किया कि वह राजकुमार संतोषी के साथ इससे पहले भी कई फिल्में बनाना चाहते थे, लेकिन बात हर बार अटक जाती थी.
तीस साल बाद फिर एक साथ
सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी लगभग तीन दशक बाद दोबारा किसी फिल्म पर काम कर रही है. इससे पहले दोनों ने मिलकर 'घातक', 'घायल' और 'दामिनी' जैसी फिल्में दी थीं, जो उस दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में गिनी जाती हैं. आज भी दर्शक इन फिल्मों को उतने ही चाव से याद करते हैं.
पौराणिक किरदारों वाला सपना जो पूरा नहीं हो सका
सनी देओल ने बताया कि पिछले कई सालों से वह राजकुमार संतोषी के साथ दोबारा काम करने की कोशिश में थे. बंटवारा 1947 से पहले दोनों सम्राट अशोक और पृथ्वीराज चौहान जैसे ऐतिहासिक और पौराणिक किरदारों पर आधारित फिल्में बनाना चाहते थे. साल 2000 के दशक की शुरुआत में इस दिशा में बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन कोई भी निर्माता इन फिल्मों में पैसा लगाने को तैयार नहीं हुआ. उस वक्त इंडस्ट्री में यह धारणा थी कि इस तरह की बड़े बजट की ऐतिहासिक फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पातीं, इसलिए यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई.
'बंटवारा 1947' की नींव कैसे पड़ी
सनी देओल के मुताबिक असली मोड़ साल 2001 में आया, जब उनकी फिल्म 'गदर: एक प्रेम कथा' को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला. इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी के बाद उन्हें भरोसा हुआ कि विभाजन जैसे संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्में भी दर्शकों को पसंद आ सकती हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने और राजकुमार संतोषी ने भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर 'बंटवारा 1947' की कहानी पर काम शुरू किया. हालांकि इस फिल्म के लिए भी लंबे समय तक कोई निर्माता आगे नहीं आया और प्रोजेक्ट सालों तक अटका रहा.
आमिर खान ने संभाली प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी
सनी देओल ने बताया कि आखिरकार आमिर खान ने इस कहानी को सुना और उन्हें यह पसंद आई. इसके बाद आमिर खान ने फिल्म को प्रोड्यूस करने का फैसला किया, जिसके बाद बरसों पुराना यह सपना आखिरकार हकीकत में बदल पाया. सनी देओल ने कहा कि इस फिल्म को बनाने का उनका सपना अब पूरा हो चुका है. 'बंटवारा 1947' की कहानी भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित है.


















