हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित और चर्चित प्रेम प्रसंगों में अभिषेक बच्चन और करिश्मा कपूर की जोड़ी हमेशा याद की जाती है। दो दशक पहले जब पूरे देश की नजरें बॉलीवुड के इन दो बड़े परिवारों के रिश्ते पर टिकी थीं, तब अचानक हुई सगाई और फिर उसके अप्रत्याशित रूप से टूटने ने सभी को हैरान कर दिया था। सालों से इस रिश्ते के खत्म होने को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। अब मशहूर फिल्म धड़कन की संवाद लेखिका नसीम मुकरी ने विक्की ललवानी के साथ एक बातचीत के दौरान इस पुरानी प्रेम कहानी से जुड़े कई अनसुने और चौंकाने वाले पहलुओं को सामने रखा है।
सगाई टूटने के पीछे वित्तीय समझौते की शर्त
नसीम मुकरी के अनुसार करिश्मा कपूर की मां और पूर्व अभिनेत्री बबीता कपूर शुरुआत से ही इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थीं। उनका दावा है कि बबीता कपूर अपनी बेटी के इस संबंध से खुश नहीं थीं और उन्होंने शादी से पहले एक बेहद कड़ा वित्तीय समझौता सामने रख दिया था। बबीता का मानना था कि उस दौर में करिश्मा कपूर अपने करियर के शिखर पर थीं और अभिषेक बच्चन की तुलना में एक बड़ी स्टार थीं। इसी वजह से उन्होंने शर्त रखी कि अभिषेक शादी से पहले कई करोड़ रुपये करिश्मा के बैंक खाते में ट्रांसफर करें।
नसीम मुकरी ने स्पष्ट किया कि बबीता कपूर का यह कदम एक सुरक्षा समझौते की तरह था। वे चाहती थीं कि यदि भविष्य में वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार का उतार-चढ़ाव या अनबन आती है, तो करिश्मा की आर्थिक स्थिति पूरी तरह सुरक्षित रहे। हालांकि बच्चन परिवार को यह रवैया और शर्त बिल्कुल स्वीकार नहीं हुई। इस आर्थिक मांग और कड़े रुख के कारण दोनों परिवारों के बीच मतभेद गहरा गए और आखिरकार सगाई टूट गई। इसके बाद करिश्मा कपूर का विवाह संजय कपूर से हुआ।
फिल्म सेट से पहले शुरू हुआ था दोनों का प्यार
अक्सर यह माना जाता रहा है कि अभिषेक बच्चन और करिश्मा कपूर का प्रेम संबंध फिल्म 'हां मैंने प्यार किया' की शूटिंग के दौरान परवान चढ़ा था। नसीम मुकरी ने इस धारणा को खारिज करते हुए बताया कि दोनों शूटिंग शुरू होने से काफी समय पहले ही एक-दूसरे के प्यार में पड़ चुके थे। फिल्म के निर्माण के दौरान तो बस उनकी मुलाकातें और साथ काम करने का सिलसिला लगातार जारी था।
इस रिश्ते को सार्वजनिक पहचान अक्टूबर 2002 में मिली थी, जब एक बड़े आयोजन के दौरान जया बच्चन ने करिश्मा कपूर का परिचय अपने परिवार की होने वाली बहू के रूप में कराया था। पूरी फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसक इस शादी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन महज तीन महीने बाद जनवरी 2003 में अचानक इस सगाई के टूटने की खबर आई। हैरानी की बात यह है कि सगाई खत्म होने के बाद से आज तक बच्चन परिवार या कपूर परिवार में से किसी ने भी इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया और न ही कभी सार्वजनिक रूप से वजहों का खुलासा किया।
पारिवारिक नियंत्रण और बहनों के अलग स्वभाव की चर्चा
बातचीत के दौरान जब नसीम मुकरी से पूछा गया कि करिश्मा कपूर ने अपनी मां के फैसलों का विरोध क्यों नहीं किया, तो उन्होंने बबीता कपूर के अत्यधिक सख्त और नियंत्रित करने वाले स्वभाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में बेटियां अपनी माताओं के फैसलों से बहुत डरती थीं और करिश्मा हमेशा अपनी मां के निर्देशों का पालन करती रहीं।
इसके साथ ही नसीम मुकरी ने करिश्मा कपूर और उनकी बहन करीना कपूर के व्यवहार में अंतर को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक करीना कपूर ने अपनी मां के इस कड़े और प्रभुत्वशाली व्यवहार को सहने के बजाय अलग रहकर अपनी जिंदगी जीने का रास्ता चुना। जबकि करिश्मा ने हमेशा अपनी मां के साथ रहकर उनके फैसलों को स्वीकार किया। दो दशकों बाद सामने आए इन दावों ने एक बार फिर बॉलीवुड के इस ऐतिहासिक ब्रेकअप को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



















