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अच्छी अदाकारी को तरजीह देने पर किनारे कर दी गई थीं सोनी राजदान, बोलीं- चुकानी पड़ी थी बड़ी कीमतबॉलीवुड
19 सित॰ 2026, 10:35 am (1 घंटे पहले)· 1

अच्छी अदाकारी को तरजीह देने पर किनारे कर दी गई थीं सोनी राजदान, बोलीं- चुकानी पड़ी थी बड़ी कीमत

चार दशकों के करियर पर बात करते हुए सोनी राजदान ने साझा किया कि किस तरह मुख्यधारा की पारंपरिक हीरोइन बनने के बजाय मजबूत किरदार चुनने पर फिल्म उद्योग ने उन्हें दरकिनार कर दिया था।

सिनेमा की दुनिया में हर कलाकार सिर्फ चकाचौंध और पारंपरिक शोहरत के पीछे नहीं भागता, बल्कि कई चेहरे मजबूत किरदारों की तलाश में आगे बढ़ते हैं। चार दशक से भी ज्यादा वक्त से भारतीय फिल्म जगत में सक्रिय अनुभवी अभिनेत्री सोनी राजदान ने अपने शुरुआती करियर के संघर्षों और फिल्म उद्योग के संकीर्ण रवैये पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने याद किया कि कैसे करियर के शुरुआती दौर में स्टार बनने की जगह एक संजीदा अदाकारा बनने की जिद ने उनके सामने अप्रत्याशित बाधाएं खड़ी कर दी थीं।

स्टारडम से पहले मजबूत भूमिकाओं की तलाश

पच्चीस साल की उम्र में अभिनय का सफर शुरू करने वाली सोनी राजदान ने कभी भी किसी पारंपरिक बड़े धमाके या भव्य लॉन्च के सहारे अपनी पारी शुरू नहीं की थी। उन्होंने अपर्णा सेन के निर्देशन में बनी फिल्म 36 चौरंगी लेन में एक सहायक किरदार निभाकर बड़े पर्दे पर कदम रखा था। इसके बाद वह आहिस्ता आहिस्ता और जाने-माने फिल्मकार श्याम बेनेगल की चर्चित कृति मंडी जैसी लीक से हटकर बनी फिल्मों से जुड़ीं।

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सोनी राजदान के मुताबिक, उन्होंने जानबूझकर उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जहां उन्हें अपनी अभिनय क्षमता को निखारने और बेहतरीन काम करने का खुला अवसर मिले। उनका मुख्य लक्ष्य हमेशा से एक उम्दा कलाकार बनना रहा, हालांकि उन्हें यह भी स्वीकार है कि स्टारडम की चाहत उनके भीतर भी थी। उनका मानना है कि अभिनय के साथ शोहरत मिलने से कलाकार को ज्यादा शक्ति, बेहतर विकल्प और बड़े मुख्य किरदार आसानी से हासिल हो जाते हैं, फिर भी उनकी पहली प्राथमिकता हमेशा काम की गुणवत्ता ही रही।

मंडी के बाद फिल्म उद्योग ने बदला नजरिया

शुरुआती दौर की कुछ फिल्मों में काम करने के तुरंत बाद ही फिल्म उद्योग के कई प्रभावशाली लोगों ने उन्हें एक अलग चश्मे से देखना शुरू कर दिया था। उन्हें सलाह दी जाने लगी कि उन्होंने अपने करियर के लिए गलत रास्ता चुन लिया है। खासकर श्याम बेनेगल की फिल्म मंडी में उनके अभिनय के बाद यह धारणा बना दी गई कि अब उन्हें मुख्यधारा की किसी पारंपरिक व्यावसायिक फिल्म की मुख्य नायिका के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

इंडस्ट्री के इस संकुचित दृष्टिकोण पर सोनी राजदान आज भी हैरानी व्यक्त करती हैं। उस दौर में वह लगातार थिएटर से जुड़ी हुई थीं, इसलिए जहां भी उन्हें दमदार भूमिकाएं मिलीं, वे स्वाभाविक रूप से उस दिशा में बढ़ती चली गईं। बेनेगल जैसे प्रतिष्ठित फिल्मकार के साथ काम करना किसी भी गंभीर कलाकार के लिए स्वाभाविक फैसला था, लेकिन उद्योग के कुछ तबकों ने यह मान लिया कि इस कदम से उनका एक कमर्शियल हीरोइन के रूप में स्थापित होने का अवसर पूरी तरह समाप्त हो गया। इस सोच के कारण उन्हें करियर में एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और तेजी से किनारे कर दिया गया।

सारांश से मिला जीवन का अहम मोड़

साल 1984 में आई महेश भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म सारांश सोनी राजदान के सफर में सबसे अहम और मील का पत्थर साबित हुई। इस भावनात्मक कहानी में उनके साथ अनुपम खेर और रोहिणी हट्टंगडी ने भी बेहद प्रभावशाली भूमिकाएं निभाई थीं। इस फिल्म में अपने सशक्त अभिनय के दम पर सोनी को फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामांकन हासिल हुआ और देश-विदेश में व्यापक सराहना मिली।

सोनी राजदान का मानना है कि पहले कई फिल्मों में काम करने के बावजूद सारांश उनके लिए एक वास्तविक लॉन्चपैड बन गई, जिसे वह अपनी खुशकिस्मती मानती हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि हर कलाकार का अपना एक अलग सफर होता है और स्टार बनने का कोई एक तयशुदा पैमाना या इकलौता फॉर्मूला कभी नहीं हो सकता।

हालिया काम और आने वाली परियोजनाएं

मौजूदा दौर में भी सोनी राजदान पर्दे पर सक्रिय हैं और हाल ही में हरीश व्यास के निर्देशन में बनी फिल्म ओम का हरी में दिखाई दी हैं। सिनेमाघरों में पहुंच चुकी इस फिल्म में उनके साथ अंशुमान झा, रघुबीर यादव और आयशा कपूर जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अहम किरदार निभाए हैं। इसके अतिरिक्त वह जल्द ही नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज शक में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आएंगी। इस सीरीज से परिणीति चोपड़ा अपना डिजिटल डेब्यू कर रही हैं और यह 25 सितंबर को दर्शकों के सामने रिलीज होने वाली है।

सवाल-जवाब

सोनी राजदान ने अपने करियर की शुरुआत किस उम्र और किस फिल्म से की थी?
उन्होंने 25 साल की उम्र में अपर्णा सेन के निर्देशन में बनी फिल्म 36 चौरंगी लेन में एक सहायक किरदार से अपने करियर की शुरुआत की थी।
शुरुआती दौर में उन्हें फिल्म उद्योग में किस चुनौती का सामना करना पड़ा?
संजीदा और गैर-पारंपरिक फिल्में चुनने के कारण उद्योग के लोगों ने उन्हें किनारे कर दिया और कहा कि अब वे मुख्यधारा की कमर्शियल हीरोइन नहीं बन सकतीं।
किस फिल्म में काम करने के बाद उन्हें कहा गया कि वे हीरोइन के तौर पर लॉन्च नहीं हो सकतीं?
श्याम बेनेगल की चर्चित फिल्म मंडी में काम करने के बाद उद्योग के लोगों ने यह धारणा बना ली थी।
सोनी राजदान के करियर में किस फिल्म ने बड़ा मोड़ लाया?
साल 1984 में आई महेश भट्ट की फिल्म सारांश उनके करियर में बड़ा मोड़ साबित हुई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड का नामांकन भी मिला।
सोनी राजदान की हालिया और आगामी परियोजनाएं कौन सी हैं?
वे हालिया रिलीज फिल्म ओम का हरी में नजर आई हैं और जल्द ही 25 सितंबर को रिलीज होने वाली नेटफ्लिक्स सीरीज शक में दिखाई देंगी।
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