फिल्म निर्देशक मेघना गुलजार की नई क्राइम थ्रिलर फिल्म दायरा सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आ रहे हैं। शुक्रवार, 18 सितंबर को रिलीज हुई इस फिल्म ने अपने प्रदर्शन के पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर शुरुआती आंकड़ों के साथ कदम रखा है। कानून व्यवस्था, अपराध की पड़ताल और इंसाफ की अवधारणा पर गंभीरता से केंद्रित इस फिल्म को लेकर सिनेमा प्रेमियों और समीक्षकों के बीच काफी चर्चा बनी हुई थी।
बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन की शुरुआती कमाई और स्क्रीन ऑक्यूपेंसी
सिनेमा उद्योग के आंकड़ों पर नजर रखने वाले मंच सैकनिल्क के लाइव आंकड़ों के अनुसार, दायरा ने अपने रिलीज के पहले दिन भारत में लगभग 0.30 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है। शुरुआती दौर में फिल्म के लिए देशभर में 1,346 शो सूचीबद्ध किए गए थे। दर्शकों की संख्या के लिहाज से देखा जाए तो हिंदी संस्करण में लगभग 9 प्रतिशत की ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई, जबकि मलयालम संस्करण के शो में लगभग 7 प्रतिशत दर्शक उपस्थिति देखने को मिली। शुरुआती घंटों के ये लाइव आंकड़े बताते हैं कि जैसे-जैसे बाकी शो के आंकड़े जुड़ेंगे, पहले दिन की कुल कमाई में बदलाव संभव है।
शुरुआती कारोबार को देखते हुए यह साफ होता है कि फिल्म सिनेमाघरों में धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फिल्म को मुख्य रूप से हिंदी भाषा में प्रदर्शित किया गया है, जबकि इसके साथ एक मलयालम संस्करण भी दर्शकों के लिए पेश किया गया है। ट्रैक किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि कुल शो और टिकटों की बिक्री में सबसे बड़ा हिस्सा हिंदी भाषा का ही है, जबकि मलयालम संस्करण बहुत सीमित स्तर पर सिनेमाघरों में दिखाया जा रहा है।
कानून और त्वरित न्याय की टक्कर दर्शाती कहानी
दायरा की पूरी पटकथा दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो न्याय और इंसाफ को लेकर बिल्कुल विपरीत दृष्टिकोण रखते हैं। फिल्म में करीना कपूर खान ने डीसीपी अजूनी कोहली का किरदार निभाया है, जो किसी भी स्थिति में तय कानूनी प्रक्रिया और नियमों के पालन पर भरोसा करती हैं। वहीं दूसरी तरफ पृथ्वीराज सुकुमारन ने डीसीपी रमन कुमार की भूमिका निभाई है, जिनका मानना है कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था कई बार पीड़ितों को न्याय दिलाने में असफल रह जाती है।
फिल्म का ताना-बाना एक गंभीर आपराधिक वारदात से शुरू होता है, जिसके बाद जनता में भारी आक्रोश भड़क उठता है। इसके बाद पुलिस की तरफ से की गई एक कार्रवाई खुद एक उच्चस्तरीय जांच के दायरे में आ जाती है। इस पूरे मामले और पुलिसिया कार्रवाई की निष्पक्ष जांच का जिम्मा अजूनी को सौंपा जाता है, जबकि दूसरी ओर रमन के उठाए गए कदम उन्हें सीधे तौर पर इस जांच के घेरे में खड़ा कर देते हैं।
यह कहानी किसी पारंपरिक एक्शन या कॉप थ्रिलर की तरह आगे बढ़ने के बजाय कानूनी प्रक्रियाओं और तुरंत न्याय की जनभावना के बीच चलने वाले तनाव पर रोशनी डालती है। पटकथा में प्रशासनिक ढांचे की कमियों और उस मुश्किल स्थिति को भी बारीकी से पेश किया गया है, जहां लोगों का तीखा गुस्सा और देश की कानूनी संहिता आमने-सामने आकर खड़े हो जाते हैं।
कलाकारों का अभिनय और समीक्षकों की राय
शुरुआती समीक्षाओं में फिल्म के मुख्य कलाकारों के अभिनय और फिल्म के विषय को लेकर तारीफ की गई है, हालांकि कुछ केंद्रीय विचारों को पर्दे पर पेश करने के तरीके को लेकर कुछ आलोचनाएं भी सामने आई हैं। समीक्षकों का मानना है कि यह फिल्म व्यवस्था और न्याय से जुड़े कई गंभीर सवाल तो उठाती है, लेकिन उन विचारों को जिस गहराई तक ले जाना चाहिए था, वहां तक वह पूरी तरह नहीं पहुंच पाती। इसके बावजूद करीना कपूर खान के अजूनी के रूप में सधे हुए अभिनय और पृथ्वीराज सुकुमारन के रमन के दमदार किरदार की विशेष सराहना की गई है। इसके साथ ही कहानी के मुख्य टकराव को बहुत संयमित तरीके से संभालने का भी जिक्र समीक्षाओं में हुआ है।
फिल्म समीक्षक और ट्रेड विशेषज्ञ तरण आदर्श ने अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया में फिल्म को एक विचारोत्तेजक और बेहतरीन तरीके से बनाई गई रचना बताया है। उनका कहना है कि गंभीर विषय, लंबे संवाद वाले दृश्यों और विशेष शैली के कारण यह फिल्म मुख्य रूप से एक सीमित और संजीदा वर्ग के दर्शकों को अधिक पसंद आ सकती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में सिनेमाघरों में इस फिल्म के टिके रहने और कारोबार को बढ़ाने में दर्शकों की आपसी चर्चा यानी माउथ पब्लिसिटी की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है।
कलाकारों का चयन और सहायक भूमिकाएं
करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन की जोड़ी इस फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरी है। जहां अजूनी का किरदार संस्थागत जवाबदेही और प्रक्रिया के प्रति निष्ठा को प्रदर्शित करता है, वहीं रमन का किरदार उस व्यवस्था के प्रति एक उग्र और कठोर प्रतिक्रिया को दिखाता है जिसे वह विफल मान चुका है। इन दोनों किरदारों के विचारों का यही विरोधाभास पूरी कहानी को एक मजबूत नाटकीय तनाव प्रदान करता है। फिल्म किसी एक अधिकारी को सही या दूसरे को गलत साबित करने के बजाय न्याय को लेकर उनके अलग-अलग तरीकों को जांच के केंद्र में रखती है।
मुख्य कलाकारों के अलावा फिल्म की सहायक भूमिकाओं में जितेंद्र जोशी, बिस्वापति सरकार, क्षिति जोग और कंवलजीत सिंह जैसे मंझे हुए अभिनेता शामिल हैं। समीक्षकों ने विशेष रूप से क्षिति जोग के काम का उल्लेख किया है, जिन्होंने कहानी में अपराध की शिकार हुई पीड़िता की मां का भावुक और सशक्त किरदार निभाया है।



















