सिनेमा के पर्दे पर कई दशक पहले दो चमकते चेहरों के बीच कड़ी टक्कर की चर्चाएं आम थीं, लेकिन असल जिंदगी में उनके बीच एक बेमिसाल और सहज दोस्ती पनप रही थी। 6 अक्टूबर 1946 को जन्मे विनोद खन्ना और अमिताभ बच्चन जब हिंदी सिनेमा में अपने पैर जमाने की जद्दोजहद कर रहे थे, तभी दोनों का आमना-सामना हुआ। फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ के सेट पर शुरू हुआ यह परिचय जल्द ही एक अटूट रिश्ते में तब्दील हो गया। उस दौर में जब दोनों कलाकार अपने करियर के शुरुआती संघर्ष से जूझ रहे थे, तब सेट पर साझा किए गए पलों ने इस रिश्ते की मजबूत नींव रखी।
शूटिंग के ब्रेक से लेकर आधी रात के सफर तक
फिल्मों की शूटिंग के दौरान दोनों का तालमेल देखते ही बनता था। काम के बीच जब भी लंच ब्रेक होता, दोनों अक्सर एक साथ बैठकर खाना खाते थे। कई बार ऐसा भी होता था कि वे मेकअप रूम में बैठकर घंटों गंभीर और मजेदार विषयों पर गपशप करते रहते थे। दिनभर की कड़ी मेहनत और पैकअप के बाद भी उनका साथ खत्म नहीं होता था। दोनों कार में सवार होकर देर रात की ड्राइव पर निकल जाते थे और जुहू बीच की शांत लहरों के किनारे पहुंचकर लंबा वक्त बिताया करते थे।
ताज होटल का डिस्को क्लब और वो मजेदार वाकया
अमिताभ बच्चन ने अपने एक संस्मरण में दोनों के जुड़ाव से जुड़ा एक बेहद मजेदार किस्सा साझा किया था। उस जमाने में मुंबई के मशहूर ताज होटल में एक बेहद लोकप्रिय डिस्को क्लब हुआ करता था। विनोद खन्ना के पास उस प्रतिष्ठित क्लब की सदस्यता थी, जबकि अमिताभ बच्चन उसके सदस्य नहीं थे। जब भी दोनों का मन क्लब जाने का होता, विनोद खन्ना बिना किसी हिचकिचाहट के अपने साथी अमिताभ को अपने साथ क्लब के भीतर ले जाते थे। यह छोटी सी घटना यह दर्शाती है कि दोनों के रिश्ते में औपचारिकता की कोई जगह नहीं थी और विनोद अपने दोस्त का ख्याल किस सादगी से रखते थे।
सिनेमाई पर्दे पर ब्लॉकबस्टर जोड़ी और पर्दे के पीछे का सच
सत्तर के दशक में जब अमिताभ बच्चन का सितारा बुलंदी पर था, उसी वक्त विनोद खन्ना भी अपनी अदाकारी और स्टाइल से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे थे। दोनों कलाकारों ने कई यादगार फिल्मों में एक साथ स्क्रीन साझा की। ‘हेरा फेरी’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘परवरिश’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी। दर्शकों ने पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री को हाथों-हाथ लिया। कभी वे जिगरी दोस्त बने तो कभी भाइयों के किरदार में नजर आए। उदाहरण के लिए, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की कहानी का मूल आधार ही उनकी दोस्ती थी, जबकि ‘परवरिश’ में दोनों ने भाइयों की भूमिका बखूबी निभाई थी। वहीं ‘अमर अकबर एंथनी’ में उनका अभिनय आज भी दर्शकों को खूब लुभाता है।
प्रतिद्वंद्विता की अफवाहों पर विनोद खन्ना का दो टूक जवाब
उस दौर में पत्र-पत्रिकाओं में दोनों के बीच पेशेवर प्रतिद्वंद्विता को लेकर तरह-तरह के दावे किए जाते थे। मीडिया अक्सर उन्हें एक-दूसरे का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी साबित करने में जुटा रहता था। हालांकि, विनोद खन्ना ने साल 2006 में दिए गए एक साक्षात्कार में इन तमाम बातों को सिरे से नकार दिया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि उनके बीच दुश्मनी या तकरार की बातें पूरी तरह से मीडिया की उपज थीं और वास्तविकता यह थी कि वे दोनों हमेशा से बेहद अच्छे दोस्त रहे। 27 अप्रैल 2017 को विनोद खन्ना इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन दोनों दिग्गजों के ये किस्से आज भी उनकी आत्मीयता की गवाही देते हैं।


















