भारतीय सिनेमा के इतिहास में किसी अभिनेता की ऐसी उल्कापिंड जैसी शुरुआत विरले ही देखने को मिलती है, जैसी 1990 के दशक में नई दिल्ली से आए एक युवा कलाकार की देखने को मिली। वर्ष 1992 में प्रदर्शित फिल्म दीवाना के माध्यम से बड़े पर्दे पर कदम रखने वाले इस अभिनेता ने अपने शुरुआती दौर से ही दर्शकों के दिलों पर राज करना शुरू कर दिया था। इस फिल्म की कहानी के दूसरे हिस्से में प्रवेश करने के बावजूद, उन्होंने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता के बल पर रातोंरात राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान कायम कर ली।
दीवाना की धमाकेदार एंट्री से राष्ट्रीय पहचान
वर्ष 1992 की ब्लॉकबस्टर फिल्म दीवाना में बाइक पर सवार होकर ऐसी दीवानगी गाना गाते हुए उनकी शुरुआती झलक आज भी हिंदी सिनेमा इतिहास की सबसे यादगार और प्रतिष्ठित एंट्री मानी जाती है। अपनी पहली ही फिल्म से उन्होंने यह साफ कर दिया था कि वे लंबे समय तक दर्शकों के दिलों पर छाने वाले हैं। इस बड़ी सफलता के तुरंत बाद, वर्ष 1993 में यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म डर पर्दे पर आई, जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी।
डर के साथ जोखिम और नया प्रयोग
फिल्म डर में उन्होंने एक सिरफिरे आशिक राहुल मेहरा का नकारात्मक किरदार निभाया। इस फिल्म में उनका बोला गया संवाद क-क-क-किरण और उनका खौफनाक अभिनय दर्शकों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हुआ। एक नवोदित अभिनेता के तौर पर नकारात्मक भूमिका चुनने का जोखिम उठाकर उन्होंने यह साबित किया कि वे पारंपरिक ढर्रे को तोड़ने में माहिर हैं। लीक से हटकर निर्णय लेना और दर्शकों का विश्वास जीतना उनकी कलात्मक यात्रा की मुख्य पहचान बन गया।
करण अर्जुन का सिनेमाई तूफान
शाहरुख खान के करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अंग्रेजी के 'K' अक्षर से शुरू होने वाले नाम की फिल्मों का विशेष योगदान रहा है। वर्ष 1995 में राकेश रोशन द्वारा निर्देशित फिल्म करण अर्जुन सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में शाहरुख खान और सलमान खान की जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता का इतिहास रचा। दो अलग-अलग जन्मों की कहानी पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने अत्यंत गंभीरता, आक्रोश और गहराई के साथ अपना रोल निभाया। मेरे करण अर्जुन आएंगे जैसे कालजयी संवादों से सजी यह फिल्म उस दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बनी और इसने यह स्थापित कर दिया कि वे केवल रोमांटिक ही नहीं, बल्कि एक्शन और भावनात्मक किरदारों में भी बेजोड़ हैं।
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का सांस्कृतिक इतिहास
वर्ष 1995 में ही रिलीज हुई दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे केवल एक कमर्शियल फिल्म बनकर नहीं रही, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सिनेमा के मेल का एक महान उत्सव बन गई। आदित्य चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज मल्होत्रा का किरदार निभाकर उन्होंने पूरे देश के युवाओं को प्रेम के नए मायने सिखाए। मुंबई के ऐतिहासिक मराठा मंदिर थिएटर में दशकों तक लगातार प्रदर्शित होकर इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक कभी न टूटने वाला कीर्तिमान स्थापित कर दिया।
दिल तो पागल है से रोमांस के किंग
रोमांस के इस दौर को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1997 में यश चोपड़ा की म्यूजिकल फिल्म दिल तो पागल है दर्शकों के सामने आई। इसमें राहुल की भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगीत, नृत्य, प्रेम और आधुनिक रिश्तों के ताने-बाने को बेहद खूबसूरती के साथ पेश किया। इस फिल्म की शानदार सफलता ने उन्हें आधिकारिक तौर पर भारतीय सिनेमा का रोमांस का किंग बना दिया।
कुछ कुछ होता है और पॉप कल्चर क्रांति
इसके बाद वर्ष 1998 में करण जौहर के निर्देशन की पहली फिल्म कुछ कुछ होता है रिलीज हुई, जिसने देश के युवाओं के बीच एक नई पॉप कल्चर क्रांति को जन्म दिया। बास्केटबॉल मैच के रोमांच से लेकर फ्रेंडशिप बैंड देने के ट्रेंड तक, इस फिल्म का प्रत्येक दृश्य युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। फिल्म में काजोल और रानी मुखर्जी के साथ उनकी शानदार ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान बनाए और उनके स्टारडम को मजबूती प्रदान की।



















