चंद्रशेखर वैद्य: जूनियर आर्टिस्ट से 'रामायण' के सुमंत तक, हिंदी सिनेमा के एक बहुमुखी कलाकार की पूरी कहानीबॉलीवुड
3 घंटे पहले· 2

चंद्रशेखर वैद्य: जूनियर आर्टिस्ट से 'रामायण' के सुमंत तक, हिंदी सिनेमा के एक बहुमुखी कलाकार की पूरी कहानी

अभिनेता, निर्देशक और निर्माता रहे चंद्रशेखर वैद्य ने 110 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, लेकिन घर-घर पहचान उन्हें 64 साल की उम्र में 'रामायण' के सुमंत के किरदार से मिली।

हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने पर्दे के सामने और पीछे, दोनों जगह अपनी छाप छोड़ी। चंद्रशेखर वैद्य उन्हीं में से एक थे। अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के रूप में दशकों तक सक्रिय रहे इस कलाकार को असली पहचान तब मिली जब उनकी उम्र 64 साल थी, और वह भूमिका टेलीविजन के इतिहास में अमर हो गई।

हैदराबाद से मुंबई तक का सफर

चंद्रशेखर वैद्य का जन्म 7 जुलाई 1922 को तत्कालीन हैदराबाद राज्य में हुआ, जो आज तेलंगाना का हिस्सा है। फिल्मों के प्रति लगाव उन्हें बचपन से ही था और यही जुनून आगे चलकर उनके जीवन की दिशा तय करने वाला था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 1940 के दशक की शुरुआत में बीच में ही कॉलेज छोड़ दिया और मुंबई की राह पकड़ ली।

फिल्म इंडस्ट्री में उनका पहला कदम मशहूर गायिका शमशाद बेगम की सिफारिश से पड़ा। इसके बाद उन्होंने पुणे के शालीमार स्टूडियो में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी जगह बनाने लगे।

जूनियर आर्टिस्ट के रूप में पहली पारी

उनके करियर की औपचारिक शुरुआत 1950 में फिल्म 'बेबस' से हुई, जहां उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम किया। शुरुआती दौर का संघर्ष धीरे-धीरे रंग लाया और बेहतर मौके सामने आने लगे। साल 1953 में आई फिल्म 'सुरंग' में उन्हें एक अहम भूमिका निभाने का अवसर मिला।

इसके बाद का दौर उनके लिए लगातार काम का रहा। 'काली टोपी लाल रुमाल', 'बारादरी', 'बसंत बहार', 'गेटवे ऑफ इंडिया', 'फैशन', 'बरसात की रात', 'अंगुलिमाल', 'रुस्तम-ए-बगदाद' और 'जहां आरा' जैसी कई फिल्मों में दर्शकों ने उन्हें देखा।

कैमरे के पीछे भी आजमाया हाथ

चंद्रशेखर का सफर सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने निर्देशन और निर्माण की कमान भी संभाली। साल 1964 में उन्होंने 'चा चा चा' फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया और साथ ही उसमें मुख्य भूमिका भी निभाई। इसके बाद 'स्ट्रीट सिंगर' का भी निर्माण और निर्देशन उन्होंने किया।

जैसे-जैसे मुख्य भूमिकाओं के मौके कम होने लगे, उन्होंने कैरेक्टर रोल्स की ओर रुख कर लिया। हर तरह के किरदार में जान फूंक देना उनकी खूबी थी, और इसी दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।

'रामायण' के सुमंत ने दिलाई घर-घर पहचान

उनके पूरे करियर का सबसे यादगार पड़ाव आया रामानंद सागर के ऐतिहासिक धारावाहिक 'रामायण' के साथ। इसमें उन्होंने राजा दशरथ के मंत्री और सारथी आर्य सुमंत की भूमिका निभाई। उस वक्त वह 64 साल के थे, लेकिन उनकी दमदार अदाकारी ने इस किरदार को हमेशा के लिए दर्शकों के मन में बसा दिया।

अभिनय के अलावा वह इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के हक की लड़ाई में भी आगे रहे। 1985 से 1996 तक उन्होंने सिने आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और कलाकारों व कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए।

सादगी भरी निजी जिंदगी

साल 2000 में आई फिल्म 'खौफ' उनके अभिनय करियर की आखिरी कड़ी बनी, जिसके बाद उन्होंने अदाकारी को अलविदा कह दिया। निजी जीवन की बात करें तो उनकी शादी महज 13 साल की उम्र में हो गई थी। पढ़ाई आगे जारी रखने की उनकी इच्छा थी, लेकिन सातवीं कक्षा के बाद वह इसे जारी नहीं रख सके। बेहद सादगी से जीवन बिताने वाले चंद्रशेखर वैद्य के बेटे अशोक शेखर टीवी प्रोड्यूसर हैं।

चंद्रशेखर वैद्य आज भले ही हमारे बीच न हों, लेकिन उन्होंने जिन किरदारों में जान डाली और हिंदी सिनेमा को जो योगदान दिया, वह हमेशा याद रखा जाएगा।

सवाल-जवाब

चंद्रशेखर वैद्य को सबसे ज्यादा पहचान किस किरदार से मिली?
उन्हें घर-घर पहचान रामानंद सागर के धारावाहिक 'रामायण' में राजा दशरथ के मंत्री और सारथी आर्य सुमंत के किरदार से मिली।
'रामायण' में सुमंत का किरदार निभाते समय उनकी उम्र कितनी थी?
उस समय उनकी उम्र 64 साल थी।
उन्होंने किन फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया?
उन्होंने 1964 में 'चा चा चा' और बाद में 'स्ट्रीट सिंगर' का निर्माण और निर्देशन किया।
उनकी आखिरी फिल्म कौन सी थी?
साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म 'खौफ' के बाद उन्होंने अभिनय से संन्यास ले लिया।
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