भारतीय सिनेमा के 1970 और 1980 के दशक में अपनी मनमोहक अदाकारी, बेहतरीन नृत्य और अनोखे फैशन स्टाइल से दर्शकों का दिल जीतने वाली अभिनेत्री मुमताज का दौर हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे सुनहरे अध्यायों में गिना जाता है। अपने करियर के दौरान उन्होंने हर तरह के किरदार को पर्दे पर बेहद जीवंतता के साथ निभाया। उस जमाने में बड़े-बड़े अभिनेताओं की मौजूदगी के बावजूद मुमताज की अपनी एक अलग चमक होती थी, जो दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लाती थी। अपनी लोकप्रियता और सफलता के सबसे ऊंचे मुकाम पर मौजूद होने के बावजूद उन्होंने एक महत्वपूर्ण पारिवारिक फैसले के तहत अभिनय की दुनिया को अलविदा कह दिया और अपना घर बसा लिया।
शुरुआती संघर्ष और स्टंट फिल्मों से मुख्यधारा की अभिनेत्री बनने का सफर
मुमताज का जन्म 31 जुलाई 1947 को मुंबई शहर में हुआ था और उनका वास्तविक नाम मुमताज अस्करी था। उनका बचपन सिनेमाई माहौल के बीच बीता, जिससे बेहद छोटी उम्र में ही उनका प्रवेश अभिनय क्षेत्र में हो गया। अपने शुरुआती सफर में उन्हें कई छोटी भूमिकाओं से ही संतोष करना पड़ा था। उस दौर में उद्योग में उन्हें मुख्य रूप से एक्शन और स्टंट फिल्मों की अभिनेत्री के रूप में देखा जाने लगा। उन्होंने पहलवान और अभिनेता दारा सिंह के साथ कई एक्शन प्रधान फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान तो दिलाई, लेकिन वास्तविक सफलता का रास्ता तब खुला जब निर्माताओं ने उन्हें बड़े कलाकारों के साथ मुख्य भूमिकाओं में कास्ट करना शुरू किया।
अपनी शानदार सुंदरता, नृत्य कला और बहुमुखी अभिनय कौशल के दम पर उन्होंने जल्द ही सिनेमा प्रेमियों के दिलों पर राज करना शुरू कर दिया। उन्होंने 'खिलौना', 'दुश्मन', 'प्रेम नगर', 'रोटी', 'महबूबा', 'ये रात फिर ना आएगी', 'हमराज', 'ब्रह्मचारी' और 'चोर सिपाही' जैसी दर्जनों सुपर-हिट और यादगार फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। कई फिल्मों की समीक्षाओं और दर्शकों की प्रतिक्रियाओं में यह साफ देखा गया कि उनका अभिनय पर्दे पर मुख्य पुरुष किरदार यानी हीरो के प्रभाव से भी कहीं अधिक मजबूत साबित होता था।
राजेश खन्ना के साथ पर्दे पर एक यादगार और हिट जोड़ी का दौर
मुमताज के करियर का सबसे यादगार पहलू हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ उनकी सिल्वर स्क्रीन जोड़ी रही। उस कालखंड में राजेश खन्ना की दीवानगी पूरे देश में चरम पर थी और उनके प्रशंसक उनकी एक झलक देखने के लिए बेताब रहते थे। जब मुमताज और राजेश खन्ना पर्दे पर एक साथ आते, तो उनकी केमिस्ट्री बेहद स्वाभाविक और जीवंत नजर आती थी। मुमताज का चुलबुला अंदाज और राजेश खन्ना की रोमांटिक अभिनय शैली एक-दूसरे की खूबियों को पूरा करती थी।
इस जोड़ी ने 'दो रास्ते', 'सच्चा झूठा', 'आप की कसम' और 'अपना देश' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, जिन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम काल की धरोहर माना जाता है। दोनों कलाकारों की अपार लोकप्रियता के कारण तत्कालीन मीडिया और गलियारों में उनके व्यक्तिगत संबंधों को लेकर कई तरह की अफवाहें और चर्चाएं चलती रहती थीं। हालांकि, इन सभी बातों को दरकिनार करते हुए दोनों ने हमेशा सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे को अपना बहुत ही सच्चा और अच्छा दोस्त बताया।
मां के एक सुझाव ने बदल दी जिंदगी, करियर के टॉप पर शादी और अलविदा
जब मुमताज अपने करियर की सबसे ऊंची बुलंदियों पर थीं और उनके पास फिल्मों की कोई कमी नहीं थी, तब उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। अपनी मां से मिली एक सलाह ने उनके भविष्य का रास्ता पूरी तरह बदल दिया। उनकी मां ने उनसे कहा कि अभी तुम युवा हो और तुम्हें मुख्य अभिनेत्री के रोल मिल रहे हैं, लेकिन उम्र बीतने के बाद तुम्हें हीरोइन के किरदार नहीं मिलेंगे और केवल मां या साइड रोल ही ऑफर होंगे। इसलिए करियर के इसी सही समय पर शादी करके अपना पारिवारिक जीवन शुरू करना बेहतर विकल्प होगा।
मुमताज ने अपनी मां के इस व्यावहारिक सुझाव को स्वीकार किया और साल 1974 में मशहूर उद्योगपति मयूर माधवानी के साथ विवाह के बंधन में बंध गईं। शादी के बाद उन्होंने अपने चमकते करियर को अलविदा कह दिया। आज जीवन के इस पड़ाव पर भी वह अपने फैसलों को लेकर बेहद स्पष्ट विचार रखती हैं। अभिनय की दुनिया में वापसी के सवाल पर वह स्पष्ट रूप से मानती हैं कि वह अब बुजुर्ग महिलाओं या दादी-नानी जैसी भूमिकाएं स्वीकार नहीं करेंगी।


















