साहित्यिक रचनाओं, सिनेमा और टेलीविजन के क्षेत्र में दशकों तक सक्रिय रहने वाले जाने-माने लेखक, पटकथा लेखक एवं फिल्म निर्देशक वेद राही अब इस दुनिया में नहीं रहे। 93 वर्ष की आयु में उन्होंने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अपने आवास पर 1 नवंबर को रविवार की सुबह अंतिम सांस ली। उनके देहांत की सूचना सामने आने के बाद कला, साहित्य और मनोरंजन जगत में गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है। अपने सुदीर्घ सफर में उन्होंने न केवल साहित्यिक कृतियों के जरिए विशिष्ट स्थान बनाया, बल्कि भारतीय सिनेमा और छोटे पर्दे पर भी अपनी रचनात्मक क्षमता की गहरी छाप छोड़ी।
दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक से मिली थी घर-घर पहचान
वेद राही ने अपने समूचे जीवनकाल में अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की, जिन्होंने उन्हें साहित्य जगत में अमर पहचान दिलाई। इसके बावजूद जनमानस के बीच उनका नाम उस समय सबसे अधिक चर्चा में आया जब दूरदर्शन पर उनके निर्देशन में तैयार धारावाहिक ‘गुल गुलशन गुलफाम’ प्रसारित हुआ। 1980 के दशक के अंतिम वर्षों तथा 1990 के दशक की शुरुआत में यह कार्यक्रम दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय साबित हुआ था। इस धारावाहिक की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इसने कश्मीर की समृद्ध संस्कृति, वहां के आम नागरिकों की दिनचर्या और उनके आपसी मानवीय संबंधों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया था। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश भर के उन लोगों को भी घाटी के जनजीवन को निकट से जानने का अवसर मिला, जो कभी कश्मीर नहीं गए थे।
शानदार कलाकारों से सजी थी धारावाहिक की कहानी
इस धारावाहिक के निर्माण में कई मंझे हुए अभिनेताओं ने अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा था। अभिनेता परीक्षित साहनी ने इसमें मल्ला खालिक की भूमिका निभाई थी, जबकि अभिनेत्री राधा सेठ अजीज द्याद के किरदार में दिखाई दी थीं। इस धारावाहिक की प्रमुख स्टारकास्ट में नीना गुप्ता, पंकज बेरी और कई स्थानीय कश्मीरी कलाकार शामिल रहे। बाल कलाकार के रूप में अभिनय की शुरुआत करने वाले कुणाल खेमू भी इसी धारावाहिक का हिस्सा थे, जिन्होंने अपनी सहज मासूमियत से दर्शकों का मन मोह लिया था। धारावाहिक के निर्देशन के साथ-साथ वेद राही ने इसके लिए कुछ ऐसे गीतों की रचना भी अपनी कलम से की थी, जिन्हें आज भी प्रशंसक याद करते हैं।
पटकथा लेखक के रूप में 25 फिल्मों से जुड़े रहे
सिर्फ टेलीविजन ही नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर भी वेद राही का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। उन्होंने अपने करियर में कुल 25 फिल्मों की कहानियां और पटकथाएं लिखीं। इनमें ‘पवित्र पापी’, ‘ये रात फिर न आएगी’, ‘आप आए बहार आई’, ‘पराया धन’, ‘बेईमान’, ‘मोम की गुड़िया’, ‘संन्यासी’, ‘चरस’, ‘बेजुबान’ और ‘वीर सावरकर’ जैसी कई प्रमुख फिल्में शामिल हैं। उनकी लिखी इन कहानियों पर बनी फिल्मों में राखी गुलजार जैसे प्रख्यात कलाकारों ने अपने अभिनय से जान फूंकी थी। उनके जाने से साहित्य, टेलीविजन और सिनेमा जगत का एक समृद्ध अध्याय समाप्त हो गया है।



















