अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है, जहां अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त रखे जाने की आशंकाओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार के चलते कीमती धातु में बिकवाली हावी रही। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान हाजिर सोना पिछले दिन के सुधार को थामने की कोशिश करते हुए 3,945 डॉलर के करीब मंडराता दिखा, लेकिन व्यापक रुझान कमजोर रहने के कारण यह 3,950 डॉलर के अहम स्तर से नीचे खिसक गया। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने का भाव 3,935 डॉलर पर आ चुका है, जो पिछले बंद स्तर 3,970 डॉलर से 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। सर्राफा बाजार में निवेशक किसी बड़े दांव से पहले अमेरिका के राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रमों पर पैनी नजर गड़ाए हुए हैं।
सर्राफा बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के नए आंकड़े बेहद अहम भूमिका निभाने वाले हैं। मंगलवार को जारी होने वाले अमेरिकी JOLTS जॉब ओपनिंग्स के आंकड़े श्रम बाजार की सेहत स्पष्ट करेंगे। यदि रोजगार के अवसर मजबूत बने रहते हैं, तो फेडरल रिजर्व के लिए उधार दरों को ऊंचा बनाए रखने का तर्क और मजबूत होगा, जिससे गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक आर्थिक आंकड़ों से स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक पीली धातु में सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस के चुनाव और डॉलर की चाल
अमेरिकी डॉलर में बढ़त के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक सावधानी छाई हुई है, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान कर रहा है। इन चुनावों के जरिए अमेरिकी कांग्रेस पर किस दल का नियंत्रण होगा, इसका फैसला होना है। इस चुनाव प्रक्रिया के तहत अमेरिकी सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों का नवीनीकरण होना है। इसके अलावा, फ्लोरिडा और ओहियो में दो विशेष चुनाव भी आयोजित किए जा रहे हैं, जो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा खाली की गई सीटों को भरने के लिए हो रहे हैं।
सट्टेबाजी और प्रेडिक्शन मार्केट्स में इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में क्लीन स्वीप करती है, तो यह बाजार के लिए एक बड़ा आश्चर्य साबित होगा। ऐसा अप्रत्याशित चुनावी परिणाम अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर को काफी ऊपर उठा सकता है। जब तक वोटों की गिनती पूरी नहीं हो जाती, तब तक वित्तीय बाजारों में नीतिगत अनिश्चितता बनी रहेगी और निवेशक सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
अमेरिका-ईरान कूटनीतिक समझौते की उम्मीदें
अमेरिकी डॉलर की तेज बढ़त पर रोक लगाने वाला एक अन्य बड़ा कारक मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीदें हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए एक संभावित कूटनीतिक समाधान की चर्चाओं ने डॉलर बुल्स को आक्रामक दांव लगाने से रोक रखा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सार्वजनिक रूप से संकेत दिया कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करना चाहता है और ऐसा समझौता वास्तविक रूप ले सकता है। इस कूटनीतिक रुख ने वैश्विक तनाव को कम करने की दिशा में सकारात्मक संदेश दिया है।
कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की पुष्टि करते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए विचार-विमर्श बेहद सघन तरीके से चल रहा है। दोनों पक्षों के बीच सुलह की उम्मीदों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से सोने में मिलने वाला युद्ध-संबंधी प्रीमियम भी घट रहा है, जिसके चलते सोने का भाव शुक्रवार को दर्ज किए गए अपने 3,870.23 डॉलर के निचले स्तर के करीब बना हुआ है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और सोने का गणित
संयुक्त राज्य अमेरिका में मौद्रिक नीति का निर्धारण फेडरल रिजर्व करता है, जिसके दो प्राथमिक अधिदेश हैं: मूल्य स्थिरता हासिल करना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को समायोजित करना है। जब उपभोक्ता कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेडरल रिजर्व के 2% के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो नीति निर्माता ब्याज दरों में वृद्धि करते हैं। ब्याज दरें बढ़ने से पूरी अर्थव्यवस्था में उधार लेने की लागत बढ़ जाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अमेरिका पूंजी लगाने का आकर्षक ठिकाना बन जाता है और डॉलर मजबूत होता है।
इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2% से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता चुनता है, जिससे ग्रीनबैक पर दबाव पड़ता है। फेडरल रिजर्व साल में आठ नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जहां फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) समग्र आर्थिक स्थितियों का आकलन कर मौद्रिक फैसले लेती है। इस समिति में 12 अधिकारी शामिल होते हैं, जिनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष, और शेष 11 क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों में से चार अध्यक्ष शामिल होते हैं जो रोटेशन के आधार पर एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करते हैं।
अत्यधिक गंभीर आर्थिक परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) जैसी गैर-मानक नीति का सहारा ले सकता है, जिसके जरिए वित्तीय प्रणाली में क्रेडिट प्रवाह को तेजी से बढ़ाया जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान इस उपाय का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था, जिसमें अधिक डॉलर जारी करके वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदे जाते हैं, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। वहीं दूसरी तरफ, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) इसकी विपरीत प्रक्रिया है, जिसमें केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता, जो अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक माना जाता है।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में केवल डॉलर और सोने के बीच ही द्वंद्व नहीं चल रहा, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी तीव्र उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान AUD/USD की जोड़ी लगातार दूसरे दिन फिसलते हुए दो सप्ताह के नए निचले स्तर पर आ गई। यह गिरावट रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बहुप्रतीक्षित वृद्धि के बावजूद दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का यह निर्णय सर्वसम्मत नहीं था, जहां तीन सदस्यों ने दरों को 4.60% पर अपरिवर्तित रखने का पक्ष लिया था। इस आंतरिक मतभेद ने आगे आक्रामक मौद्रिक सख्ती की संभावनाओं को कमजोर कर दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर की मजबूती के सामने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पस्त हो गई।
दूसरी ओर, USD/JPY जोड़ी ने मंगलवार को एशियाई सत्र के दौरान पिछले दिन के 158.00 तक के लाभ को आंशिक रूप से गंवाते हुए नीचे की ओर रुख किया। अमेरिकी चुनावों और ईरान कूटनीति के बीच डॉलर में कमजोरी और जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को सहारा दिया। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता ने येन के उछाल को सीमित रखा है, जिसके कारण यह जोड़ी एक परिचित दायरे में ही अटकी हुई है।
तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण ट्रेडिंग स्तर
सोने के तकनीकी ढांचे पर नजर डालें तो मंदड़िए शुक्रवार के स्विंग लो यानी 3,870 डॉलर के स्तर को संभावित मांग क्षेत्र के रूप में देख रहे हैं। यदि सोना इस अहम सपोर्ट स्तर को नीचे की ओर तोड़ता है, तो पहले से स्थापित गिरावट का दौर और गहरा सकता है। इसके विपरीत, ऊपर की ओर तत्काल प्रतिरोध 100-पीरियड ईएमए द्वारा 4,053 डॉलर पर तय किया गया है। गिरावट के दबाव को कम करने और एक मजबूत सुधार चक्र की शुरुआत के लिए सोने को इस स्तर से ऊपर लगातार टिके रहना आवश्यक होगा।
लाइव तकनीकी संकेतकों के आधार पर, 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 34 पर स्थित है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के करीब कमजोर स्थिति को दर्शाता है। एमएसीडी (MACD) -81.06 पर है जो -70.21 के सिग्नल स्तर से नीचे बना हुआ है, और इसका हिस्टोग्राम -10.85 के साथ मंदी का स्पष्ट संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज की बात करें तो 20-दिवसीय ईएमए 4,080 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,191 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,408 डॉलर पर स्थित है, जहां 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे जाना डेथ क्रॉस मंदी का प्रमाण है। बोलिंजर बैंड 3,916 डॉलर से 4,271 डॉलर के दायरे में हैं, जबकि 14-अवधि का एडीएक्स (ADX) 32 पर मजबूत ट्रेंडिंग गति दिखा रहा है। सोने का पिवट स्तर 3,947 डॉलर है, जिसके ऊपर पहला प्रतिरोध R1 3,963 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 3,991 डॉलर पर मौजूद है। नीचे की तरफ पहला समर्थन S1 3,919 डॉलर और दूसरा समर्थन S2 3,902 डॉलर पर देखा जा रहा है। 79.41 डॉलर का एवरेज ट्रू रेंज (ATR) दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है, जिसे ट्रेडर्स स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

















