त्योहारी सीजन में अगर पारंपरिक व्यंजनों के साथ कुछ अलग और कुरकुरा परोसने की योजना बन रही है, तो दक्षिण भारत का प्रसिद्ध व्यंजन मुरक्कू एक शानदार चुनाव साबित हो सकता है। स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है। अगर इसे ठीक ढंग से बनाकर सुरक्षित रखा जाए, तो यह लगभग एक महीने तक अपनी ताजगी और कुरकुरापन नहीं खोता। शाम की चाय के साथ यह कुरकुरा नाश्ता बेहद स्वादिष्ट लगता है। चावल के आटे और उड़द की दाल के मेल से तैयार होने वाला यह स्नैक बेहद आसान विधि से घर की रसोई में बनाया जा सकता है।
सटीक अनुपात और दाल तैयार करने का तरीका
एकदम सही बनावट और स्वाद पाने के लिए सामग्री का नाप सही होना बेहद आवश्यक है। इस नाश्ते के लिए मुख्य रूप से चावल के आटे और उड़द दाल के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। सामग्री का अनुपात 4 अनुपात 1 रखा जाता है, यानी अगर 4 कप चावल का आटा लिया गया है, तो उसके साथ 1 कप उड़द दाल का आटा मिलाया जाएगा। चावल के आटे को हमेशा बारीक छलनी से छानकर इस्तेमाल करें।
उड़द दाल का आटा बाजार से खरीदा जा सकता है या इसे घर पर भी सरलता से बनाया जा सकता है। घर पर तैयार करने के लिए बिना छिलके वाली साबुत या धुली उड़द दाल लें और उसे धीमी आंच पर कड़ाही में सूखा भूनें। दाल को तब तक भूनना चाहिए जब तक कि उसमें से हल्की सौंधी सुगंध न आने लगे। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दाल का रंग अधिक गहरा या भूरा न होने पाए। भूनने के बाद दाल को पूरी तरह ठंडा होने दें, फिर मिक्सी के जार में डालकर एकदम महीन पीस लें। इसके बाद इसे छलनी से छानकर 1 कप नाप लें।
मसालों का संतुलन और आटा गूंथने की तकनीक
तैयारी के अगले चरण में छाने हुए चावल के आटे और उड़द दाल के आटे को एक बड़े बर्तन में एक साथ मिलाएं। खस्तापन लाने के लिए इस मिश्रण में 1 से 2 चम्मच शुद्ध घी या मक्खन मिलाएं। स्वाद और पाचन के लिए इसमें अपनी पसंद के अनुसार थोड़ी अजवाइन या जीरा डाला जा सकता है। इसके साथ ही मिश्रण में हल्का सा नमक और जरा सी लाल मिर्च पाउडर डालकर सभी सूखी सामग्रियों को हाथों से अच्छी तरह मिला लें।
अब मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी डालते हुए आटा गूंथना शुरू करें। तैयार किया जाने वाला आटा न तो बहुत अधिक कड़ा होना चाहिए और न ही अत्यधिक मुलायम, बल्कि इसे मध्यम लचीला रखना जरूरी है। आटा तैयार होने के बाद उसे एक गीले कपड़े से ढककर 15 से 20 मिनट के लिए रख दें ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए। समय पूरा होने पर कपड़े को हटाएं, आटे को एक बार फिर हल्के हाथों से गूंथ लें और इसी दौरान गैस पर कड़ाही में तलने के लिए तेल गर्म होने रख दें।
मुरक्कू गढ़ने और तलने की सावधानियां
मुरक्कू बनाने वाले पारंपरिक सांचे के भीतरी हिस्से में थोड़ा तेल लगाकर उसे अच्छी तरह चिकना कर लें ताकि आटा अंदर चिपके नहीं। तैयार आटे का एक हिस्सा सांचे में भरें और छोटी-छोटी चकली का आकार देते हुए दबाएं। इन चकलियों को पार्चमेंट पेपर, किसी थाली के उल्टे हिस्से या चौड़ी कलछी के ऊपर बनाकर निकालें, जिससे उन्हें उठाकर सीधे गर्म तेल में छोड़ना बेहद आसान हो जाए।
एक साथ बहुत अधिक चकली बनाकर न छोड़ें और न ही पुरानी बनी चकलियों को सूखने दें। जैसे ही 4 से 5 चकलियां बनकर तैयार हों, उन्हें मध्यम गर्म तेल में आराम से डाल दें। तलते समय आंच को मध्यम ही रखें ताकि वे अंदर तक अच्छी तरह पककर कुरकुरी बनें। चकलियों को दोनों तरफ से उलट-पलटकर सुनहरा होने तक सेक लें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बचे हुए आटे को हमेशा गीले कपड़े से ढककर रखें ताकि उसमें नमी बनी रहे।
सुरक्षित भंडारण और परोसने का तरीका
तलते समय एक बेहद जरूरी सावधानी यह रखनी चाहिए कि चकली का अंतिम सिरा दबाकर अच्छी तरह चिपका दें। यदि सिरा खुला रह गया तो गर्म तेल में जाते ही चकली खुलकर अपना आकार खो सकती है। हालांकि आकार बिगड़ने पर भी स्वाद में कोई कमी नहीं आती, लेकिन दिखने में यह सुंदर लगे इसलिए सिरा सील करना बेहतर रहता है।
कड़ाही से निकालने के बाद जब मुरक्कू पूरी तरह ठंडे होकर सामान्य तापमान पर आ जाएं, तब उन्हें किसी साफ और एयरटाइट डिब्बे में बंद करके रख दें। हवा न लगने से यह स्नैक हफ्तों तक सीलन से बचा रहता है और खराब नहीं होता। इसे गर्मागर्म चाय के साथ खुद भी खाएं और घर आए मेहमानों को भी परोसें। घर पर तैयार इस पारंपरिक और कुरकुरे नाश्ते का स्वाद हर किसी को जरूर पसंद आएगा।



















