बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने शनिवार, 17 अक्टूबर को बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करते हुए फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का फरमान सुनाया गया था। इस कानूनी याचिका में तर्क दिया गया है कि संबंधित प्राधिकारियों का यह निर्देश पूरी तरह से मनमाना, बिना किसी ठोस आधार के और दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है। याचिका के जरिए अदालत से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई है, जिस पर संभवतः अगले सोमवार को सुनवाई हो सकती है।
दो हफ्ते का समय और कारण बताओ नोटिस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आमिर खान के भांजे इमरान खान को जारी किए गए मूल नोटिस में उन्हें देश छोड़ने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। एक्टर इमरान खान का कहना है कि वह महज 2 साल की उम्र से ही भारत में निवास कर रहे हैं। उन्होंने शनिवार को अपनी याचिका ई-फाइल के माध्यम से दर्ज कराई। उसी दिन ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों ने उन्हें एक नया 'शो कॉज नोटिस' भी भेजा, जिसमें पूछा गया कि विदेशियों और OCI यानी ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों न अमल में लाई जाए।
मौलिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के हनन का आरोप
14 अक्टूबर को जारी किए गए शुरुआती आदेश को खारिज करने की मांग करते हुए याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम कथित असंतोष को दबाने और बाहरी दबाव के चलते उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार और अनुच्छेद 21 यानी जीवन के अधिकार के तहत मिलने वाले मौलिक संरक्षण देश में रहने वाले विदेशियों को भी प्राप्त हैं। याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि उन्हें किसी भी प्रकार का नोटिस थमाने से पहले अपना बचाव करने या स्पष्टीकरण देने का कोई अवसर नहीं दिया गया, जो सीधे तौर पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
विरोध प्रदर्शन के बाद गरमाया मामला और वकीलों की टीम
मुंबई में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के विरोध में आयोजित एक प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान ने शिरकत की थी। इस घटना के ठीक चार दिन बाद, इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत उन्हें यह भारत छोड़ो नोटिस थमाया गया था। याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि इस आदेश में किसी भी विशिष्ट नियम या प्रावधान का स्पष्ट जिक्र नहीं है जिसका उल्लंघन हुआ हो, जबकि अभिनेता का पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। इस पूरी कानूनी लड़ाई को लड़ने के लिए MZM लीगल फर्म के एडवोकेट ज़ुल्फी मेमन, परवेज मेमन और चिराग नाइक को आगे किया गया है, जिनकी देखरेख में हाई कोर्ट में तत्काल राहत की गुहार लगाई गई है।



















