हवा के ऊपरी स्तर पर बने परिसंचरण तंत्र तथा पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त असर से मरुधरा के वायुमंडलीय मिजाज में नया फेरबदल दर्ज किया गया है। पूर्वी राजस्थान के मैदानी तथा हाड़ौती अंचल के चुनिंदा हिस्सों में 18 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का अनुमान लगाया गया है। इस दौरान वायुमंडल में अचानक अस्थिरता पैदा होने से 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे के वेग से धूल भरी झोंकेदार हवाएं चलने के आसार हैं। विशेष रूप से हाड़ौती तथा ढूंढाड़ से सटे छह सीमावर्ती जिलों में आकाशीय तड़ित और अंधड़ को लेकर अत्यधिक सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। दूसरी ओर थार रेगिस्तान से जुड़े पश्चिमी संभागों में मौसम लगभग शुष्क रहेगा।
पूर्वी राजस्थान के चार संभागों में बादलों की सक्रियता
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के ताजा बुलेटिन पर गौर करें तो इस समय राज्य के पूर्वी वायुमंडल में एक चक्रवाती परिसंचरण तंत्र सक्रिय अवस्था में बना हुआ है। इसी प्रणाली के चलते जयपुर, भरतपुर, अजमेर तथा कोटा संभाग के कई क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आसमान में घने बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और छिटपुट जगहों पर मेघगर्जन के साथ पानी गिरेगा। रविवार के दिन भी पूर्वी अंचल की यह मौसमी हलचल जारी रहने की पूरी उम्मीद है। हालांकि बादलों का यह जमावड़ा प्रांतीय स्तर पर एक समान नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय वातावरणीय दबाव और आर्द्रता के आधार पर अलग-अलग इलाकों में सीमित रूप से बरसेगा।
छह संवेदनशील जिलों में सतर्कता बरतने की सलाह
प्रादेशिक मौसम कार्यालय ने बारां, बूंदी, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर और टोंक जिलों के लिए मौसम की दृष्टि से विशेष एहतियात बरतने को कहा है। इन छह विशिष्ट जिलों के ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में बादलों की तीव्र गड़गड़ाहट के बीच बिजली गिरने की प्रबल आशंका बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली अंधड़ हवाएं पेड़ों की डालियों और कच्चे ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। आकाशीय बिजली चमकने के समय खुले खेतों, जलस्रोतों, ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभों तथा विशालकाय पेड़ों की छांव में खड़े होने से सख्त परहेज करने का परामर्श दिया गया है ताकि किसी भी तरह के जानमाल के संकट से बचा जा सके।
रेगिस्तानी इलाकों में खिली रहेगी तीखी धूप
पूर्वी राजस्थान में छाए बादलों के उलट राज्य के पश्चिमी मरुस्थलीय भूभाग में मौसम पूरी तरह साफ और शुष्क बना रहने वाला है। बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, फलोदी, जालोर, पाली, नागौर, डीडवाना-कुचामन, चूरू, हनुमानगढ़ तथा श्रीगंगानगर जैसे विस्तृत क्षेत्रों में वर्षा की परिस्थितियां एकदम नगण्य हैं। पिछले चौबीस घंटों की मौसमी स्थिति का विश्लेषण करें तो राज्य का बड़ा हिस्सा सूखा रहा, यद्यपि कहीं-कहीं पश्चिमी विक्षोभ के चलते मामूली बूंदाबांदी दर्ज की गई थी। इसी बीते चौबीस घंटे की समयावधि में बाड़मेर का अधिकतम तापमान चढ़कर 37.8 डिग्री सेल्सियस के स्तर तक जा पहुंचा, जिससे वहां दोपहर में काफी गर्मी महसूस की गई।
राजधानी जयपुर का संभावित तापमान और वातावरणीय स्थिति
गुलाबी नगर जयपुर में 18 अक्टूबर को सामान्यतः दिन में खुला आसमान रहने का आकलन है, किंतु संभाग स्तर पर स्थानीय बादलों के बनने, गड़गड़ाहट और हल्की फुहारों की गुंजाइश को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। जयपुर के लिए निर्धारित मौसम आंकड़े दर्शाते हैं कि दिन का उच्चतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास टिक सकता है, वहीं रात के समय पारा गिरकर लगभग 21 डिग्री सेल्सियस तक आने की संभावना है। स्थानीय आर्द्रता और हवा के दबाव के आधार पर शहर के अलग-अलग कोनों में तापमान में मामूली अंतर भी दिख सकता है।
19 अक्टूबर से थमेगा बादलों का दौर, अगले हफ्ते नया विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि 19 अक्टूबर से राज्यभर में सक्रिय वर्षा का यह चरण काफी हद तक शिथिल पड़ जाएगा। इसके उपरांत 20, 21 और 22 अक्टूबर को समूचे राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में धूप खिली रहेगी और मौसम में स्थिरता आएगी। पश्चिमी राजस्थान में तो आगामी पांच से छह दिनों तक लगातार सूखा मौसम रहने का अनुमान है। हालांकि यह शांति ज्यादा लंबी नहीं खिंचेगी, क्योंकि 23 और 24 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के वायुमंडल में एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के दस्तक देने के पूरे संकेत हैं, जिससे अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में एक बार फिर मौसमी करवट देखने को मिल सकती है।



















