भारतीय सिनेमा के 1970 और 1980 के दशक में परवीन बाबी एक ऐसी अदाकारा थीं, जिनकी खूबसूरती और स्टाइल ने हर किसी को अपना दीवाना बना दिया था। बड़े पर्दे पर उनकी मौजूदगी जितनी चमकदार नजर आती थी, पर्दे के पीछे उनकी निजी जिंदगी उतनी ही गहरे अंधेरे और अकेलेपन में डूबी हुई थी। कैमरे के सामने लाखों दिलों पर राज करने वाली यह अभिनेत्री असल जिंदगी में लगातार मानसिक तनाव और सामाजिक अलगाव से जूझ रही थी। जब उनके जीवन में सबसे मुश्किल दौर आया, तो पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने उनसे दूरी बना ली और वह अपने ही घर में पूरी तरह अकेली पड़ गईं।
निजी रिश्ते और मीडिया का तीखा रवैया
परवीन बाबी का व्यक्तिगत जीवन हमेशा सुर्खियों में रहा, लेकिन यही रिश्ते उनके लिए कई मानसिक परेशानियों का कारण भी बने। उनका नाम उस दौर के चर्चित अभिनेताओं और निर्देशकों के साथ जुड़ा, जिनमें कबीर बेदी और महेश भट्ट प्रमुख थे। मीडिया में उनके इन संबंधों को लेकर लगातार खबरें छपती रहीं, जिससे उनका निजी जीवन हर वक्त जनता की नजरों में बना रहा।
विशेष रूप से महेश भट्ट के साथ उनका रिश्ता काफी विवादित साबित हुआ। महेश भट्ट उस समय अपनी पत्नी किरण भट्ट के साथ विवाहित थे और इस शादी के बने रहने के दौरान ही वह परवीन बाबी के साथ रिश्ते में थे। हालांकि, जब इस संबंध की बात सार्वजनिक हुई, तो समाज और मीडिया का पूरा गुस्सा परवीन बाबी पर ही फूटा। पैपराजी ने उन्हें निशाने पर लेते हुए गंभीर टिप्पणियां कीं और उन्हें 'होम ब्रेकर' का टैग दे दिया। इस सामाजिक दबाव और एकतरफा आलोचना ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डाला।
मानसिक बीमारी और अमिताभ बच्चन पर गंभीर आरोप
समय के साथ परवीन बाबी की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। बाद के दिनों में यह बात सामने आई कि वह पैरानॉयड स्किजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं। महेश भट्ट ने कई मौकों पर उनकी इस स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। उनके अनुसार, इस बीमारी के कारण वह अत्यधिक भयभीत रहती थीं और अपने आसपास के हर व्यक्ति पर शक करने लगती थीं। इसी मानसिक अवस्था के चलते उन्होंने इंडस्ट्री के कई बड़े नामों पर चौंकाने वाले दावे किए।
इसी क्रम में साल 1980 में परवीन बाबी ने सुपरस्टार अमिताभ बच्चन पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अमिताभ बच्चन एक अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर हैं और उन्होंने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर उन्हें मारने की साजिश रची है। अभिनेत्री ने यह भी कहा था कि बिग बी के गुंडों ने उनका अपहरण कर लिया था। हालांकि, अमिताभ बच्चन ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। इस मामले में कोई भी ठोस प्रमाण सामने नहीं आया, जिसके बाद इन बयानों को उनके बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के परिणाम के रूप में ही देखा गया।
अकेलेपन का बढ़ता खौफ और इंडस्ट्री से दूरी
महेश भट्ट ने परवीन बाबी के साथ बिताए दिनों के कई दर्दनाक संस्मरण साझा किए थे, जो उनकी बीमारी की गंभीरता को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया था कि परवीन को हमेशा यह भ्रम रहता था कि उनके कमरे में जासूसी के उपकरण और कैमरे छुपाए गए हैं। वह अक्सर बहुत डरी हुई स्थिति में पाई जाती थीं। एक घटना का जिक्र करते हुए महेश भट्ट ने बताया था कि उन्होंने परवीन को अपने कमरे के कोने में हाथ में चाकू लिए बेहद सहमी हुई हालत में बैठा देखा था।
जैसे-जैसे उनकी बीमारी का असर गहराता गया, फिल्म जगत के लोगों ने उनसे किनारा करना शुरू कर दिया। कभी उनके आसपास रहने वाले दोस्तों और सहकर्मियों ने धीरे-धीरे उनसे संपर्क तोड़ लिया। इस तरह वह पूरी तरह से मुख्यधारा की दुनिया से कट गईं और अपने अपार्टमेंट के बंद कमरों में सिमटकर रह गईं।
घर के भीतर दर्दनाक अंत
परवीन बाबी का अंतिम समय अत्यंत दुखद और दिल को दहला देने वाला रहा। अपने जीवन के आखिरी दिनों में वह पूरी तरह से एकाकी जीवन जी रही थीं। उनकी मृत्यु भी उनके अपने घर के भीतर ही हुई और कई दिनों तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
जब उनके घर के दरवाजे पर कई दिनों तक दूध के पैकेट और दैनिक समाचार पत्र बिना उठे जमा होने लगे, तब आसपास के पड़ोसियों को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। पड़ोसियों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर जब पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़ा, तो कमरे के अंदर से उनका कई दिन पुराना शव बरामद हुआ। इस तरह हिंदी सिनेमा की एक सबसे चमकदार स्टार का सफर बेहद खामोश और दर्दनाक मोड़ पर समाप्त हुआ।



















