सिनेमाघरों में रिलीज के शुरुआती दो हफ्तों तक संघर्ष करने वाली फिल्म हनुमान अंश ने तीसरे सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कार दिखाया है जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित इस सिनेमाई रचना को शुरुआती 14 दिनों में दर्शकों का रिस्पॉन्स नहीं मिला था। लेकिन तीसरे हफ्ते में अचानक दर्शकों की भीड़ सिनेमाघरों की तरफ उमड़ पड़ी, जिससे इसके कलेक्शन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। टिकटों के दाम घटाने और लोगों के बीच सकारात्मक चर्चा फैलने से इस फिल्म की कमाई का आंकड़ा तेजी से ऊपर चढ़ा है।
शुरुआती 14 दिनों की सुस्ती के बाद अचानक बदला माहौल
सिनेमाघरों में यह फिल्म 7 अगस्त को प्रदर्शित हुई थी। रिलीज के पहले हफ्ते में फिल्म का कलेक्शन केवल 1.08 करोड़ रुपये रहा था। दूसरे हफ्ते में स्थिति और भी चिंताजनक हो गई, जब कुल कमाई गिरकर सिर्फ 40 लाख रुपये पर सिमट गई। शुरुआती 14 दिनों में 10 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह फिल्म महज 1.48 करोड़ रुपये ही जुटा सकी थी और इसे बॉक्स ऑफिस पर असफल माना जाने लगा था। लेकिन 15वें दिन से कहानी में नया मोड़ आया और फिल्म ने 15 लाख रुपये का कारोबार किया। इसके बाद 16वें दिन 85 लाख रुपये और 17वें दिन 2.2 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस हुआ। 18वें दिन मामूली गिरावट के साथ फिल्म ने 1.25 करोड़ रुपये कमाए, जिसके बाद 19वें दिन कमाई का नया रिकॉर्ड कायम हो गया।
19वें दिन की रिकॉर्डतोड़ कमाई और स्क्रीन्स का तेजी से विस्तार
प्रदर्शन के 19वें दिन फिल्म ने 4.67 करोड़ रुपये की सिंगल डे कमाई करके सभी को चौंका दिया। तीसरे वीकेंड में फिल्म ने कुल 3.40 करोड़ रुपये का जबरदस्त बिजनेस किया। इसमें 23 अगस्त यानी तीसरे रविवार का योगदान सबसे अहम रहा, जो फिल्म के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। दर्शकों की मांग को देखते हुए थिएटर मालिकों ने स्क्रीन्स की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी की। 24 अगस्त को जहां यह फिल्म 909 स्क्रीन्स पर दिखाई जा रही थी, वहीं अगले ही दिन यानी 25 अगस्त को इसकी स्क्रीन संख्या बढ़ाकर 1847 कर दी गई। स्क्रीन्स में इजाफे और टिकट की कीमतों में कटौती की बदौलत महज 24 घंटे के भीतर फिल्म के कलेक्शन में 274% का उछाल देखने को मिला। अब तक इस फिल्म का नेट घरेलू कलेक्शन 10.60 करोड़ रुपये और कुल ग्रॉस कलेक्शन 12.50 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
विशाल चतुर्वेदी का निर्देशन और कलाकारों का प्रदर्शन
इस प्रेरणादायक बायोपिक को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में चंदन आनंद और शोभिनव सत्या ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं और अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचने में सफलता पाई है। संत नीम करोली बाबा की प्रसिद्ध आध्यात्मिक सीख
"सब से प्यार करो, सब की सेवा करो, राम का नाम लो"के मूल सिद्धांत को फिल्म की पटकथा में बहुत ही संवेदनशीलता के साथ पिरोया गया है, जो सीधे दर्शकों के दिलों को छू रही है।
फिल्म की कहानी: ब्रज त्याग से लेकर राजकोट के मंदिर तक की यात्रा
फिल्म की कथावस्तु नीम करोली बाबा की जीवन यात्रा और उनकी असीम भक्ति को दर्शाती है। महज 13 साल की उम्र में अपनी माता के निधन के बाद वे अपना गृह नगर ब्रज छोड़ देते हैं। उनका मानना था कि केवल ईश्वर का सच्चा प्रेम ही उन्हें अपनी मां से पुनर्मिलन करा सकता है। यह कदम उनके लिए कोई कठिन तपस्या नहीं बल्कि भगवान हनुमान के माध्यम से भगवान राम से जुड़ने का एक पवित्र प्रयास था। अपनी यात्रा के दौरान जब वे राजकोट के एक वैष्णव मंदिर पहुंचे, तो वहां के बुजुर्ग महंत ने उनकी विलक्षण प्रतिभा और समान विचारधारा को पहचाना। यहां लक्ष्मण दास (बाबा का शुरुआती नाम) को यह अहसास हुआ कि धार्मिक संस्थाएं भी एक तरह का बंधन बन सकती हैं। इसके बाद वे वर्षों तक मौन रहकर विचरण करते रहे, पेड़ों की छांव में ध्यान लगाया, नदियों के तट पर सोए और भिक्षाटन कर जीवन यापन किया। प्रकृति के सानिध्य और पक्षियों के कलरव में उन्होंने गहन आध्यात्मिकता को महसूस किया। यही भावनात्मक गहराई आज दर्शकों को थिएटर्स तक खींच ला रही है।


















