बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर और उनकी जीवनसाथी मीरा राजपूत का दांपत्य जीवन आज कई लोगों के लिए मिसाल माना जाता है। वर्ष 2015 में दोनों परिणय सूत्र में बंधे थे और मौजूदा समय में वे दो प्यारे बच्चों के माता-पिता हैं। जिस समय उनका रिश्ता तय हुआ, मीरा राजपूत का सिनेमाई दुनिया से कोई वास्ता नहीं था और वह एक गैर-फिल्मी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती थीं। शादी के बाद ही वह फिल्म जगत की हलचलों से रूबरू हुईं। हाल ही में मीरा राजपूत अपने पति शाहिद कपूर और देवर ईशान खट्टर के साथ एक लोकप्रिय हास्य चैट कार्यक्रम में मेहमान बनकर पहुंचीं, जहां इस तिकड़ी ने अपनी निजी जिंदगी और शादी से पहले की मुलाकातों के कई रोचक किस्सों पर खुलकर बात की।
ससुर के दरवाजे पर हरे बालों के साथ पहुंचे थे अभिनेता
इस बातचीत के दौरान शाहिद कपूर ने चौदह वर्ष छोटी मीरा के साथ अपनी पहली भेंट के पलों को याद किया। उन्होंने स्वीकार किया कि जब वह पहली दफा मीरा से मिलने जा रहे थे, तब उनके मन में कई तरह की शंकाएं थीं। उन्हें संदेह था कि उम्र में इतनी छोटी लड़की के साथ उनकी बातचीत जमेगी या दोनों के विचार आपस में मेल खाएंगे या नहीं। उस समय शाहिद की उम्र 34 वर्ष थी, जबकि मीरा महज 20 वर्ष की युवती थीं।
जब शाहिद पहली बार नई दिल्ली स्थित मीरा के आवास पर पहुंचे, तो उनका हुलिया देखकर मीरा के पिता स्तब्ध रह गए थे। असल में उन दिनों अभिनेता अपनी चर्चित फिल्म उड़ता पंजाब की शूटिंग की तैयारी कर रहे थे और अपने किरदार के अनुरूप उन्होंने अपने बाल हरे रंग में रंगवा रखे थे। दरवाजे पर खड़े हरे बालों वाले भावी दामाद को देखकर मीरा के पिता हैरान रह गए। शाहिद ने उस पल को बयां करते हुए कहा,
"जब मेरे ससुर ने दरवाजा खोला, तो वह मुझे देखकर कुछ देर के लिए ठिठक गए।"
शाहिद ने आगे बताया कि उनके ससुर के चेहरे के हाव-भाव देखकर साफ लग रहा था कि वह सोच में पड़ गए हैं कि अपनी बेटी का हाथ किसके हाथों में सौंपने जा रहे हैं। अभिनेता ने अपने ससुराल पक्ष की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि वे बेहद सीधे, शालीन और उच्च शिक्षित पृष्ठभूमि से आते हैं। मीरा के पिता पेशे से एक इंजीनियर हैं।
सात घंटे चली पहली बातचीत और जूतों का अजीबोगरीब वाकया
उम्र और पृष्ठभूमि के भारी अंतर के बावजूद दोनों की पहली औपचारिक मुलाकात बेहद लंबी और आत्मीय साबित हुई। जब दोनों ने आपस में बातचीत शुरू की, तो समय का अंदाजा ही नहीं लगा और यह बातचीत लगातार लगभग 7 घंटे तक चलती रही। इसी दौरान मीरा राजपूत ने भी उस पहली मुलाकात से जुड़ी एक बेहद अजीबोगरीब बात याद की। उन्होंने बताया कि उस दिन शाहिद ने बहुत ही अनोखे और विचित्र किस्म के जूते पहन रखे थे। हद तो तब हो गई जब अभिनेता पहली ही मुलाकात में अपने जूतों की तस्वीर खींचने की बात करने लगे। मीरा इस बात को लेकर बेहद हैरान थीं कि आखिर कोई पहली ही मुलाकात में अपने जूतों की फोटो खिंचवाने का आग्रह कैसे कर सकता है।
फ्लैश सोखने वाले जूतों का राज और सिनेमाई दुनिया का नया अनुभव
अपनी इस अनोखी हरकत की वजह स्पष्ट करते हुए शाहिद ने खुलासा किया कि उस दौर में भारत में सेलेब्रिटी फोटोग्राफर्स यानी पैपराजी की संस्कृति नई-नई जोर पकड़ रही थी। वह जिन जूतों को पहनकर गए थे, उनमें एक खास तकनीक थी जो कैमरे की पूरी फ्लैश लाइट को सोख लेती थी। इससे तस्वीर में केवल जूते ही चमकते थे और चेहरा कैमरे में नहीं आ पाता था। फोटोग्राफर्स के कैमरों से बचने के लिए यह एक बेहद कारगर तरीका था। हालांकि, शाहिद को जल्द ही यह अहसास हुआ कि गैर-फिल्मी माहौल से आने वाली मीरा के लिए ये सारी तकनीकी बातें और सेलिब्रिटी तौर-तरीके बिल्कुल नए और अनजाने थे।
शाहिद ने यह भी साझा किया कि शादी के बाद जब मीरा ने पहली बार फिल्म उड़ता पंजाब की शुरुआती एडिटिंग देखी, तो वह एक बार फिर से सहम गई थीं। फिल्म में शाहिद के उग्र और अनोखे किरदार को पर्दे पर देखकर मीरा सोचने लगी थीं कि आखिर उन्होंने किस इंसान से शादी कर ली है। ग्लैमर जगत की यह दुनिया मीरा के लिए शुरू में पूरी तरह चौंकाने वाली साबित हुई थी।


















