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पूर्णिया में मधुबनी पेंटिंग से सजीं छठ थीम वाली साड़ियां, देश भर से मिले 4 लाख रुपये के ऑर्डरजीवनशैली
2 नव॰ 2026, 9:29 am (1 मिनट पहले)· 0

पूर्णिया में मधुबनी पेंटिंग से सजीं छठ थीम वाली साड़ियां, देश भर से मिले 4 लाख रुपये के ऑर्डर

पूर्णिया के हाउस ऑफ मैथिली में स्थानीय कारीगरों ने छठ महापर्व की परंपराओं को मधुबनी कला के जरिए साड़ियों पर उकेरा है, जिसके लिए विभिन्न राज्यों से करीब 35 साड़ियों के ऑर्डर मिले हैं।

बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था के महापर्व छठ की अनूठी छटा अब पारंपरिक परिधानों पर साकार हो रही है। पूर्णिया स्थित हाउस ऑफ मैथिली में स्थानीय महिला और पुरुष कारीगरों की टोली ने मिलकर एक खास पहल शुरू की है। यहां सुप्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग की मदद से साड़ियों पर छठ पूजा के पारंपरिक प्रतीकों, रीति-रिवाजों और लोक आस्था के दृश्यों को कलात्मक रूप से उतारा जा रहा है। इस रचनात्मक प्रयोग को देश भर से सराहना मिल रही है और बड़े शहरों से लगातार मांग सामने आ रही है।

कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक कला का संगम

हाउस ऑफ मैथिली में इन विशेष परिधानों को तैयार करने का सिलसिला पिछले 15 दिनों से लगातार जारी है। संस्थान से जुड़ी महिला कारीगर दिव्या झा, साथी शुभम कुमार तथा अन्य कारीगर पूरी तन्मयता के साथ कपड़ों पर बारीक आकृतियां बना रहे हैं। कपड़े पर रंगों और रेखाओं के समन्वय से लोक आस्था की जीवंत तस्वीरें गढ़ी जा रही हैं। इस कलाकारी में छठ अनुष्ठान के दौरान उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक बांस के सूप, डूबते और उगते सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पण करने के पावन दृश्य तथा व्रतियों के कठोर नियमों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को खूबसूरती से उकेरा गया है।

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कई राज्यों से पहुंचे ऑर्डर और चार लाख का कारोबार

स्थानीय कला के इस नायाब संगम को राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त प्रतिक्रिया हासिल हुई है। बिहार के घरेलू बाजार के अतिरिक्त देश की राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुंबई तथा लखनऊ जैसे प्रमुख महानगरों से ग्राहकों ने इन साड़ियों की मांग की है। अब तक संस्थान को लगभग 35 साड़ियों के आर्डर प्राप्त हो चुके हैं, जिनका कुल मूल्य करीब 4 लाख रुपये आंका गया है। आगामी दो से तीन दिनों के भीतर इन सभी तैयार साड़ियों को संबंधित ग्राहकों तक पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

स्थानीय महिलाओं को मिला रोजगार और सम्मान

हाउस ऑफ मैथिली के संस्थापक मनीष रंजन के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य ध्येय बिहार के सबसे बड़े लोक पर्व की मर्यादा और लोक कला को एक साथ मंच प्रदान करना है। इस पहल ने पूर्णिया की स्थानीय महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका और आत्मनिर्भरता की राह खोली है। अपने पारंपरिक हुनर के दम पर महिलाएं नियमित आमदनी कमा रही हैं। यहां पहले भी तैयार किए गए कई पारंपरिक शिल्पों ने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है, और अब छठ आधारित इस नए संग्रह से राज्य की लोक कला को आधुनिक जीवनशैली के साथ एक नई पहचान मिल रही है।

सवाल-जवाब

छठ थीम वाली साड़ियों को कहां तैयार किया जा रहा है?
इन साड़ियों को बिहार के पूर्णिया स्थित 'हाउस ऑफ मैथिली' में स्थानीय महिला और पुरुष कारीगरों द्वारा तैयार किया जा रहा है।
इन साड़ियों पर किस कला के माध्यम से चित्र बनाए जा रहे हैं?
साड़ियों पर बिहार की पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग के जरिए छठ पूजा से जुड़े दृश्य उकेरे जा रहे हैं।
साड़ी पर छठ महापर्व के कौन से दृश्य दर्शाए गए हैं?
इन पर बांस का सूप, भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देने के दृश्य और व्रत से जुड़ी अन्य धार्मिक परंपराएं बनाई गई हैं।
इन साड़ियों को तैयार करने में कितना समय लगा है?
कारीगरों की टीम पिछले 15 दिनों से लगातार इन साड़ियों को तैयार करने के काम में जुटी हुई है।
अब तक कुल कितने ऑर्डर मिले हैं और उनकी अनुमानित कीमत क्या है?
अब तक करीब 35 साड़ियों के ऑर्डर मिले हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 4 लाख रुपये बताई गई है।
इन खास साड़ियों के ऑर्डर किन शहरों से प्राप्त हुए हैं?
बिहार के अलावा दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रमुख शहरों से इनके ऑर्डर मिले हैं।
तैयार साड़ियों की डिलीवरी कब तक की जाएगी?
हाउस ऑफ मैथिली के अनुसार आने वाले दो से तीन दिनों में सभी साड़ियों की डिलीवरी कर दी जाएगी।
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