अमेरिकी कांग्रेस के मध्यावधि चुनाव के शुरुआती नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली बढ़त ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक शक्ति के संतुलन में बदलाव और वॉशिंगटन में संभावित विधायी गतिरोध की आशंकाओं के बीच अमेरिकी शेयर वायदा कारोबार में गिरावट देखी गई है, जिसका सीधा असर मुख्य रूप से तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों के मूल्यांकन पर पड़ा है। निवेशकों को यह चिंता सता रही है कि संसद पर डेमोक्रेटिक नियंत्रण मजबूत होने की स्थिति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़े उद्यमों पर नियमों का पहरा और कड़ा हो सकता है। इसी अनिश्चितता के कारण मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर भारी दबाव में आ गया, जबकि सरकारी बॉन्ड और कीमती धातुओं जैसे सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
अमेरिकी शेयर बाजारों की पिछली बढ़त और फ्यूचर्स पर ताजा दबाव
इस ताजा राजनीतिक उथल-पुथल से ठीक पहले अमेरिकी शेयर बाजारों ने लगातार तीन सत्रों की बिकवाली से उबरते हुए राहत की सांस ली थी। बीते कारोबारी सत्र में S&P 500 सूचकांक 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहा था। इस सुधार की कमान भी तकनीकी शेयरों के हाथ में थी, जहां NASDAQ कंपोजिट ने 0.83 प्रतिशत की शानदार तेजी दिखाई थी। इसके अलावा फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में 2.63 प्रतिशत की जोरदार रिकवरी देखी गई, जो कि पिछले तीन सत्रों के दौरान कुल 11.6 प्रतिशत की भारी गिरावट झेल चुका था। हालांकि, यह राहत भरी तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई और चुनावी रुझान सामने आते ही वायदा बाजार में निवेशकों का मूड फिर से बदल गया।
बुधवार सुबह अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में बिकवाली का साफ दबाव देखने को मिला, जिसकी अगुवाई भी टेक कंपनियों ने ही की। सुबह के सत्र में S&P 500 फ्यूचर्स 0.42 प्रतिशत लुढ़क गए, जबकि NASDAQ 100 फ्यूचर्स में 0.49 प्रतिशत की नरमी दर्ज की गई। ट्रेडिंग सत्र के शुरुआती दौर में S&P फ्यूचर्स एक प्रतिशत से भी ज्यादा टूट चुके थे, लेकिन बाद में निचले स्तरों से कुछ सुधार हुआ। इक्विटी में नरमी के साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी देखी गई, जिससे बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि विभाजित सरकार बनने की स्थिति में बड़े राजकोषीय प्रोत्साहन या राहत पैकेजों को पारित कराना मुश्किल हो जाता है, जिससे बॉन्ड बाजार को सुरक्षात्मक आधार मिला।
एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख और तकनीकी शेयरों का उतार-चढ़ाव
अमेरिकी वायदा बाजार की कमजोरी का प्रभाव एशियाई बाजारों पर भी रात भर दिखाई दिया। जिन सूचकांकों में टेक कंपनियों की हिस्सेदारी अधिक है, वहां सत्र की शुरुआत में तीखी गिरावट देखी गई, हालांकि बाद के कारोबार में उन्होंने अपने निचले स्तरों से वापसी की। जापान का प्रमुख सूचकांक निक्केई सुबह के सत्र में 2.09 प्रतिशत टूट गया। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक, जो अपने शुरुआती निचले स्तर पर 4 प्रतिशत से अधिक नीचे फिसल गया था, सुधरकर 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ लगभग सपाट स्तर पर बंद होने में सफल रहा।
एशिया के अन्य प्रमुख बाजारों ने इस दबाव से अलग सकारात्मक प्रदर्शन किया। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 0.89 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। मुख्य भूमि चीन के बाजारों में भी खरीदारी लौटी, जिसके चलते CSI 300 सूचकांक में 1.02 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में 0.83 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। वहीं यूरोपीय शेयर बाजारों में पिछले अमेरिकी सुधार के बाद भी दबाव बरकरार रहा और वे अनिश्चित राजनीतिक माहौल में सतर्क नजर आए।
मुद्रा बाजार में डॉलर फिसला, जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के शुरुआती मतों की गिनती के बाद पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव डाल दिया है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो दुनिया की प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक की मजबूती को मापता है, बुधवार के एशियाई सत्र में तीखी बिकवाली का शिकार हुआ और सितंबर के आखिर के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इस कमजोरी के चलते विभिन्न प्रमुख मुद्रा युग्मों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
USD/JPY पर बुधवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे यह एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे लुढ़क गया। डॉलर में आई यह गिरावट करीब एक महीने के निचले स्तर की रही। वाशिंगटन में संभावित राजनीतिक गतिरोध ने निवेशकों को जापानी येन जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं की ओर आकर्षित किया, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट आई और डॉलर की स्थिति और कमजोर हुई। दूसरी तरफ AUD/USD दो हफ्ते के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए 0.6965 के करीब स्थिर बना रहा। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों पर बॉन्ड यील्ड की गिरावट भारी पड़ी, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA के अपेक्षाकृत कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित रखा।
सुरक्षित निवेश की होड़ से सोने ने तोड़ा 4,000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक दायरा
राजनीतिक असमंजस और अमेरिकी मुद्रा में भारी कमजोरी का सबसे बड़ा फायदा सोने की कीमतों को मिला है। बुधवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक पहुंचते-पहुंचते सोने में आक्रामक खरीदारी देखी गई, जिसके दम पर पीली धातु ने 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर लिया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी ने फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाओं के प्रभाव को कम कर दिया। गैर-उपज वाली संपत्ति होने के बावजूद, कम यील्ड और गिरते डॉलर के माहौल में संस्थागत और खुदरा निवेशकों ने सोने को सबसे सुरक्षित दांव माना, जिससे सर्राफा बाजार में जोरदार उछाल दर्ज हुआ।



















