मेघालय में मंत्रियों के विभागों में बड़ा फेरबदल, कॉनराड के. संगमा ने तीन कैबिनेट मंत्रियों को सौंपी नई जिम्मेदारियांअमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक बढ़त से वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स और डॉलर टूटे, सोने ने छुआ नया शिखरअसम कैबिनेट ने शिवसागर और चराइदेव बाढ़ की सीबीआई जांच और बहुविवाह पर सरकारी नौकरी से बर्खास्तगी को दी मंजूरीकादीपुर खुर्द में गोमती किनारे बीता त्यागी जी महाराज का तपस्वी जीवन, साढ़े तीन साल तक नहीं लांघी आश्रम की सीमामेष राशि पर 2027 में गहराएगा साढ़े साती का सबसे कठिन दौर, कुंभ को मिलेगी राहतअमेरिकी मिडटर्म नतीजों के बाद कीमती धातुओं में भारी उछाल, चांदी 6,238 रुपये और सोना 2,744 रुपये चढ़ाघर में बच्चे के सिक्का या बैटरी निगलने पर माता-पिता बरतें ये सावधानियां, जानिए आपातकालीन कदमदिवाली पूजा से पहले पीतल, तांबे और चांदी की मूर्तियों को नई जैसी चमक देने के आसान घरेलू उपायअमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स का बड़ा उलटफेर, ट्रंप समर्थित प्रमुख प्रत्याशियों को मिली करारी शिकस्तचंबा में सुक्खू सरकार का बड़ा दांव, हर माह 1500 रुपये और 300 यूनिट मुफ्त बिजली का ऐलान
गोबर और मिट्टी के दीयों से बालोद की महिला समूह ने शुरू की खास दीवाली तैयारी, 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आयव्यापार
4 नव॰ 2026, 1:18 pm (2 मिनट पहले)· 0

गोबर और मिट्टी के दीयों से बालोद की महिला समूह ने शुरू की खास दीवाली तैयारी, 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय

छत्तीसगढ़ के बालोद में चाहत बिहान स्व-सहायता समूह की 30 महिलाएं पर्यावरण-अनुकूल दीये और मोमबत्तियां बनाकर दीवाली पर स्वावलंबन की राह बना रही हैं।

दीपावली की आहट के साथ ही बाजारों में त्योहार की हलचल तेज हो चुकी है, और इसी माहौल के बीच बालोद जिले के ग्रामीण अंचल की महिलाएं अपनी मेहनत से आत्मनिर्भरता की अनूठी कहानी लिख रही हैं। चाहत बिहान स्व-सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं इस त्योहारी सीजन को पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक मजबूती का जरिया बना रही हैं। अपने हाथों से तैयार किए गए मिट्टी के पारंपरिक दीयों, गाय के गोबर से बने इको-फ्रेंडली दीयों और घर पर बनी विशेष मोमबत्तियों के जरिए इन महिलाओं ने रोशनी के पर्व को एक नया आयाम दिया है। इन उत्पादों को और भी लुभावना बनाने के लिए महिलाओं ने उन्हें चटख और सुंदर रंगों से सजाया है, जिससे बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

नवरात्रि से ही शुरू हो गया था निर्माण कार्य

त्योहारी सीजन में मांग को पूरा करने के लिए समूह से जुड़ी महिलाओं ने काफी पहले ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। समूह की सक्रिय सदस्य रवीना साहू ने जानकारी दी कि दीयों के निर्माण की रूपरेखा और काम नवरात्रि के समय से ही आरंभ कर दिया गया था। इस पूरे उपक्रम में लगभग 30 महिलाएं एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। वे मिट्टी को गूंधने, दीयों को आकार देने, गोबर से पर्यावरण-अनुकूल दीये तैयार करने और घर में मोमबत्तियां ढालने के काम में जुटी हुई हैं। यह कोई पहला अवसर नहीं है, बल्कि यह दल पिछले तीन वर्षों से लगातार हर दीवाली पर यह काम कर रहा है। हर वर्ष जैसे ही त्योहार नजदीक आता है, इन हस्तनिर्मित सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ने लगती है, जो इन ग्रामीण महिलाओं को घर के कामकाज के साथ एक बेहतर अतिरिक्त आमदनी जुटाने का मजबूत अवसर देती है।

ये भी पढ़ें

किफायती दाम और पर्यावरण संरक्षण का तालमेल

समूह ने अपने उत्पादों का मूल्य निर्धारण करते समय सामान्य परिवारों के बजट का विशेष ध्यान रखा है, ताकि हर तबके का खरीदार आसानी से इन्हें अपना सके। बिक्री मूल्य के अनुसार मिट्टी से बने 5 खूबसूरत दीयों का सेट 50 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं गाय के गोबर से तैयार किए गए 4 सजे-धजे दीयों की कीमत भी 50 रुपये रखी गई है। इसके अलावा महिलाओं द्वारा तैयार की गई आकर्षक होममेड कैंडल्स और मोमबत्तियों की श्रृंखला 100 रुपये से लेकर 120 रुपये के दायरे में बेची जा रही है। गोबर के दीयों को खास तौर पर विविध रंगों से सजाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को रासायनिक और प्लास्टिक कचरे से दूर कर पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर प्रेरित करना है।

कलेक्ट्रेट और सरकारी परिसरों तक सीधी बिक्री

अपने उत्पादों की बिक्री के लिए यह महिला समूह केवल सामान्य स्थानीय दुकानों या फुटपाथ बाजार पर आश्रित नहीं है। बाजार की पहुंच बढ़ाने के लिए महिलाओं ने एक सुविचारित रणनीति अपनाई है। वे बालोद के सामान्य बाजार के साथ-साथ कलेक्ट्रेट परिसर, जिला कार्यालय, तहसील कार्यालय और जनपद पंचायत कार्यालय जैसे प्रमुख प्रशासनिक भवनों में भी स्टॉल लगाकर सीधी बिक्री कर रही हैं। सरकारी दफ्तरों में आने-जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों तक सीधे पहुंचने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। इससे महिलाओं को अपनी बनाई वस्तुओं का पूरा मूल्य मिल रहा है और उनके काम को जिले भर में एक नई पहचान भी हासिल हो रही है।

त्योहारी सीजन में 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई

दीपावली के इस छोटे से कारोबारी सीजन में समूह की मेहनत बड़े वित्तीय लाभ में बदलती है। रवीना साहू के अनुसार, त्योहार के कुछ ही दिनों के भीतर समूह को लगभग 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त शुद्ध आय हो जाती है। यह आमदनी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त और अपने पैरों पर खड़े होने में बड़ा संबल प्रदान कर रही है। स्थानीय स्तर पर सुलभ संसाधनों, गाय के गोबर और पारंपरिक मिट्टी की बदौलत महिलाएं ऐसे उत्पाद बना रही हैं, जो न सिर्फ बाजार की मांग पूरी करते हैं बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखते हैं। इस प्रकार चाहत बिहान समूह की महिलाएं दीवाली पर केवल दूसरों के घरों को रोशन करने का साधन नहीं दे रहीं, बल्कि अपने परिवारों के जीवन में भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया उजाला फैला रही हैं।

सवाल-जवाब

बालोद में कौन सा समूह इको-फ्रेंडली दीये बना रहा है?
बालोद जिले का चाहत बिहान महिला स्व-सहायता समूह इन इको-फ्रेंडली दीयों और मोमबत्तियों का निर्माण कर रहा है।
इस दीया निर्माण कार्य में कितनी महिलाएं जुड़ी हुई हैं?
इस पूरे काम में समूह की लगभग 30 महिलाएं मिलकर उत्पाद तैयार कर रही हैं।
दीये और मोमबत्तियों की कीमतें क्या तय की गई हैं?
मिट्टी के 5 दीये 50 रुपये में, गोबर के 4 दीये 50 रुपये में और मोमबत्तियां 100 से 120 रुपये में मिल रही हैं।
महिलाएं अपने उत्पाद किन जगहों पर बेच रही हैं?
वे बालोद बाजार के अलावा कलेक्ट्रेट, जिला कार्यालय, तहसील और जनपद पंचायत कार्यालय परिसरों में सीधे उत्पाद बेच रही हैं।
दीपावली सीजन में इस काम से समूह को कितनी आमदनी होती है?
समूह की महिलाओं को इस त्योहारी सीजन के दौरान करीब 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है।
यह समूह कितने समय से इस काम को कर रहा है?
चाहत बिहान समूह की महिलाएं पिछले तीन वर्षों से लगातार दीपावली पर यह काम कर रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp