काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की नई सोशल ड्रामा फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस' का ट्रेलर सामने आ गया है, और इसमें खेतों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों से जुड़े एक बड़े संकट को उठाया गया है। करीब ढाई मिनट के इस ट्रेलर में इंसानी दर्द, अदालत की लड़ाई और हिम्मत की कहानी एक साथ बुनी गई है, जिसमें दोनों कलाकार जहरीले रसायनों के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आते हैं।
बेटी को खोने के गम से शुरू होती है कहानी
ट्रेलर की शुरुआत श्रेयस तलपड़े के किरदार से होती है, जो अपनी सात साल की बेटी को कैंसर के चलते खो चुका है और इस सदमे से उबर नहीं पाया है। आगे कहानी में दिखाया गया है कि पेस्टिसाइड वाली खेती का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बरसों बाद तक इंसानी शरीर को अंदर से खोखला करता रहता है। जहरीले केमिकल के बार-बार संपर्क में आने से सेहत पर पड़ने वाला यह नुकसान धीरे-धीरे और चुपचाप सामने आता है, जिसे ट्रेलर में कई मार्मिक दृश्यों के जरिए उभारा गया है। ये पल देखने वालों के जेहन में लंबे समय तक ठहर जाते हैं, क्योंकि इसमें दिखाया गया खतरा काल्पनिक नहीं बल्कि लाखों परिवारों की असल जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
काजल निभा रही हैं वकील की भूमिका, अदालत में होगी इंसाफ की लड़ाई
फिल्म में काजल अग्रवाल एक वकील की भूमिका में हैं, जो पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने के मकसद से उन ताकतवर लोगों को घेरने की ठान लेती हैं जिन्हें इस नुकसान का जिम्मेदार माना जाता है। श्रेयस तलपड़े और काजल की जोड़ी मिलकर उस पूरे ढांचे पर सवाल खड़े करती है, जिससे आम आदमी न्याय की उम्मीद तो रखता है लेकिन अक्सर उसे निराशा ही हाथ लगती है। कहानी में अदालती बहस के साथ-साथ किरदारों के निजी दर्द और समाज से जुड़े सवालों को भी बराबर तवज्जो दी गई है, जिससे यह महज एक मुद्दे पर टिकी फिल्म न होकर रिश्तों और जज्बातों की भी कहानी बन जाती है। गौरतलब है कि श्रेयस तलपड़े हाल ही में 34 कलाकारों वाली फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' में अपने काम की वजह से सुर्खियों में रहे थे, और अब वे बिल्कुल अलग मिजाज वाले इस प्रोजेक्ट के जरिए बड़े पर्दे पर लौट रहे हैं।
क्यों खास है यह मुद्दा
खेती में कीटनाशकों का बेतहाशा इस्तेमाल कोई नई बहस नहीं है, लेकिन इसे कोर्टरूम ड्रामा और पारिवारिक त्रासदी के जरिए दिखाना इस फिल्म को बाकी सामाजिक विषयों वाली फिल्मों से अलग बनाता है। ट्रेलर में एक पिता के निजी दुख को उस बड़े सवाल से जोड़ा गया है कि जब जहरीले रसायन खेतों से होते हुए थाली तक पहुंचते हैं, तो इसका खामियाजा आखिरकार आम इंसान को ही भुगतना पड़ता है। यही वजह है कि फिल्म सिर्फ एक परिवार की कहानी न रहकर पूरे तंत्र पर सवाल उठाने वाली फिल्म बन जाती है।
24 जुलाई से सिनेमाघरों में दिखेगी फिल्म
'द इंडिया स्टोरी' का निर्देशन चेतन डीके ने किया है, जबकि इसे सागर बी. शिंदे ने लिखा भी है और प्रोड्यूस भी किया है। मेकर्स ने बताया है कि फिल्म 24 जुलाई से दुनियाभर के सिनेमाघरों में दस्तक देगी और इसे हिंदी के साथ-साथ तेलुगु व तमिल भाषा में भी देखा जा सकेगा। मेकर्स ने ट्रेलर यूट्यूब पर जारी किया है, जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म इस सामाजिक मुद्दे को कितनी गंभीरता और भावुकता के साथ पर्दे पर उतारने वाली है।

















