बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की आगामी सिनेमाई प्रस्तुति 'बंटवारा 1947' को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता लगातार बनी हुई है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार यह फिल्म ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में सनी देओल के साथ अभिनेत्री प्रीति जिंटा भी मुख्य भूमिका निभाती नजर आएंगी। हाल ही में एक विशेष टीवी बातचीत शो 'कहके रहेगा कहने वाला' में एंकर किशोर अजवानी से चर्चा के दौरान सनी देओल ने फिल्म के निर्माण, इसकी विषयवस्तु और अपने परिवार की प्रतिक्रियाओं को विस्तार से साझा किया।
साहित्यिक आधार और धर्मेंद्र का सपना
यह फिल्म प्रसिद्ध साहित्यकार असगर वजाहत के चर्चित नाटक 'जिस लाहौर नइ देख्या वो जम्याइ नइ' पर आधारित है। सनी देओल ने बातचीत के दौरान खुलासा किया कि जब धर्मेंद्र जीवित थे, तब यह फिल्म पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र ने इस पूरी कहानी को ध्यान से सुना था और वे स्वयं चाहते थे कि इस विषय पर एक संवेदनशील फिल्म का निर्माण किया जाए। धर्मेंद्र अक्सर पाकिस्तान को एक आत्मीय रिश्ते की तरह 'मौसी' कहकर पुकारते थे। सनी देओल ने अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर इस फिल्म को देखा था। उनके अनुसार, उनकी माताजी और पिताजी दोनों को ही यह सिनेमाई प्रस्तुति बेहद पसंद आई थी।
नई पीढ़ी के लिए इतिहास का आईना
साल 2026 में देश के विभाजन पर फिल्म बनाने के औचित्य पर बात करते हुए सनी देओल ने कहा कि आजादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद आज का युवा वर्ग इतिहास के कई महत्वपूर्ण पहलुओं से अनभिज्ञ है। उन्होंने चिंता जताई कि पाठ्यक्रम और सामान्य जानकारी में कई ऐतिहासिक तथ्य छूट जाते हैं, जिन्हें युवा पीढ़ी जानने के लिए उत्सुक रहती है। सनी का मानना है कि जब युवा दर्शक इस फिल्म को पर्दे पर देखेंगे, तो उन्हें 1947 के तुरंत बाद की परिस्थितियों और एक साधारण परिवार पर विभाजन के पड़े विनाशकारी असर की वास्तविक समझ हासिल होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब देश में कोई बड़ा राजनीतिक या सामाजिक बदलाव होता है, तो उसका सीधा प्रभाव आम परिवारों की जिंदगियों पर पड़ता है।
मां के किरदार और परवरिश पर चर्चा
बातचीत में शामिल हुईं सह-कलाकार प्रीति जिंटा ने फिल्म में मातृसत्तात्मक संवेदनाओं के चित्रण पर रोशनी डाली। खुद मां बनने के बाद अपने बदले दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति स्वयं माता या पिता नहीं बनता, तब तक वह अपनी मां के संघर्षों को पूरी तरह नहीं समझ पाता। संतान होने के बाद ही यह अहसास होता है कि बच्चे जीवन की सबसे पहली प्राथमिकता बन जाते हैं। वहीं सनी देओल ने अपने पिता धर्मेंद्र की परवरिश की सराहना करते हुए कहा कि धर्मेंद्र ने अपने बच्चों को हमेशा खुली छूट दी और कभी किसी बात का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने साझा किया कि ठोकर खाकर सीखना ही अभिनय के क्षेत्र में मजबूत बनने का असली रास्ता है।



















