भारतीय मनोरंजन जगत की प्रतिभाशाली अभिनेत्री सुरभि दास अब छोटे पर्दे की सीमाओं को लांघकर हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए तैयार हैं। प्रसिद्ध फिल्ममेकर नितेश तिवारी के निर्देशन में आकार ले रही पौराणिक महागाथा रामायण का टीज़र और फर्स्ट लुक सामने आने के बाद से ही दर्शकों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। लगभग 4000 करोड़ रुपये के विशाल बजट के साथ तैयार की जा रही इस सिनेमैटिक यात्रा में भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार जैसे रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इस विशाल स्टार कास्ट के बीच पूर्वोत्तर भारत से अपनी पहचान बनाकर उभरीं सुरभि दास भी एक बेहद खास और महत्वपूर्ण पौराणिक चरित्र को जीवंत करती दिखाई देंगी।
मुकेश छाबड़ा के ऑडिशन से चयन तक की पूरी कहानी
सुरभि दास की इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में एंट्री बेहद योजनाबद्ध और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के जरिए हुई है। अपने टेलीविजन करियर को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से नॉर्थ-ईस्ट के असम राज्य से मुंबई पहुंचीं सुरभि ने अपनी प्रतिभा के बल पर यह स्थान हासिल किया है। इस बड़ी फिल्म में जगह बनाने के अपने अनुभव को साझा करते हुए सुरभि ने बताया कि उनकी इस यात्रा की शुरुआत विख्यात कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के स्टूडियो में दिए गए एक ऑडिशन से हुई थी। हालांकि ऑडिशन देने के बाद अंतिम चयन का संदेश आने में लगभग दो महीने का लंबा वक्त बीत गया था।
दो महीने के इस अंतराल के दौरान सुरभि अपने नियमित काम में व्यस्त हो चुकी थीं और उन्होंने अपने लोकप्रिय धारावाहिक पांड्या स्टोर की शूटिंग शुरू कर दी थी। सुरभि के अनुसार, जब इतने लंबे इंतजार के बाद अचानक उन्हें कास्टिंग टीम की ओर से कॉल आया, तो उन्हें अपनी किस्मत पर सहसा यकीन ही नहीं हुआ। शुरुआत में वह यह भी समझ नहीं पा रही थीं कि उन्हें केवल शॉर्टलिस्ट किया गया है या फिर भूमिका के लिए पूरी तरह चुन लिया गया है। इसके तुरंत बाद उन्हें लुक टेस्ट और विशेष कॉस्ट्यूम ट्रायल्स की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। जब सब कुछ तय हो गया, तब उन्हें यह अहसास हुआ कि वह भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर करने जा रही हैं। उन्होंने इस अवसर को भगवान का आशीर्वाद और एक सपने के सच होने जैसा अद्भुत अनुभव करार दिया।
श्रुतकीर्ति के चरित्र का चयन और उर्मिला के रोल पर स्पष्टता
फिल्म में अपनी भूमिका को लेकर अक्सर बनने वाली धारणाओं पर विराम लगाते हुए सुरभि दास ने अपने किरदार के बारे में विस्तार से बात की है। दिवाली 2026 के भव्य त्यौहार पर सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही फिल्म रामायण में वह माता सीता की सबसे छोटी बहन श्रुतकीर्ति की भूमिका निभा रही हैं, जो राजा शत्रुघ्न की पत्नी थीं। उन्होंने इस बात को पूरी तरह साफ किया कि वह उर्मिला का किरदार नहीं निभा रही हैं, जैसा कि कुछ शुरुआती चर्चाओं में कहा जा रहा था।
सुरभि का मानना है कि इतनी बड़ी स्टार कास्ट और अभूतपूर्व पैमाने पर बन रही महागाथा का हिस्सा बनना ही अपने आप में एक बहुत बड़ा कीर्तिमान है। स्क्रीन टाइम या रोल की लंबाई की परवाह किए बिना वह इस बात के लिए खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें इस कालजयी कहानी का अंग बनने का मौका मिला। इतने बड़े प्रोजेक्ट में एक छोटा सा किरदार भी किसी भी उभरते हुए कलाकार के करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
गैर-फिल्मी पृष्ठभूमि और फिल्म इंडस्ट्री में ऑडिशन का सच
छोटे पर्दे से बड़े पर्दे की ओर कदम बढ़ाने को लेकर सुरभि दास का दृष्टिकोण बेहद व्यावहारिक और परिपक्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीवी छोड़कर फिल्मों में आना किसी तरह की निराशा, शिकायत या काम की कमी का परिणाम नहीं है। बल्कि यह एक अभिनेता के तौर पर अपनी कलात्मक सीमाओं का विस्तार करने और नई चुनौतियों को स्वीकार करने की स्वाभाविक चाहत है। सुरभि का मानना है कि हर कलाकार अपनी यात्रा में आगे बढ़ना चाहता है और उनके लिए भी यह फैसला करियर में प्रगति का एक स्वाभाविक चरण है।
फिल्मी दुनिया में संघर्ष की परिभाषा पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि वह इसे कोई भयानक संघर्ष मानने के बजाय एक सामान्य व्यावसायिक प्रक्रिया मानती हैं। सुरभि ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि वे लोग किसी स्थापित फिल्मी घराने या गॉडफादर वाले परिवार से ताल्लुक नहीं रखते, जहां किसी के एक फोन कॉल से काम मिल जाता है। एक बाहरी कलाकार के रूप में काम पाने का एकमात्र रास्ता लगातार ऑडिशन देना है। जब तक आपको सही रोल नहीं मिल जाता और आपकी फिल्में प्रदर्शित नहीं हो जातीं, तब तक आपको बिना थके कास्टिंग डायरेक्टर्स के संपर्क में रहना पड़ता है और अपनी काबिलियत को साबित करते रहना पड़ता है।
असम से मुंबई का सफर और आने वाली नई फिल्मों की कतार
सुरभि दास की अभिनय यात्रा असम से मुंबई आने के साथ ही सकारात्मक मोड़ लेने लगी थी। जब वे असम से मुंबई स्थानांतरित हुईं, तो उन्हें तुरंत धारावाहिक निमा डेंजोंगपा में काम करने का मौका मिल गया था। इस शो में अपनी एक्टिंग की छाप छोड़ने के बाद उन्होंने पांड्या स्टोर में अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन के दैनिक प्रारूप से थोड़ा ब्रेक लेने और पूरा ध्यान फीचर फिल्मों पर केंद्रित करने का सचेत निर्णय लिया।
सौभाग्य से रामायण जैसी ऐतिहासिक फिल्म में काम करने के बाद उनके पास अभिनय के नए और आकर्षक प्रस्तावों की कोई कमी नहीं रही है। सुरभि ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे बहुत किस्मत वाली रही हैं कि उन्हें लंबे समय तक काम के बिना खाली नहीं बैठना पड़ा। रामायण के अलावा वे 1971 के ऐतिहासिक युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित एक प्रोजेक्ट में काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे जाने-माने डायरेक्टर विकास बहल की आगामी फिल्म दिल का दरवाजा खोलना डार्लिंग में भी एक महत्वपूर्ण किरदार में दिखाई देने वाली हैं।


















