नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म रामायण को भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जा रहा है। दिवाली 2026 में रिलीज होने जा रही इस फिल्म का दर्शक लंबे समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, इस सिनेमाई अनुभव से जुड़ा एक नया और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। निर्माताओं ने इस फिल्म को दुनिया भर में एक ही स्वरूप में प्रदर्शित न करने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों और चीन के लिए तैयार किया जा रहा फिल्म का संस्करण भारतीय सिनेमाघरों में दिखाई जाने वाली फिल्म से लगभग 33 मिनट छोटा होगा। दर्शकों की पसंद और सांस्कृतिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए यह दो अलग-अलग कट बनाने की रणनीति तैयार की गई है।
अंतरराष्ट्रीय संस्करण को 33 मिनट छोटा करने की मुख्य वजह
विदेशी दर्शकों के लिए फिल्म के समय को 33 मिनट कम करने का मुख्य कारण कहानी की रफ्तार और दर्शकों की रुचि बनाए रखना है। भारत में रहने वाले लोग रामायण की गाथा से आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से गहराई से जुड़े हुए हैं। भारतीय दर्शक इसके हर पात्र, प्रसंग और सांस्कृतिक संदेश को पहले से जानते हैं। इसी वजह से भारत में रिलीज होने वाले संस्करण में भावनाओं, भक्ति और लोक संस्कृति से जुड़े दृश्यों को पूरी लंबाई के साथ दिखाया जाएगा ताकि स्थानीय दर्शक कहानी के भावनात्मक पक्ष को गहराई से महसूस कर सकें।
दूसरी तरफ, चीन और पश्चिमी देशों के दर्शकों के लिए रामायण की यह कहानी पूरी तरह से नई हो सकती है। विदेशी दर्शक पौराणिक बारीकियों से परिचित नहीं होते, इसलिए यदि फिल्म में अधिक संवाद या लंबे प्रसंग रखे गए तो उन्हें कहानी की गति धीमी लग सकती है। इसी वजह से 33 मिनट की कटौती करके अंतरराष्ट्रीय संस्करण को अधिक चुस्त और तेज रफ्तार बनाया गया है ताकि विदेशी दर्शक बिना किसी रुकावट के पूरी फिल्म का आनंद ले सकें।
विजुअल इफेक्ट्स और एक्शन दृश्यों पर विशेष ध्यान
विदेशी सिनेमाघरों के लिए तैयार किए जा रहे छोटे संस्करण में कहानी के पेचीदा पहलुओं के बजाय एक्शन और विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाएगा। निर्माताओं का उद्देश्य इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक भव्य एक्शन और फैंटेसी सिनेमा के रूप में पेश करना है, जहां अच्छाई की बुराई पर जीत की सार्वभौमिक कहानी दिखाई जाती है। अत्याधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल दृश्यों के बल पर यह फिल्म विदेशी दर्शकों को आकर्षित करने का प्रयास करेगी।
चीन के बॉक्स ऑफिस पर भारतीय फिल्मों के क्रेज को दोबारा लौटाने का प्रयास
चीन में इस फिल्म को रामायण: द लेजेंड ऑफ द प्रिंस के नाम से प्रदर्शित किए जाने की संभावना है। निर्माता इस रिलीज के जरिए चीन में भारतीय फिल्मों के पुराने दबदबे को वापस स्थापित करना चाहते हैं। साल 2020 में गलवान घाटी विवाद के बाद चीन में हिंदी फिल्मों के प्रदर्शन और कमाई पर बुरा असर पड़ा था।
गलवान घटना से पहले चीन भारतीय सिनेमा के लिए एक बेहद आकर्षक बाजार हुआ करता था। वहां दंगल, पीके, सीक्रेट सुपरस्टार और अंधाधुंध जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक कमाई की थी और चीनी दर्शकों के बीच भारी लोकप्रियता हासिल की थी। अब 33 मिनट छोटे और एक्शन से भरपूर कट के माध्यम से निर्माता चीन में फिर से वही पुराना माहौल और भारतीय फिल्मों का आकर्षण कायम करने की उम्मीद कर रहे हैं।
4,000 करोड़ का भारी बजट और शानदार स्टार कास्ट
लगभग 4,000 करोड़ रुपये के विशाल बजट से तैयार हो रही यह फिल्म भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम है। फिल्म की स्टार कास्ट भी काफी प्रभावशाली है। इसमें अभिनेता रणबीर कपूर भगवान राम की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। इनके अलावा केजीएफ स्टार यश रावण के शक्तिशाली किरदार में दिखाई देंगे और सनी देओल हनुमान जी की भूमिका निभाएंगे। नितेश तिवारी के कुशल निर्देशन में बन रही इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के दोनों संस्करण बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करते हैं, इस पर दुनिया भर के ट्रेड विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।



















