नई दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की सभा में भीड़ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने 1 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के दावों को पूरी तरह निराधार करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से दस लाख लोगों के एकत्रित होने की बात कही जा रही थी, लेकिन आयोजन स्थल पर मौजूद वास्तविक व्यवस्था और खाली पड़ी कुर्सियों ने इन दावों की कलई खोलकर रख दी है।
मैदान के क्षेत्रफल और कुर्सियों की वास्तविक स्थिति पर आंकड़े
संबित पात्रा ने रामलीला मैदान की बनावट और वहां की व्यवस्था का ब्योरा सामने रखते हुए कहा कि यह पूरा परिसर करीब 10 से 12 एकड़ में फैला हुआ है। इस पूरे भूभाग में से लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा मुख्य मंच और उसके आगे बने सुरक्षा डी-एरिया ने ले रखा था। इसके अलावा मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ऐसा था जो पूरी तरह वीरान और खाली पड़ा रहा, जहां न तो किसी तरह की कुर्सियां लगाई गई थीं और न ही वहां कोई जनसमूह मौजूद था।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आयोजकों ने पूरे मैदान में करीब 28 हजार कुर्सियों का ही बंदोबस्त किया था। हैरानी की बात यह रही कि इतनी सीमित व्यवस्था के बावजूद करीब 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली ही रह गईं। उन्होंने सवाल किया कि जब कुर्सियों की कुल संख्या ही 28 हजार थी और उसमें भी हजारों सीटें खाली पड़ी रहीं, तो फिर दस लाख लोगों के आने का दावा किस आधार पर किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि तस्वीरों और प्रचार के जरिए वास्तविकता को छिपाया नहीं जा सकता।
मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग पर उठाए गए सवालों का जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबित पात्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआईआर के मुद्दे पर भी कांग्रेस के रुख की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जिस प्रकार रैली की भीड़ का भ्रामक आंकड़ा दे रही है, ठीक उसी तरह का गलत हिसाब-किताब वह मतदाताओं के नाम काटे जाने को लेकर भी पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि मनगढ़ंत आरोप मढ़ने से पहले कांग्रेस को अपने दावों और जमीनी हकीकत का मिलान करना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध बताने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की राहुल गांधी की मांग पर भी तार्किक सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व फरवरी 2025 में संभाला था, जबकि 2024 के आम चुनाव उनके इस पद पर आने से काफी पहले ही संपन्न हो चुके थे। उन्होंने कहा कि समयसीमा की बुनियादी जानकारी के बिना इस तरह के आरोप लगाना गैर-जिम्मेदाराना है।
नेता प्रतिपक्ष के पद और कानूनी कदमों पर भाजपा का सवाल
संबित पात्रा ने राहुल गांधी के तर्कों को उन्हीं के खिलाफ मोड़ते हुए कहा कि अगर कांग्रेस की नजर में 2024 का आम चुनाव सचमुच अवैध था, तो उसी जनादेश के जरिए मिला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी स्वतः अवैध मान लिया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि अगर चुनाव प्रक्रिया में किसी भी किस्म की अनियमितता थी, तो राहुल गांधी ने इसके खिलाफ तुरंत सक्षम अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया और कोई याचिका क्यों नहीं दायर की।
नेतृत्व, पसीना और प्रधानमंत्री पद की परिभाषा
राहुल गांधी पर राजनीतिक हमला बोलते हुए संबित पात्रा ने कहा कि केवल ट्रिक फोटोग्राफी या कैमरा एंगल के सहारे कोई बड़ा जननेता नहीं बन सकता और न ही इस तरह देश का प्रधानमंत्री बना जा सकता है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च पद तक पहुंचने के लिए वर्षों का कड़ा संघर्ष, तपस्या और पसीना बहाना पड़ता है। उन्होंने टिप्पणी की कि पीएम का मतलब सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं होता, बल्कि पी से पसीना और एम से मेहनत होता है, और इसी पसीने और मेहनत के बलबूते कोई इस मुकाम पर पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि परिवारवादी राजनीति के बजाय यदि जमीन पर जाकर जनता का भरोसा जीतने की कोशिश की गई होती, तो आज रामलीला मैदान में खाली कुर्सियों का यह दृश्य देखने को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व विज्ञापनों और झूठे दावों से नहीं, बल्कि संघर्ष और जनविश्वास से तैयार होता है।
मोहब्बत की दुकान और आम पृष्ठभूमि से जुड़े नेताओं पर टिप्पणी
राहुल गांधी के 'मोहब्बत की दुकान' वाले नारे पर तंज कसते हुए संबित पात्रा ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि इस दुकान को चलाने का आधिकारिक लाइसेंस कब मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ मोहब्बत की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाता है।
संबित पात्रा ने कहा कि यह हिंदुस्तान किसी के अब्बू-जान का नहीं, बल्कि आम हिंदुस्तानियों का मुल्क है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहां एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला चायवाला भी अपनी मेहनत के दम पर देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी इस बात को पचा नहीं पा रही है कि एक सामान्य नागरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के शीर्ष पायदान पर कैसे पहुंच गया।























