मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष के बीच प्रशासनिक स्तर पर राहत और पुनर्वास की स्थिति का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर कदम बढ़ाए हैं। मणिपुर के मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर (आईएएस) ने थौबल जिले में स्थापित तीन अलग-अलग राहत शिविरों का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के साथ सीधा संवाद स्थापित करना, उनके रहन-सहन की स्थिति का मूल्यांकन करना और उनकी बुनियादी जरूरतों तथा रोजमर्रा की समस्याओं की समीक्षा करना था।
थौबल के तीन शिविरों में पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
प्रशासनिक दल ने थौबल जिले के तीन प्रमुख केंद्रों का मुआयना किया, जिनमें वांगजिंग स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, लामडिंग हायर सेकेंडरी स्कूल और खंगाबोक स्थित राइस रिसर्च स्टेशन में बने शिविर शामिल रहे। इस निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव के साथ गृह विभाग के विशेष सचिव अहंथाम सुबाश (आईएएस), थौबल की उपायुक्त युमनाम रोबिता (आईएएस), थौबल के पुलिस अधीक्षक मनोज प्रभाकर तथा जिले के अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के पूरे दल ने प्रत्येक शिविर में जाकर वहां उपलब्ध सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल की।
विस्थापित परिवारों की आपबीती और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां
राहत शिविरों में ठहरे लोगों से बातचीत के दौरान मुख्य सचिव ने उनके सामने आ रही गंभीर सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों को सुना। प्रभावित परिवारों ने बताया कि 3 मई 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से उनका सामान्य जीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है। कई परिवारों ने साझा किया कि मोरेह, सेरोऊ, सुगनू और चुराचांदपुर जैसे अत्यधिक संघर्ष प्रभावित इलाकों में उनके घरों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिससे वे बेघर होकर इन अस्थायी शरणस्थलों में रहने को मजबूर हुए हैं। वर्षों से जारी इस विस्थापन ने उनके सामने अनिश्चित भविष्य और आजीविका का गहरा संकट खड़ा कर दिया है।
कैंडल मेकिंग और बुनाई जैसी आजीविका गतिविधियों का निरीक्षण
दौरे के दौरान मुख्य सचिव ने केवल शिकायतें ही नहीं सुनीं, बल्कि शिविरों में रह रहे लोगों द्वारा आत्मनिर्भरता के लिए शुरू किए गए प्रयासों का भी अवलोकन किया। उन्होंने विस्थापितों द्वारा संचालित मोमबत्ती निर्माण (कैंडल मेकिंग) और हथकरघा बुनाई (वीविंग) जैसी उत्पादक गतिविधियों का जायजा लिया। विपरीत परिस्थितियों में भी आय अर्जित करने और कौशल बनाए रखने के इन स्थानीय कदमों की अधिकारियों ने सराहना की।
शिक्षा और जरूरी सेवाओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
विस्थापितों की बातें सुनने के बाद मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर ने उपायुक्त और संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शिविरवासियों द्वारा उठाए गए हर मुद्दे पर प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से ध्यान दे। विशेष रूप से बच्चों की निरंतर स्कूली शिक्षा और नियमित बुनियादी नागरिक सेवाओं की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से हस्तक्षेप करने के आदेश दिए ताकि विस्थापित परिवारों को अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने में हरसंभव प्रशासनिक मदद मिल सके।



















