सिनेमा जगत में कुछ रचनाएं ऐसी होती हैं जो दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं और पर्दे पर रचा गया उनका संसार लंबे समय तक याद रहता है। निर्देशक नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी पौराणिक फिल्म ‘रामायण’ इन दिनों दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है। बड़े पर्दे पर रिलीज होने के बाद आम सिनेमाप्रेमियों से लेकर मनोरंजन उद्योग की हस्तियां तक इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रही हैं। इसी कड़ी में जाने-माने फिल्ममेकर करण जौहर ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर फिल्म की पूरी टीम के काम को सराहा है। उन्होंने इस सिनेमाई प्रयास को न केवल एक भव्य अनुभव करार दिया, बल्कि फिल्म के निर्माता, निर्देशक और मुख्य कलाकारों की कलाकारी की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी चिरपरिचित कथा का जादू
करण जौहर ने अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि रामायण की गाथा भारतीय संस्कृति और प्राचीन परंपराओं की एक अमूल्य धरोहर है। देश भर में कई पीढ़ियों ने इस पावन कहानी को बार-बार पढ़ा, सुना और देखा है। यह महाकाव्य समाज को जीवन के उच्च मूल्य, मानवता और नैतिक संस्कारों की गहरी सीख देता आया है। उनके अनुसार, जिस कहानी के हर मोड़ और हर प्रसंग से देशवासी भली-भांति परिचित हों, उसी आख्यान को पर्दे पर इस तरह प्रस्तुत करना कि दर्शक फिर से विस्मय और कौतूहल से भर जाएं, अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है।
निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी का आभार
फिल्म के निर्माण से जुड़े मुख्य कर्णधारों का उल्लेख करते हुए करण जौहर ने निर्माता नमित मल्होत्रा के विजन की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने विशाल पैमाने पर फिल्म का निर्माण करके नमित ने उन्हें भी रचनात्मक स्तर पर बड़े सपने देखने और साहसिक फैसले लेने का नया हौसला दिया है। इसके साथ ही उन्होंने निर्देशक नितेश तिवारी के निर्देशन कौशल को रेखांकित किया। करण ने कहा कि नितेश तिवारी ने इतने विराट और गंभीर विषय को बहुत ही सहज, सरल और सुंदर ढंग से स्क्रीन पर जीवंत कर दिया है, जिससे दर्शक अनायास ही कहानी के भावनात्मक प्रवाह में बह जाते हैं।
भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर की सशक्त प्रस्तुति
रणबीर कपूर के अभिनय पर विशेष चर्चा करते हुए करण जौहर ने माना कि भगवान राम के चरित्र को निभाना उनके अभिनय करियर की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक रहा है। उन्होंने कहा कि रणबीर ने बिना किसी दिखावे या आडंबर के इस पावन स्वरूप की गरिमा को पूरी तरह बनाए रखा है। करण के शब्दों में, रणबीर की आंखें ही उनके अभिनय का सबसे शक्तिशाली माध्यम हैं, जिनके सूक्ष्म भावों के जरिए वह संवादों से परे भी बहुत कुछ कह जाते हैं। उन्होंने इस भूमिका में जिस सहजता और गहराई के साथ काम किया है, उसने हर किसी का दिल छू लिया है।
यश की शक्तिशाली मौजूदगी और साई पल्लवी का मार्मिक समर्पण
फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे यश के बारे में करण जौहर ने कहा कि स्क्रीन पर उनका व्यक्तित्व बेहद चुंबकीय और प्रभावशाली नजर आता है। जब भी यश पर्दे पर आते हैं, दर्शकों का सारा ध्यान स्वतः ही उनकी ओर खिंच जाता है। लंकापति के रूप में उनका रोब और भव्य रूप अद्वितीय है। करण ने खासतौर पर उस दृश्य की चर्चा की जिसमें रावण के मन के भीतर उठने वाले अंतर्द्वंद और अलग-अलग मानसिक आवाजों को दर्शाया गया है, जिसे उन्होंने बेहद खास और प्रभावशाली बताया। वहीं माता सीता की भूमिका में साई पल्लवी के प्रदर्शन को सराहते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने त्याग, शालीनता और निस्वार्थ प्रेम की भावना को अत्यंत मार्मिक रूप से उजागर किया है।
लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे का भावनात्मक प्रभाव
फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले अभिनेता रवि दुबे के काम की भी करण जौहर ने जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि रवि ने एक आज्ञाकारी, निष्ठावान और समर्पित भाई के भावनात्मक दायित्व को अत्यंत कुशलता से निभाया है। उनके संवेदनशील अभिनय ने न सिर्फ दर्शकों को भावुक किया बल्कि उनके चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान भी बिखेरी। अंत में करण जौहर ने कैमरे के आगे और पर्दे के पीछे काम करने वाले हर तकनीकी विशेषज्ञ और कलाकार को इस सफलता पर बधाई दी। उन्होंने यह भी साझा किया कि एक फिल्ममेकर के तौर पर वह इस सिनेमाई प्रयास से बेहद प्रेरित महसूस कर रहे हैं और एक भारतीय दर्शक के रूप में उन्हें गर्व का अनुभव हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सभी दर्शकों से अपने पूरे परिवार सहित सिनेमाघरों में जाकर इस फिल्म का आनंद लेने का अनुरोध किया।



















