भारतीय महाकाव्य पर केंद्रित निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण: पार्ट 1' आखिरकार 5 नवंबर को बड़े पर्दे पर आ चुकी है। दो भागों में तैयार हो रहे इस भव्य सिनेमाई प्रोजेक्ट को लेकर दर्शकों के बीच शुरुआत से ही भारी उत्साह देखा जा रहा है। नमित मल्होत्रा और यश के संयुक्त निर्माण में बनी इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी विशाल स्टारकास्ट है, जिसमें हिंदी सिनेमा के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्म जगत के कई दिग्गज कलाकारों को एक साथ लाया गया है। मुख्य किरदारों के रूप में रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश के नामों की चर्चा हर तरफ रही है, लेकिन इस महागाथा को संपूर्णता देने वाले अन्य पौराणिक पात्रों के लिए भी बेहद सधे हुए अभिनेताओं का चयन किया गया है।
अयोध्या के राजकुमार राम के रूप में रणबीर कपूर
फिल्म में भगवान राम की केंद्रीय भूमिका अभिनेता रणबीर कपूर अदा कर रहे हैं। अयोध्या के राजकुमार और संपूर्ण महाकाव्य के सबसे प्रमुख स्तंभ के रूप में राम का चरित्र मर्यादा, धैर्य, गहरा संयम और धर्मपरायणता का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। इस ऐतिहासिक चरित्र को जीवंत करने के अनुभव को रणबीर ने अपने करियर का एक असाधारण दायित्व स्वीकार किया है। उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर बातचीत करते हुए स्पष्ट किया था कि भगवान राम के व्यक्तित्व की सबसे वास्तविक शक्ति उनके शांत आचरण, असाधारण गरिमा और विकट परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखने की सामर्थ्य में निहित है। बड़े पर्दे पर उनके इस रूपांतरण को देखने के लिए दर्शक खासे उत्सुक रहे हैं।
माता सीता के त्याग को पर्दे पर उतारेंगी साई पल्लवी
मिथिला की राजकुमारी और भगवान राम की अर्धांगिनी माता सीता का किरदार अभिनेत्री साई पल्लवी निभा रही हैं। कहानी के अनुसार जब राम को चौदह वर्षों का वनवास मिलता है, तब सीता समस्त सांसारिक सुखों का परित्याग कर अपने पति के साथ वनों की ओर प्रस्थान करती हैं। इसी वन गमन की अवधि में लंका का राजा रावण छलपूर्वक उनका हरण करके ले जाता है। संपूर्ण आख्यान में सीता का चरित्र असीम प्रेम, निष्ठा, अडिग आत्मसम्मान, साहस और अद्वितीय सहनशीलता का परिचायक है। दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपने प्रभावशाली अभिनय से अमिट छाप छोड़ने वाली साई पल्लवी पहली बार इस पावन और प्रतिष्ठित भूमिका को सिनेमाई कैनवास पर साकार कर रही हैं।
लंकापति रावण के शक्तिशाली रूप में दिखेंगे यश
केजीएफ के जरिए पूरे देश में अपनी छाप छोड़ने वाले अभिनेता यश फिल्म में लंका के अधिपति रावण के रूप में नजर आ रहे हैं। रामायण की गाथा में रावण का स्थान बेहद व्यापक और जटिल है। वह न केवल एक अत्यंत प्रतापी और दुर्जेय शासक था, बल्कि अद्वितीय बुद्धि, वेदों के ज्ञान और प्रकांड विद्वता से भी संपन्न था। इसके बावजूद, माता सीता के छलपूर्वक किए गए अपहरण का उसका निर्णय अंततः भगवान राम के साथ एक विनाशकारी संग्राम की मुख्य वजह बन गया। यश के लिए यह भूमिका अभिनय और शारीरिक भाषा दोनों स्तरों पर एक बड़ी चुनौती मानी गई है, और उनकी मजबूत स्क्रीन उपस्थिति को देखते हुए दर्शक उनके इस रूप के प्रति विशेष आकर्षण महसूस कर रहे हैं।
निष्ठावान भाई लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं रवि दुबे
भगवान राम के छोटे भ्राता लक्ष्मण की भूमिका में अभिनेता रवि दुबे दिखाई दे रहे हैं। भारतीय परंपरा में लक्ष्मण का नाम अपने बड़े भाई के प्रति अटूट निष्ठा, अगाध स्नेह और पूर्ण समर्पण के लिए सर्वोपरि माना जाता है। अयोध्या के राजमहल की सभी भौतिक सुख-सुविधाओं और विलासिता को पीछे छोड़कर वह भी राम और सीता के साथ चौदह वर्षों की कठिन वन यात्रा पर चले जाते हैं। वनवास के पूरे कालखंड में वह हर संकट के आगे अपने भ्राता के साथ एक ढाल बनकर खड़े रहे। रवि दुबे ने सार्वजनिक रूप से इस पौराणिक किरदार को निभाने के अवसर को अपने संपूर्ण कलात्मक सफर का एक सर्वोच्च सम्मान करार दिया है।
अरुण गोविल बने हैं राजा दशरथ और लारा दत्ता रानी कैकेयी
रामानंद सागर के ऐतिहासिक टेलीविजन धारावाहिक में भगवान राम का अमर किरदार निभाकर पूरे देश के हृदय में बसने वाले वरिष्ठ अभिनेता अरुण गोविल इस फिल्म में अयोध्या नरेश राजा दशरथ के रूप में उपस्थित हैं। दशरथ अपने ज्येष्ठ पुत्र राम से अगाध स्नेह रखते हैं, किंतु अपनी पत्नी रानी कैकेयी को दिए गए पुराने वचनों की विवशता के कारण उन्हें भारी मन से राम को चौदह वर्ष के वनवास का आदेश देना पड़ता है। यह भूमिका एक ऐसे असहाय पिता की गहरी मानसिक वेदना को उजागर करती है, जो अपने प्रिय पुत्र के वियोग का असह्य दंश झेलता है।
वहीं राजा दशरथ की पत्नी और भरत की माता रानी कैकेयी की भूमिका अभिनेत्री लारा दत्ता ने निभाई है। रामायण के पूरे घटनाक्रम को निर्णायक मोड़ देने में कैकेयी का प्रसंग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अपनी दासी मंथरा की कुटिल बातों के प्रभाव में आकर वह राजा दशरथ से अपने वे दो पूर्व वरदान मांग बैठती हैं, जिनके तहत वह भरत का राज्याभिषेक और राम के लिए चौदह वर्षों का निष्कासन सुनिश्चित करवाती हैं। कैकेयी के इसी अप्रत्याशित कदम से अयोध्या के राजघराने का भविष्य पूरी तरह बदल जाता है।
मंथरा बनीं शीबा चड्ढा और माता कौशल्या के रूप में इंदिरा कृष्णन
रानी कैकेयी की निजी और विश्वासपात्र दासी मंथरा के जटिल किरदार में अभिनेत्री शीबा चड्ढा नजर आ रही हैं। मंथरा ही वह पात्र है जो कैकेयी के मन में ईर्ष्या और असुरक्षा का बीज बोकर उन्हें यह विश्वास दिलाती है कि अयोध्या की गद्दी पर भरत का ही अधिकार होना चाहिए और राम को राजधानी से दूर भेज दिया जाना चाहिए। उसकी इसी कूटनीति के वशीभूत होकर कैकेयी अपने वचनों को भुनाने का फैसला करती हैं। भले ही दृश्य रूप में मंथरा का दायरा सीमित प्रतीत होता हो, परंतु उसकी चालाकी और षड्यंत्र ने पूरी कथा की गति को हमेशा के लिए मोड़ दिया।
इसके समानांतर, भगवान राम की जन्मदात्री और महाराज दशरथ की पटरानी कौशल्या का पात्र अभिनेत्री इंदिरा कृष्णन ने निभाया है। रानी कौशल्या का अपने पुत्र राम के प्रति अगाध और निस्वार्थ वात्सल्य रहा है। जब राजमहल में राम के चौदह वर्ष तक वन में वास करने की घोषणा होती है, तो यह आघात उनके मातृ हृदय पर वज्रपात के समान पड़ता है। फिल्म में उनका यह चरित्र एक मां की असीम ममता, त्याग और संतान से अलग होने के असहनीय संताप को सशक्त अभिव्यक्ति देता है।
त्याग की प्रतिमूर्ति भरत के रूप में आदिनाथ कोठारे
मराठी सिनेमा के ख्यातिप्राप्त अभिनेता आदिनाथ कोठारे ने फिल्म में राजा दशरथ और रानी कैकेयी के पुत्र भरत की भूमिका निभाई है। राम के वन की ओर प्रस्थान करने के पश्चात अयोध्या के रिक्त सिंहासन का उत्तराधिकारी भरत को ही घोषित किया जाता है। इसके विपरीत, भरत अपने ज्येष्ठ भ्राता राम के नैतिक और स्वाभाविक अधिकार का सम्मान करते हुए स्वयं राजा बनने से साफ मना कर देते हैं। राजपद का त्याग करने का उनका यह निर्णय मर्यादा, बंधुत्व और निःस्वार्थ आदर का ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है जो सदियों से अनुकरणीय रहा है।
मंदोदरी बनी हैं काजल अग्रवाल और शूर्पणखा का रोल रकुल प्रीत सिंह के पास
लंका की महारानी और रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी के रूप में अभिनेत्री काजल अग्रवाल को कास्ट किया गया है। पौराणिक आख्यानों में मंदोदरी को सदैव एक अत्यंत प्रबुद्ध, नीतिवान और भविष्यदर्शी स्त्री के रूप में चित्रित किया गया है। वह रावण की कई हठधर्मिताओं और अन्यायपूर्ण निर्णयों से असहमत रहती हैं। विशेषकर सीता के हरण के बाद वह इस बात को भली-भांति भांप लेती हैं कि रावण का यह अनैतिक कदम अंततः संपूर्ण स्वर्ण लंका के सर्वनाश का कारण बनेगा, और वह अपने पति को इस विनाशकारी मार्ग से विमुख करने के लिए निरंतर समझाने का प्रयास करती हैं।
दूसरी तरफ, रावण की बहन शूर्पणखा का चर्चित किरदार अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने निभाया है। वनवास के दौरान दंडकारण्य में शूर्पणखा का सामना दोनों राजकुमारों राम और लक्ष्मण से होता है। इस भेंट के पश्चात उत्पन्न हुआ तीखा विवाद आगे चलकर एक बड़े संघर्ष में बदल जाता है, जिसके बाद वह लंका लौटकर अपने भाई रावण के समक्ष पूरा वृत्तांत रखती हैं और यही घटना आगे चलकर सीता हरण और लंका युद्ध की मुख्य पृष्ठभूमि तैयार करती है।



















