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मऊ में किसान सरसों की इन तीन किस्मों से पा सकते हैं बंपर पैदावार और ज्यादा तेलव्यापार
5 नव॰ 2026, 12:10 pm (8 मिनट पहले)· 0

मऊ में किसान सरसों की इन तीन किस्मों से पा सकते हैं बंपर पैदावार और ज्यादा तेल

रबी सीजन में सरसों की खेती करने वाले किसान बेहतर पैदावार और ज्यादा तेल पाने के लिए कुछ चुनिंदा किस्मों की बुवाई कर सकते हैं। सही विधि और समय पर सिंचाई से फसल का उत्पादन काफी बढ़ जाता है।

रबी की फसल की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है और आमतौर पर लोग गेहूं की बुवाई के साथ ही सरसों के बीज भी खेतों में डाल देते हैं। हालांकि, सरसों की सही बुवाई का समय गेहूं की बुवाई से पहले का होता है। यदि आप भी सरसों की खेती करने की योजना बना रहे हैं और चाहते हैं कि पेराई के दौरान अधिक से अधिक तेल निकले, तो आपको कुछ खास तौर पर सुझाई गई विधियों को अपनाना होगा। सही तौर-तरीके अपनाने से न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी होती है, बल्कि तेल की मात्रा भी काफी अच्छी मिलती है। आइए जानते हैं कि कौन सी वैरायटी का चयन करना चाहिए और बुवाई के दौरान किन बातों पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है।

बेहतर पैदावार के लिए इन तीन किस्मों का करें चयन

कृषि मामलों के जानकार आलोक कुमार मौर्य बताते हैं कि यदि किसान भाई ऐसी सरसों की बुवाई करना चाहते हैं जिससे बंपर पैदावार के साथ-साथ तेल की मात्रा भी बंपर मिले, तो इसके लिए तीन खास वैरायटी सबसे उत्तम मानी जाती हैं। किसानों को 1666, 4546 और 1015 वैरायटी के बीजों की बुवाई करनी चाहिए। ये तीनों ऐसी किस्में हैं जिनसे सबसे ज्यादा पैदावार मिलती है और बीजों से तेल की मात्रा भी भरपूर निकलती है। बाजार में इन तीनों चुनिंदा किस्मों के बीज लगभग 1200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से उपलब्ध हैं। इन उन्नत बीजों का चयन करके किसान अपनी आमदनी को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।

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अन्य लोकप्रिय वैरायटी और उनके दाम

आलोक कुमार मौर्य का यह भी कहना है कि बाजार में 600 रुपये से लेकर 1100 रुपये प्रति किलो की कीमत वाले बीज भी मौजूद हैं। इनमें विजुगुड़ी की कंपनी का जोरदार, धाकड़ और क्रिस्टल कंपनी की 5222 वैरायटी की सरसों भी अधिक पैदावार देने वाली मानी जाती हैं। इन किस्मों की खेती करके भी किसान अपनी फसल के उत्पादन को ऊपर उठा सकते हैं और जब पेराई का वक्त आता है तो बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। हालांकि, केवल बीज खरीद लेना ही काफी नहीं है, बल्कि खेत में बुवाई करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अक्सर यह देखा जाता है कि लोग केवल खेतों में सरसों के बीज छिटकर जुताई कर देते हैं, जिससे मनमुताबिक पैदावार नहीं मिलती और पेराई के वक्त तेल की मात्रा भी कम निकलती है।

सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन का सही तरीका

पेराई के वक्त तेल की मात्रा अधिक हासिल हो, इसके लिए बुवाई के समय ही खेत में सल्फर और डाई का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, बुवाई के ठीक 20 दिन बाद सरसों के खेत में पहली सिंचाई जरूर कर देनी चाहिए। सिंचाई का काम पूरा होने के बाद प्रति बीघा के हिसाब से खाद और 2 किलो सल्फर का प्रयोग करना फायदेमंद साबित होता है। इस पूरी प्रक्रिया को ठीक से अपनाने से सरसों के पौधों का विकास तेजी से होता है, पैदावार में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है और पेराई के समय तेल की मात्रा भी उम्मीद से अधिक निकलती है। इन आसान तरीकों से खेती करने पर किसानों को बेहद शानदार नतीजे मिलते हैं।

सवाल-जवाब

सरसों की बुवाई के लिए कौन सी तीन वैरायटी सबसे अच्छी बताई गई हैं?
बेहतर पैदावार और अधिक तेल के लिए 1666, 4546 और 1015 वैरायटी के बीजों की बुवाई करने की सलाह दी जाती है।
इन उन्नत किस्मों के बीज बाजार में किस कीमत पर मिलते हैं?
ये तीनों मुख्य वैरायटी के बीज लगभग 1200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में मिलते हैं।
सरसों के खेत में पहली सिंचाई कब करनी चाहिए?
बुवाई के ठीक 20 दिन बाद सरसों के खेत में पहली सिंचाई कर देनी चाहिए।
सिंचाई के बाद खेत में क्या डालना फायदेमंद होता है?
सिंचाई के बाद प्रति बीघा के हिसाब से खाद और 2 किलो सल्फर का प्रयोग करना चाहिए।
बाजार में अन्य कौन सी लोकप्रिय वैरायटी उपलब्ध हैं?
बाजार में 600 रुपये से 1100 रुपये प्रति किलो की कीमत वाले बीज भी आते हैं, जिसमें जोरदार, धाकड़ और क्रिस्टल कंपनी की 5222 वैरायटी शामिल हैं।
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