अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय कारोबारी और उनकी पत्नी को अपने प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से की गई इस कार्रवाई में सुनील कुमार शर्मा और जसप्रीत प्रीति शाहिद के नाम शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस भारतीय जोड़े ने एक ऐसा समुद्री नेटवर्क संचालित किया जो ईरानी पेट्रोलियम ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को अपनी पहचान छिपाने में मदद करता था। इस कथित व्यवस्था के तहत जहाजों के लिए जाली रजिस्ट्रेशन और प्रमाण पत्र तैयार किए जाते थे ताकि वे विभिन्न देशों के झंडों की आड़ में समुद्र में आवाजाही कर सकें और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर सकें।
भारतीय नागरिकों और कंपनियों पर अमेरिकी शिकंजा
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भारत और तुर्की में सक्रिय कुछ अन्य व्यक्तियों तथा संस्थाओं के खिलाफ भी इसी दौरान प्रतिबंधों की घोषणा की। इस फेहरिस्त में सुनील शर्मा की पत्नी के अतिरिक्त दो और भारतीय नागरिक तथा शर्मा से जुड़ी कुल नौ कंपनियों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि इस पूरे तंत्र ने ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई करने वाले उन जहाजों को फर्जी दस्तावेज मुहैया कराए, जिनका संचालन ईरानी सेना या उससे जुड़े संगठनों द्वारा किया जा रहा था। यह पूरी कार्रवाई डोनाल्ड ट्रंप के ओपेरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का एक अहम हिस्सा है, जिसका मुख्य ध्येय ईरान की तेल से होने वाली आमदनी को रोकना है ताकि उस धन का इस्तेमाल सैन्य अभियानों में न किया जा सके।
फर्जी नियामक संस्थाओं और वेबसाइटों का खेल
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, इस कारोबारी दंपती द्वारा चलाई जा रही समुद्री धोखाधड़ी की गतिविधियां कम से कम साल 2014 से लगातार जारी थीं। इस नेटवर्क के जरिए ऐसी कई वेबसाइट्स और संस्थाएं खड़ी की गई थीं जो खुद को अलग-अलग देशों के समुद्री नियामक प्राधिकरणों का आधिकारिक प्रतिनिधि बताती थीं। हालांकि, वास्तविकता यह थी कि संबंधित देशों की सरकारों की ओर से इन्हें ऐसा कोई अधिकार या अनुमति प्राप्त नहीं थी। इन इंटरनेट पोर्टल्स के माध्यम से जहाजों का पंजीकरण करने के साथ-साथ नाविकों को प्रशिक्षित करने और जहाजों को फिटनेस सर्टिफिकेट देने जैसे तमाम दावे किए जाते थे, जिनका कोई कानूनी आधार नहीं था।
समुद्री जहाजों के झंडों का दुरुपयोग और अवैध नेटवर्क
अंतरराष्ट्रीय नौवहन और समुद्री व्यापार में किसी भी पोत का ध्वज बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उसी देश के नियम और कानून उस पर लागू होते हैं, और वैध पंजीकरण के जरिए ही देश जहाजों की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का यह आरोप है कि शर्मा और शाहिद ने इस स्थापित व्यवस्था का गलत फायदा उठाया। उनका यह तंत्र अरूबा, गुयाना, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते जैसे विभिन्न देशों के झंडे के तहत जहाजों को पंजीकृत करने का दावा करता था। संबंधित देशों की औपचारिक मंजूरी के बिना ही जहाजों को ये फर्जी प्रमाण पत्र बांटे जाते थे, जिससे ईरानी तेल ढोने वाले प्रतिबंधित पोत अपनी वास्तविक पहचान को छुपाकर समुद्र में बेरोक-टोक चल पाते थे।
ईरान के पेट्रोलियम कारोबार से सीधा कनेक्शन
वॉशिंगटन का स्पष्ट मानना है कि इस पूरे धोखाधड़ी वाले तंत्र ने ईरानी पेट्रोलियम की ढुलाई करने वाले पोतों को अवैध झंडे और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराकर बड़ी सहायता पहुंचाई। इस दायरे में वे जहाज भी शामिल थे जो सीधे तौर पर ईरानी सेना या उसके सहयोगी संगठनों के अधीन कार्य कर रहे थे। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, इस प्रकार की व्यवस्था ने ईरान को अपने तेल की ब्रिकी जारी रखने और उस पर लगाए गए वैश्विक प्रतिबंधों से बचने का खुला रास्ता दिया। इसके अलावा, अमेरिका ने तुर्की की एक कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध मढ़े हैं, जिस पर ईरान के प्रतिबंधित विमानन क्षेत्र को लगातार सहयोग देने का गंभीर आरोप है।
अमेरिकी पाबंदियों का असर और वित्तीय परिणाम
अमेरिका के इस सख्त फैसले के बाद, सूची में शामिल लोगों और संस्थाओं की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाली सभी संपत्तियों तथा वित्तीय हितों को फ्रीज किया जा सकता है। इसके साथ ही, किसी भी अमेरिकी नागरिक या कंपनी को इनके साथ व्यापारिक संबंध रखने या वित्तीय लेनदेन करने की सख्त मनाही होगी। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी OFAC से विशेष अनुमति प्राप्त होने की स्थिति में कुछ मामलों में अपवाद संभव हो सकते हैं। इन प्रतिबंधों का दायरा केवल सीधे तौर पर नामित संस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जिन कंपनियों में ऐसे व्यक्तियों की सीधी या परोक्ष रूप से 50 प्रतिशत या उससे अधिक की हिस्सेदारी है, वे भी इसकी चपेट में आ सकती हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने दुनिया भर के अन्य कारोबारियों को भी चेतावनी दी है कि यदि वे इस प्रकार के प्रतिबंधित लेनदेन को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, तो उन्हें भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।



















