साउथ एशियन पॉप संगीत के इतिहास में कुछ ऐसी धुनें दर्ज हैं जो समय के बदलाव के बावजूद कभी पुरानी नहीं पड़तीं। पाकिस्तानी पॉप गायक हसन जहांगीर का गाया ट्रैक 'हवा हवा' इसी कड़ी की सबसे मजबूत मिसाल है। यह गाना कई दशकों के अंतराल में अनगिनत बार नए सांचे में ढाला गया और भारतीय सिनेमा में इसे बार-बार जगह मिली। वर्ष 2025 की चर्चित फिल्म 'धुरंधर' में जब पर्दे पर संजय दत्त की धमाकेदार एंट्री हुई, तो बैकग्राउंड में इसी धुन के बजते ही सिनेमाघरों में दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। दशकों के सफर के दौरान अलग-अलग पीढ़ियों के बीच यह ट्रैक किस तरह अपनी पहचान बनाए रखने में कामयाब रहा, इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है।
फारसी संगीत से उर्दू पॉप तक का सफर
इस लोकप्रिय गाने की जड़ें असल में 1970 के दशक के फारसी संगीत से जुड़ी हैं। ईरानी संगीतकार और गायक कोरोश यघमई ने मूल रूप से 'हावर हावर' नाम से एक गीत पेश किया था। इसी धुन को आधार बनाकर पाकिस्तानी गायक हसन जहांगीर ने उर्दू में 'हवा हवा' तैयार किया, जिसकी रिलीज 1987 के दौर में मानी जाती है। गाने के शुरुआती बोल 'हवा हवा ऐ हवा, खुशबू लुटा दे' का सीधा अर्थ हवा से हर दिशा में अपनी महक बिखेर देने की गुजारिश करना है। जहांगीर की आवाज और इस तेज तर्रार रिदम ने बहुत कम समय में संगीत प्रेमियों के दिलों पर कब्जा जमा लिया।
खुद हसन जहांगीर ने इस धुन के खिंचाव को लेकर रेखांकित किया था कि इसकी बीट्स और लय इतनी जादुई हैं कि भाषा की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं। जब यह फारसी में था, तब भी जिन श्रोताओं को भाषा की समझ नहीं थी, वे इसकी ऊर्जावान धुन पर झूमने को मजबूर हो जाते थे। फारसी से उर्दू में रूपांतरित होने के बाद इस गीत ने पूरे दक्षिण एशिया में धूम मचा दी। पाकिस्तान के साथ-साथ भारत और बांग्लादेश में भी जहांगीर की एल्बम को व्यापक पहचान मिली और रेडियो पर इसे लगातार बजाया जाता रहा।
नब्बे के दशक में हिंदी सिनेमा में शुरुआती रूपांतरण
भारतीय संगीत निर्देशकों ने बहुत जल्द इस कैची धुन की लोकप्रियता को भांप लिया और इसे फिल्मों में शामिल करना शुरू किया। वर्ष 1989 में गोविंदा की फिल्म 'बिल्लू बादशाह' रिलीज हुई, जिसमें 'जवां जवां इश्क जवां' गाने में इसी धुन का अनौपचारिक प्रभाव साफ सुनाई दिया। इस ट्रैक को खुद गोविंदा ने अपनी आवाज दी थी। उसी वर्ष 1989 में निर्देशक बप्पी लहरी ने फिल्म 'आग का गोला' के लिए 'आया आया प्यार आया' तैयार किया, जो इसी मूल धुन पर टिका था। इस गीत के दृश्यों में सनी देओल, अर्चना पूरन सिंह और प्रेम चोपड़ा नजर आए थे।
इसके बाद वर्ष 1994 में आई फिल्म 'इंसाफ अपने लहू से' में तो मूल ट्रैक को ही आधिकारिक रूप में जगह मिल गई। इस फिल्म में संजय दत्त मुख्य भूमिका में थे और गाने का शीर्षक भी 'हवा हवा' ही रखा गया, जिसे खुद हसन जहांगीर ने गाया था। इस तरह संजय दत्त के फिल्मी सफर में पहली बार इस धुन का सीधा जुड़ाव देखने को मिला।
नए दौर की फिल्मों में नया कलेवर
समय बदलने के बावजूद इस गीत की मांग कम नहीं हुई। वर्ष 2012 में फिल्म 'चालीस चौरासी' में इस गाने का एक और रीमेक सामने आया। इसके बाद 2017 में अनीस बज्मी निर्देशित फिल्म 'मुबारकां' में इसे नए दौर के अंदाज में पेश किया गया। इस फिल्म के लिए 'हवा हवा' को मुख्य प्रमोशनल सिंगल के रूप में रिलीज किया गया था। इस नए संस्करण में पुराने क्लासिक की मूल हुकलाइन को बरकरार रखते हुए बाकी बोल पूरी तरह बदल दिए गए थे। मीका सिंह की आवाज में सजे इस ट्रैक को अभिनेता अर्जुन कपूर और इलियाना डिक्रूज पर शूट किया गया था।
फिल्म 'धुरंधर' में संजय दत्त की एंट्री और संगीत का अधिकार
लंबे समय तक अलग-अलग रूपों में सामने आने के बाद वर्ष 2025 की बड़ी हिट फिल्म 'धुरंधर' में इस धुन का क्रेज एक बार फिर देखने को मिला। पर्दे पर जब संजय दत्त ने 'एसपी चौधरी असलम खान' के किरदार में कदम रखा, तो थिएटर इसी धुन की गूंज से भर गए। संजय दत्त के करियर में यह दूसरा मौका था जब उनके सीन पर यह गाना इस्तेमाल किया गया। इस उपयोग को लेकर पाकिस्तानी गायक हसन जहांगीर ने जानकारी दी कि फिल्म के निर्माताओं ने उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी। जहांगीर के अनुसार, 'धुरंधर' की टीम ने उनसे आधिकारिक अनुमति हासिल की और इसके एवज में उन्हें 50,000 डॉलर का भुगतान किया।



















