हिंदी सिनेमा के कई ऐसे सदाबहार तराने हैं, जिनका संगीत आज भी कानों में गूंजता है, मगर उनके बनने का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। साल 1997 में सिनेमाघरों में आई निर्देशक यश चोपड़ा की म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म 'दिल तो पागल है' का एक ऐसा ही जादुई गीत है, जिसे अंतिम रूप दिए जाने से पहले पूरे 50 बार नामंजूर किया गया था। संगीतकार उत्तम सिंह को इस धुन को मंजूरी दिलाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब यह गीत दर्शकों के बीच आया तो उसने भारतीय संगीत जगत में इतिहास रच दिया।
महीनों की मशक्कत और 50 बार नाकामी का सामना
इस अमर गीत की रचना के पीछे संगीतकार उत्तम सिंह का अटूट धैर्य छिपा है। उन्होंने इस धुन को तैयार करने के बाद फिल्म की टीम और चोपड़ा परिवार को सुनाना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उत्तम सिंह करीब पांच महीनों तक लगातार इस धुन को बेहतर बनाने और चोपड़ा परिवार के सामने पेश करने की जद्दोजहद में जुटे रहे। हर मुलाकात के बाद निराशा ही हाथ लगी और धुन को बार-बार खारिज किया जाता रहा। कुल मिलाकर 50 बार ना सुने जाने के बावजूद संगीतकार ने अपनी इस रचना पर भरोसा नहीं खोया।
उदय चोपड़ा की राय ने बदली धुन की किस्मत
लगातार मिल रहे रिजेक्शन के बीच एक अहम मोड़ तब आया जब यश चोपड़ा के छोटे बेटे उदय चोपड़ा ने इस धुन को सुना। धुन सुनते ही उन्हें इसकी लय, ताजगी और लोकप्रियता की असीम संभावनाएं भा गईं। उन्होंने महसूस किया कि इस धुन में युवाओं को झूमने पर मजबूर करने की ताकत है और यह एक बहुत बड़ा हिट नंबर साबित हो सकता है। उनके सकारात्मक रुख के बाद आखिरकार इस धुन पर मुहर लगी और इसे फिल्म के साउंडट्रैक में शामिल करने का फैसला किया गया।
आनंद बख्शी के शब्द और लता-उदित की सुरीली आवाज
मंजूरी मिलने के बाद इस धुन पर दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी ने कलम चलाई और शब्दों में पिरोकर इसे 'अरे रे अरे' जैसा यादगार नाम दिया। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और मशहूर गायक उदित नारायण ने अपनी सुरीली आवाज से इस गीत में जान फूंक दी। उत्तम सिंह का यह संगीत पूरी फिल्म में एक प्रमुख थीम की तरह बार-बार इस्तेमाल हुआ, जिसने फिल्म की भावनात्मक गहराई को और बढ़ा दिया। तीन दशक बाद भी यह गीत नब्बे के दशक के रोमांटिक दौर की ताज़ा यादें ताजा कर देता है।
बॉक्स ऑफिस पर तूफान और नेशनल अवॉर्ड्स में डंका
शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म प्यार, दोस्ती, नृत्य और संगीत के खूबसूरत तालमेल पर आधारित थी। फिल्म के गानों ने रिलीज होते ही चार्टबस्टर्स पर राज किया। लगभग 9 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 70 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन किया। व्यावसायिक सफलता के साथ ही फिल्म ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में भी अपनी धाक जमाई और तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिनमें 'बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट' का प्रतिष्ठित सम्मान शामिल था।


















