पाकिस्तान की राजनीति और आतंकी संगठनों के बीच के घनिष्ठ संबंधों को एक बार फिर देश के ही एक प्रमुख राजनेता ने सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद ने इस्लामाबाद में आयोजित एक सर्वदलीय बैठक के दौरान मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद की जमकर तारीफ की। मंच पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने बेझिझक खुद को हाफिज सईद का अनुचर और समर्थक घोषित किया। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाफिज सईद से रिश्ते का खुलकर महिमामंडन
इस्लामाबाद में हुई बैठक के दौरान शेख रशीद ने किसी संकोच के बिना आतंकी सरगना के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने सार्वजनिक मंच से संबोधन के दौरान कहा कि वह हाफिज सईद को अपना मार्गदर्शक मानते हैं और उनके साथ खड़े रहने में उन्हें कोई झिझक नहीं है। उन्होंने वहां मौजूद चरमपंथियों और उनके समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "आप मुजाहिद लोग हैं, अजीम लोग हैं। आपने अपनी जिंदगियां वक्फ की हैं पाकिस्तान के लिए और हम भी इंशाल्लाह ताला हाफिज सईद साहब के साथ हैं।"
पूर्व गृह मंत्री के इस वक्तव्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता के उच्च पदों पर रह चुके नेता किस तरह खूंखार आतंकवादियों के प्रति खुले तौर पर सहानुभूति और समर्थन रखते हैं। इस भाषण के दौरान उन्होंने चरमपंथियों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों को राष्ट्रसेवा के रूप में पेश करने का प्रयास किया।
अमेरिकी निष्कासन की घटना को बताया उपलब्धि
अपने संबोधन के दौरान शेख रशीद ने एक पुरानी घटना का जिक्र किया, जिसे उन्होंने किसी शर्मिंदगी के बजाय अपनी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जब वह एक बार संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा पर गए थे, तब अमेरिकी सुरक्षा और आव्रजन अधिकारियों ने जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन की तलाशी ली थी। उस तलाशी में अधिकारियों को उनके फोन की संपर्क सूची में हाफिज सईद का फोन नंबर मिला था।
फोन में अंतरराष्ट्रीय आतंकी का नंबर मिलने के तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें अपने देश से निष्कासित कर दिया था। शेख रशीद ने इस पूरी घटना को गर्व के साथ साझा करते हुए कहा कि उनके फोन से हाफिज सईद का नंबर निकलने के कारण ही उन्हें अमेरिका से बाहर निकाला गया था। जिस अंदाज में उन्होंने इस बात को बयां किया, उससे यह साफ झलकता है कि आतंकी आकाओं के साथ संपर्क रखना उनके लिए गर्व का विषय है।
26/11 मुंबई हमले का गुनाहगार और वैश्विक शिकंजा
जिस हाफिज सईद का समर्थन पूर्व गृह मंत्री खुलेआम कर रहे हैं, वह वर्ष 2008 में भारत के मुंबई शहर में हुए भीषण आतंकवादी हमलों का मुख्य सूत्रधार है। उस आतंकी हमले में 166 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी और सैकड़ों अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठनों का प्रमुख रहा है, जिन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के प्रमुख देशों ने हाफिज सईद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर रखा है। अमेरिकी प्रशासन ने उस पर करोड़ों डॉलर का इनाम भी घोषित किया हुआ है। ऐसे खूंखार आतंकी को महान बताना और उसके प्रति अपनी वफादारी जताना पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व की मंशा को उजागर करता है।
पाकिस्तानी सियासत का आतंकी तंत्र से गठजोड़
यह घटनाक्रम कोई अकेला मामला नहीं है। पाकिस्तान में आतंकवादियों और राजनीतिक-सैन्य तंत्र के बीच का सांठगांठ पहले भी कई मौकों पर देखा गया है। हाल ही में सैन्य अभियानों में मारे गए आतंकियों के अंतिम संस्कार में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, सरकारी मंत्रियों और धार्मिक नेताओं की उपस्थिति दर्ज की गई थी। पूर्व गृह मंत्री का यह ताजा बयान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के समक्ष पाकिस्तान के उस रुख को खारिज करता है, जिसमें वह स्वयं को आतंकवाद का पीड़ित बताता आया है।



















