अमेरिका के शिकागो शहर की एक जूरी ने वैश्विक विमान निर्माता कंपनी बोइंग को निर्देश दिया है कि वह इथियोपियन एयरलाइंस के दर्दनाक विमान हादसे में जान गंवाने वाले आयरिश नागरिक माइकल 'मिक' रायन के परिवार को 29 मिलियन डॉलर का मुआवजा दे। माइकल रायन संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम में बतौर इंजीनियर कार्यरत थे और 10 मार्च 2019 को हुए इस भयानक हादसे में मारे गए 157 लोगों में शामिल थे। उनकी पत्नी नाइस कॉनोली रायन ने बोइंग के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था, जिसके बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया। कानूनी प्रतिनिधियों ने इस अदालती फैसले को कॉर्पोरेट जवाबदेही और न्याय की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया है।
कानूनी लड़ाई और बोइंग की जवाबदेही
माइकल रायन की पत्नी नाइस कॉनोली रायन का प्रतिनिधित्व कर रहे पॉडहर्स्ट ऑर्सेक लॉ फर्म के वकील स्टीवन सी मार्क्स ने कहा कि कोई भी वित्तीय मुआवजा कभी किसी इंसान की जिंदगी नहीं लौटा सकता और न ही परिवार के इस गहरे नुकसान की भरपाई कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि जूरी ने तमाम साक्ष्यों पर बारीकी से विचार करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया।
स्टीवन सी मार्क्स ने बताया कि नाइस कॉनोली रायन ने अपने पति के लिए असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प के साथ न्याय की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह फैसला एक बड़ा मील का पत्थर है, लेकिन बोइंग को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के व्यापक प्रयास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। दूसरी ओर, बोइंग के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी लायन एयर फ्लाइट 610 और इथियोपियन एयरलाइंस फ्लाइट 302 हादसों में अपने प्रियजनों को खोने वाले सभी परिवारों से गहराई से क्षमा मांगती है। बोइंग प्रतिनिधि के अनुसार, कंपनी ने लगभग सभी दावों का निपटारा समझौतों के जरिए कर लिया है, लेकिन वे परिवारों के अदालत के माध्यम से अपने दावे आगे बढ़ाने के अधिकार का सम्मान करते हैं।
इथियोपियन एयरलाइंस फ्लाइट ET302 का वो दर्दनाक दिन
यह भीषण हादसा 10 मार्च 2019 को हुआ था, जब इथियोपियन एयरलाइंस की फ्लाइट ET302 ने इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा से स्थानीय समयानुसार सुबह 08:38 बजे (05:38 GMT) उड़ान भरी थी। इस विमान को केन्या की राजधानी नैरोबी जाना था और यह केवल दो घंटे की उड़ान थी। हालांकि, उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों के भीतर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
टक्कर इतनी भयानक थी कि विमान के दोनों इंजन जमीन में 10 मीटर (32 फीट) की गहराई तक धंस गए थे। हादसे वाली जगह पर 28 मीटर चौड़ा और 40 मीटर लंबा गहरा गड्ढा बन गया था। विमान में सवार सभी 157 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
तकनीकी खामियां और ऑटोमेटेड सिस्टम की विफलता
इथियोपिया के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो द्वारा जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, विमान की टेक-ऑफ प्रक्रिया शुरुआत में बिल्कुल सामान्य दिखाई दे रही थी। हालांकि, उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान के उड़ान कोण (एंगल ऑफ अटैक) को मापने वाले दो सेंसर अलग-अलग रीडिंग दर्ज करने लगे।
सेंसर के इस मतभेद ने विमान के ऑटोमेटेड सेफ्टी सिस्टम को सक्रिय कर दिया, जिसने विमान की नाक (आगे के हिस्से) को बार-बार नीचे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया। ठीक इसी तरह की तकनीकी विफलता इससे पहले हुई जानलेवा लायन एयर दुर्घटना में भी दर्ज की गई थी। इथियोपियाई अधिकारियों की 2019 की रिपोर्ट से संकेत मिला कि पायलटों ने ऑटोमेटेड सिस्टम को डिसएंगेज (निष्क्रिय) करने की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया था। इसके बावजूद, मैन्युअल रूप से विमान को संभालने की कोशिशों के बाद भी सिस्टम विमान की नाक को नीचे की ओर दबाता रहा, जिसके परिणामस्वरूप विमान सीधे जमीन से जा टकराया।
माइकल रायन का मानवीय कार्य और अंतरराष्ट्रीय योगदान
माइकल रायन केवल एक पीड़ित नहीं थे, बल्कि उन्होंने दुनिया भर में लाखों लोगों की जिंदगी संवारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत काम करते हुए उन्होंने बांग्लादेश में आपदा राहत अवसंरचना और आश्रय स्थलों के निर्माण का नेतृत्व किया था। उनके इस कार्य ने भूस्खलन और भीषण बाढ़ के खतरे से हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों की जान बचाई थी।
इसके अलावा, माइकल रायन ने वर्ष 2014 से 2016 के बीच लाइबेरिया में फैले भीषण इबोला प्रकोप के दौरान मेडिकल सेंटरों का निर्माण कराया था। वकील स्टीवन सी मार्क्स ने बताया कि माइकल रायन ने निस्वार्थ भाव से दुनिया की सेवा की थी और उनके जाने से हुआ नुकसान न केवल परिवार के लिए अपूरणीय है, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक बड़ी क्षति है।




















