बॉलीवुड के 90 के दशक के संगीत का अपना एक अलग जादू रहा है, जिसकी मिठास आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में तरोताजा है। इसी सुनहरे दौर में साल 1993 में रिलीज हुई फिल्म 'दिल का क्या कसूर' का रूमानी गीत 'मिलने की तुम कोशिश करना' दर्शकों और श्रोताओं के बीच एक यादगार रचना बनकर उभरा। इस गीत में दो प्रेमियों के बीच की मासूमियत, मिलने की तड़प और एक अटूट वादे की चाहत को बेहद सादगी और नजाकत के साथ पर्दे पर उतारा गया था।
नदीम-श्रवण की मधुर धुन और समीर के जज्बाती बोल
इस सदाबहार नगमे को उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने अपनी सुरीली धुनों से सजाया था। उनके संगीत संयोजन की सादगी ने इस धुन को हर जुबान पर चढ़ा दिया। वहीं गीतकार समीर के लिखे भावुक बोलों ने प्रेम के इस वादे को एक नया आयाम दिया। बोलों में मिलने की कोशिश और वादे के टूटने के डर के बीच का जो द्वंद्व पिरोया गया, उसने सीधे श्रोताओं के दिल को छुआ।
कुमार सानू और आशा भोसले की जादुई गायकी
इस गाने की सबसे बड़ी ताकत इसकी गायकी रही। मशहूर पार्श्व गायक कुमार सानू और दिग्गज गायिका आशा भोसले ने अपनी जुगलबंदी से इस ट्रैक को अमर बना दिया। दोनों गायकों के स्वरों का संतुलन और भावों की गहराई ने इस गीत को 90 के दशक के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक गानों की कतार में ला खड़ा किया।
पर्दे पर दिव्या भारती और पृथ्वी का अंदाज
फिल्म के इस दृश्य में अभिनेत्री दिव्या भारती और अभिनेता पृथ्वी नजर आए थे। दिव्या भारती की मनमोहक अदाओं, उनकी मासूमियत और स्क्रीन प्रेजेंस ने इस गाने को विजुअली भी उतना ही खूबसूरत बना दिया जितना यह सुनने में मधुर था। पृथ्वी के साथ उनकी सहज केमिस्ट्री ने प्रेम के भाव को जीवंत कर दिया, जिसने इसे 90 के दशक के सिनेमाई इतिहास में एक कल्ट रोमांटिक गीत के रूप में स्थापित कर दिया।



















