राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। उदयपुर में जमीन से जुड़े एक विवाद में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के गंभीर आरोप में गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद गृह विभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए। जारी किए गए आदेश के मुताबिक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का यह निलंबन 27 सितंबर से प्रभावी माना जाएगा।
उदयपुर जमीन विवाद और दो बिचौलियों के जरिए घूस का जाल
इस पूरे भ्रष्टाचार मामले की जड़ें उदयपुर के एक विवादित भूखंड से जुड़ी हुई हैं। मामले की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी ने घूस की यह भारी-भरकम राशि सीधे अपने हाथ में नहीं ली थी। इसके स्थान पर दो दलालों का नेटवर्क तैयार किया गया था और उन्हीं दो बिचौलियों के माध्यम से 2 करोड़ रुपये की घूस का लेन-देन कराया गया था। मामले का भंडाफोड़ होने पर जांच एजेंसी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकेश सोनी को हिरासत में ले लिया था। इतनी विशाल रकम की रिश्वत के आरोप में राजस्थान पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी से पूरे प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय की मंजूरी के बाद गृह विभाग का औपचारिक आदेश
गिरफ्तारी के फौरन बाद पुलिस महकमे के भीतर मुकेश सोनी पर निलंबन की तलवार लटक रही थी। प्रशासनिक नियमों के तहत इतने वरिष्ठ अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की आधिकारिक अनुमति अनिवार्य थी। जैसे ही मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पर अंतिम सहमति मिली, गृह विभाग ने बिना किसी देरी के निलंबन आदेश पर मुहर लगा दी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मुकेश सोनी का निलंबन 27 सितंबर की तारीख से लागू माना जाएगा। इसके साथ ही अब उनके खिलाफ विभागीय जांच तेज गति से आगे बढ़ सकेगी।
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में तैनात अधिकारी पर कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप राजस्थान पुलिस का एक बेहद संवेदनशील और प्रतिष्ठित जांच विंग माना जाता है, जिसके जिम्मे संगठित अपराधों और बड़े आर्थिक घोटालों की तफ्तीश होती है। ऐसे विशिष्ट जांच दल में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी का 2 करोड़ रुपये जैसी विशाल रिश्वत राशि के मामले में लिप्त पाया जाना पुलिस विभाग के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद अब विभागीय निलंबन हो जाने से कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। जांच एजेंसी अब इस प्रकरण से जुड़े तमाम दस्तावेजी साक्ष्यों और दोनों दलालों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही है, जिसके आधार पर कोर्ट और विभागीय स्तर पर आगामी सख्त कदम तय किए जाएंगे।




















