मराठी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता और निर्देशक प्रवीण तरडे ने दिग्गज कलाकार नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में हिंदी फिल्म उद्योग के बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी पर कड़ा ऐतराज जताया है। नाना पाटेकर का निधन गुरुवार, 8 अक्टूबर को गोवा में हुआ था, जिसके बाद रविवार, 11 अक्टूबर को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि उनकी जान कार्डियक अरेस्ट की वजह से गई थी। निधन के बाद पार्थिव शरीर को गोवा से सीधे पुणे स्थित उनके पैतृक गांव लाया गया था, जहां उसी रात बेटे मल्हार ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। इस दौरान मराठी फिल्म जगत के कई नामी कलाकारों, परिजनों और दोस्तों ने उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दी, लेकिन बॉलीवुड के गिने-चुने नामों जैसे सलमान खान, साजिद नाडियाडवाला और जैकी श्रॉफ को छोड़कर बाकी दिग्गज नदारद रहे। इसी उपेक्षा पर प्रवीण तरडे ने अपना गहरा रोष जाहिर किया है।
नाना जिन्हें अपना करीबी मानते थे, उनका न आना दुखद: प्रवीण तरडे
प्रवीण तरडे ने स्पष्ट कहा कि नाना पाटेकर जीवनभर फिल्म उद्योग के जिन लोगों को अपना सच्चा दोस्त मानते रहे, उन्हें कम से कम अंतिम सफर में शरीक होकर विदाई देनी चाहिए थी। उनका मानना है कि फिल्मी हस्तियों के न पहुंचने से नाना के कद या उनकी विरासत पर कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि वे इन औपचारिकताओं से बहुत ऊपर थे। इसके बावजूद मानवीय और आत्मीय रिश्तों के नाते यह उम्मीद स्वाभाविक थी कि उनके साथ काम करने वाले और उनके करीबी होने का दावा करने वाले लोग पुणे पहुंचते। तरडे ने नाराजगी जताते हुए रेखांकित किया कि जब मुंबई में किसी भी सामान्य कलाकार का निधन होता है तो वहां सितारों का जमावड़ा लग जाता है, लेकिन नाना जैसे अद्वितीय कलाकार के लिए लोगों ने समय नहीं निकाला।
परफ्यूम लगाने वाले सितारों से मिट्टी से जुड़े किसान कहीं आगे
अंतिम संस्कार के भावनात्मक माहौल का जिक्र करते हुए प्रवीण तरडे ने कहा कि नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए हजारों की संख्या में किसान पुणे के गांव पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पसीने और मिट्टी की सोंधी महक वाले इन किसानों की मौजूदगी परफ्यूम लगाकर घूमने वाले किसी भी बड़े स्टार की तुलना में कहीं अधिक गौरवशाली है। नाना ने अपने पूरे जीवन में केवल एक अभिनेता के रूप में पहचान सीमित नहीं रखी, बल्कि वे खुद को हमेशा गर्व के साथ एक किसान कहते थे। धुले और महाराष्ट्र के दूरदराज के क्षेत्रों से आए किसानों ने साबित कर दिया कि नाना के असल चाहने वाले कौन थे।
बॉलीवुड से बड़ा था नाना पाटेकर का व्यक्तित्व
प्रवीण तरडे के अनुसार, नाना पाटेकर ने कभी इस बात का दंभ नहीं भरा कि वे हिंदी सिनेमा के बहुत बड़े सितारे हैं। उन्होंने अपनी सादगी और जमीनी जुड़ाव को कभी नहीं छोड़ा, यही वजह रही कि उनके अंतिम संस्कार में किसानों का सैलाब उमड़ा। तरडे ने दो टूक शब्दों में कहा कि बॉलीवुड नाना पाटेकर से बड़ा नहीं है, इसलिए उनके न आने से नाना की गरिमा कम नहीं हो सकती। हालांकि, एक शिकायत और कसक हमेशा दिल में रहेगी कि जिन्हें नाना दिल से अपना मानते थे, उन्होंने इस अंतिम घड़ी में मुंह मोड़ लिया। इसके बावजूद हजारों किसानों का सच्चा प्यार और विदाई इस बात का प्रमाण है कि नाना हमेशा आम जनता के दिलों में जीवित रहेंगे।



















