भारतीय सिनेमा के इतिहास में बहुत कम अभिनेता ऐसे हैं जिन्होंने करियर के ढलते दौर में अपनी अदाकारी से पूरी कहानी का रुख बदल दिया हो। अमिताभ बच्चन ने ढलती उम्र में पारंपरिक मुख्य भूमिकाओं के ढर्रे को तोड़कर ऐसे चुनौतीपूर्ण किरदारों को चुना, जिन्होंने न केवल उनके अभिनय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि कई बार उनके करियर को नया मोड़ भी दिया। गंभीर ड्रामा, अनोखी कॉमेडी, सामाजिक सरोकार और पौराणिक साइंस-फिक्शन तक, उन्होंने हर विधा में खुद को साबित किया।
गुरुकुल का सख्त अनुशासन और डूबते करियर को सहारा
साल 2000 में पर्दे पर आई फिल्म मोहब्बतें अभिनेता के पेशेवर सफर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्देशित इस रोमांटिक ड्रामा में उन्होंने गुरुकुल के कड़े मिजाज वाले प्रिंसिपल नारायण शंकर की भूमिका अदा की थी। संस्थान की चारदीवारी में प्यार को कमजोरी और अनुशासन को सर्वोपरि मानने वाले इस किरदार ने कहानी में जबर्दस्त वजन पैदा किया था। शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ उनके संवाद और अभिनय के टकराव ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। सिनेमा जगत में यह दौर अभिनेता के लिए बेहद कठिन माना जाता था, और इस सफल प्रस्तुति ने उनके डगमगाते करियर को नई मजबूती प्रदान की।
संजय लीला भंसाली की ब्लैक में शिक्षक की संवेदनशील भूमिका
इसके पांच वर्ष बाद, 2005 में संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म ब्लैक रिलीज हुई, जिसे उनके पूरे फिल्मी जीवन के शिखर प्रदर्शनों में गिना जाता है। इस कथा में उन्होंने देबराज सहाय नाम के एक अनोखे शिक्षक का रूप धरा था, जो दृष्टिहीन और मूक-बधिर युवती को दुनिया से संवाद करने का हौसला देता है। रानी मुखर्जी द्वारा अभिनीत मिशेल मैकनेली के किरदार और देबराज के बीच का यह भावनात्मक सफर संघर्ष, आत्मसम्मान तथा आत्मविश्वास का अद्भुत दस्तावेज बना। भावनाओं की सूक्ष्म परतों को पर्दे पर उतारने के उनके सधे अंदाज ने समीक्षकों और दर्शकों दोनों को स्तब्ध कर दिया।
पा में पिता और पुत्र की अनोखी भूमिका की अदला-बदली
साल 2009 में आई फिल्म पा ने दर्शकों के सामने अभिनय का एक बिल्कुल नया नजरिया पेश किया। इस फिल्म की सबसे अनोखी खासियत यह थी कि वास्तविक जीवन में पिता-पुत्र की जोड़ी ने पर्दे पर अपनी भूमिकाएं पूरी तरह उलट दी थीं। बिग बी ने एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे बेटे का रोल निभाया, जबकि अभिषेक बच्चन उनके पिता के किरदार में नजर आए थे। विद्या बालन की मौजूदगी वाली इस संवेदनशील कहानी में उनके शारीरिक बदलाव और बाल सुलभ मासूमियत ने आलोचकों से जबरदस्त सराहना हासिल की।
पीकू में कब्ज से परेशान चिड़चिड़े पिता का सहज अभिनय
गंभीर अभिनय के दायरे से बाहर निकलकर शूजित सरकार की 2015 की प्रस्तुति पीकू में उनका एक सर्वथा अलग रंग देखने को मिला। भास्कर बनर्जी के रूप में उन्होंने एक ऐसे बुजुर्ग बंगाली पिता का रोल निभाया, जो अपनी पेट की समस्याओं और पाचन को लेकर दिन-रात चिंतित रहता है। अपनी कामकाजी बेटी पीकू के साथ उनके खट्टे-मीठे रिश्ते को फिल्म में बड़ी बारीकी से उकेरा गया था। दीपिका पादुकोण और इरफान खान के साथ उनकी सहज बातचीत और हास्य की सटीक टाइमिंग ने सिनेमाप्रेमियों का दिल पूरी तरह जीत लिया।
पिंक के जरिए सहमति और सामाजिक न्याय की जोरदार वकालत
अनिरुद्ध रॉय चौधरी के निर्देशन में 2016 में रिलीज हुई अदालती ड्रामा पिंक ने समाज के सामने नारी स्वतंत्रता और सहमति का बुनियादी सवाल खड़ा किया। इस फिल्म में उन्होंने दीपक सहगल नाम के एक सेवानिवृत्त वकील की भूमिका निभाई, जो मुश्किल में फंसी तीन युवतियों का मुकदमा अदालत में लड़ता है। तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी और एंड्रिया तारियांग के किरदारों को इंसाफ दिलाने के लिए अदालत के कठघरे में दी गई उनकी दलीलें बेहद प्रभावशाली थीं। यह फिल्म न केवल उनके करियर का यादगार अध्याय बनी, बल्कि सामाजिक संवाद का केंद्र भी बन गई।
102 नॉट आउट में जिंदगी का भरपूर जश्न
उमेश शुक्ला के निर्देशन में 2018 में आई 102 नॉट आउट ने ऋषि कपूर और उनकी जोड़ी को एक बेहद दिलचस्प पारिवारिक ताने-बाने में पेश किया। कहानी 102 वर्ष की उम्र में भी खिलखिलाती जिंदगी जीने वाले दत्तात्रेय वखारिया और उनके 75 साल के निराशावादी बेटे बाबूलाल के बीच घूमती है। जहां बाबूलाल उम्र के बोझ तले खुद को थका हुआ मान बैठता है, वहीं दत्तात्रेय बुढ़ापे के हर पल को उमंग और ऊर्जा के साथ जीने का संदेश देते हैं। दोनों दिग्गजों की जुगलबंदी ने दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ गहरे अहसास भी दिए।
कल्कि 2898 एडी में पौराणिक योद्धा का महाकाय अवतार
उम्र के नौवें दशक में नाग अश्विन के निर्देशन में बनी 2024 की महत्वाकांक्षी साइंस-फिक्शन फिल्म कल्कि 2898 एडी में उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाकर सभी को हैरान कर दिया। भविष्य के अंधकारमय दौर में इंसानी वजूद और सत्ता के संघर्ष के बीच अमरता के श्राप से बंधे महाभारत के इस योद्धा के रूप में वह महाबली बनकर उभरे। प्रभास, दीपिका पादुकोण और कमल हासन जैसे सितारों से सजी इस भव्य गाथा में उन्होंने एक्शन और गरिमा का ऐसा तालमेल दिखाया, जिसने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती।



















