गर्मियों के दिनों में जब कमरे का पंखा पूरी गति से नहीं घूमता, तो घर के लोग अक्सर यही मान लेते हैं कि शायद मेन लाइन से बिजली की सप्लाई कमजोर आ रही है। हालांकि कई बार बिजली मीटर में सप्लाई का स्तर 220-230 वोल्ट बिल्कुल सही दर्ज होता है, फिर भी पंखे की रफ्तार बेहद सुस्त बनी रहती है और कमरे में पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती। वोल्टेज में कोई गिरावट न होने के बावजूद सीलिंग या टेबल फैन का धीमा चलना असल में उपकरण के आंतरिक पुर्जों और रखरखाव से जुड़ी कई साधारण गड़बड़ियों की वजह से होता है। इन तकनीकी कारणों को समझकर समय पर दुरुस्त किया जाए तो पंखा फिर से अपनी पूरी तेजी पकड़ सकता है।
कमजोर या खराब कैपेसिटर की समस्या
पंखे की सुस्त चाल के पीछे सबसे आम और प्रमुख कारण उसकी मोटर में लगा कैपेसिटर खराब होना होता है। कैपेसिटर एक छोटा सा बेलनाकार उपकरण होता है जो मोटर को शुरू करने और उसे सही रफ्तार पर बनाए रखने के लिए जरूरी टॉर्क यानी शुरुआती झटका देता है। लंबे समय तक लगातार चलने अथवा अत्यधिक गर्मी के प्रभाव से यह कैपेसिटर धीरे-धीरे अपनी ताकत खो देता है। कई मामलों में कैपेसिटर अंदर से सूख जाता है या फूलकर फट जाता है। ऐसे हालात में मेन लाइन से पूरा वोल्टेज मिलने पर भी मोटर को आवश्यक ऊर्जा नहीं मिल पाती, जिससे पंखा धीमा घूमता है। इस पुर्जे को बदलना काफी आसान होता है और बाजार में यह बहुत कम खर्च में उपलब्ध हो जाता है।
ब्लेड्स और मोटर पर जमी धूल की परत
घरों में नियमित साफ-सफाई के दौरान अक्सर छतों पर लटके पंखों की ओर लोगों का ध्यान नहीं जाता, जिससे उनके ब्लेड्स और मोटर हाउसिंग पर धूल और मैल की भारी परत जमा हो जाती है। यह जमी हुई गंदगी ब्लेड्स के वजन को बढ़ा देती है और हवा को काटने की उनकी बनावट को बिगाड़ देती है। इसके चलते मोटर को घूमने के लिए अतिरिक्त ताकत लगानी पड़ती है और उस पर भारी दबाव पड़ता है। भारीपन के कारण पंखे की रफ्तार मंद पड़ जाती है। ब्लेड्स को गीले कपड़े से अच्छी तरह पोंछने और मोटर के वेंट्स के इर्द-गिर्द की धूल झाड़ देने से ही पंखे की गति में तुरंत सुधार दिखने लगता है।
बेयरिंग का सूखना और जाम होना
पंखे की मोटर के भीतर एक महत्वपूर्ण हिस्सा बेयरिंग होता है, जो सेंट्रल शाफ्ट को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से घूमने में मदद करता है। सालों साल चलने पर बेयरिंग में मौजूद ग्रीस या लुब्रिकेंट सूख जाता है अथवा उसमें धूल घुस जाती है। चिकनाई खत्म होते ही बेयरिंग जकड़ने लगती है और शाफ्ट के घूमने में घर्षण पैदा होता है। इस खराबी के कारण पंखा चलते समय रगड़ खाने जैसी आवाज करने लगता है और उसकी स्पीड काफी गिर जाती है। कभी-कभी बेयरिंग में उचित ग्रीस अथवा तेल डालने से काम बन जाता है, लेकिन अगर बेयरिंग कट चुकी हो तो उसे नया लगवाना ही सुरक्षित विकल्प होता है।
कमजोर वायरिंग, ढीले जोड़ और रेगुलेटर की खराबी
बिजली के मुख्य मीटर पर वोल्टेज सही दिखने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि पंखे तक भी पूरी बिजली पहुंच रही है। यदि स्विच बोर्ड के अंदर स्क्रू ढीले हों, तार पुराने होकर कमजोर हो चुके हों या पंखे के टर्मिनल पर कनेक्शन ठीक से न कसे गए हों, तो उपकरण तक पर्याप्त करंट नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा स्विच बोर्ड में लगे रेगुलेटर का खराब होना भी एक बड़ा कारण है। कई बार उपभोक्ता रेगुलेटर को अधिकतम नंबर पर सेट कर देते हैं, लेकिन अंदरूनी सर्किट बिगड़ने के कारण वह करंट को पूरा पास नहीं करता और पंखा धीमा ही चलता रहता है। ऐसी स्थिति में वायरिंग की जांच और रेगुलेटर को बदलना जरूरी होता है।
मोटर की वाइंडिंग की घिसावट और ब्लेड्स का असंतुलन
सालों पुराने पंखों में सामान्य टूट-फूट और उम्र का असर भी दिखने लगता है। लगातार चलने से मोटर की वाइंडिंग कमजोर हो जाती है, उसका इंसुलेशन जल जाता है या उसमें इंटरनल शॉर्ट सर्किट हो जाता है। वाइंडिंग कमजोर होने पर मोटर अपनी स्वाभाविक ताकत खो देती है और वोल्टेज मिलने के बाद भी तेज गति नहीं बना पाती। वहीं दूसरी ओर, अगर सफाई के दौरान या किसी झटके से पंखे के ब्लेड्स थोड़े से भी मुड़ जाएं तो उनका संतुलन बिगड़ जाता है। असंतुलित पंखा डगमगाकर या हिल-हिलकर चलने लगता है, जिससे उसकी सीधी गति प्रभावित होती है और हवा का प्रवाह धीमा हो जाता है।
सर्किट पर ओवरलोडिंग और सही समय पर मरम्मत
गर्मियों के मौसम में जब एक ही घरेलू सर्किट पर फ्रिज, कूलर या अन्य भारी उपकरण एक साथ चलाए जाते हैं, तो सर्किट ओवरलोड हो सकता है। भले ही मीटर पर वोल्टेज सामान्य दिखे, लेकिन तार पर अत्यधिक भार होने से पंखे को आवश्यक करंट नहीं मिल पाता। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए उपयोगकर्ता पहले खुद बुनियादी जांच कर सकते हैं, जैसे ब्लेड्स को साफ करना, कैपेसिटर बदलना, जोड़ों को कसना और बेयरिंग में चिकनाई देना। यदि यह सब करने के बाद भी पंखा तेज न चले, तो किसी कुशल इलेक्ट्रीशियन को बुलाकर मोटर की वाइंडिंग की जांच करानी चाहिए। सुस्त पंखे को नजरअंदाज करने से मोटर अधिक गर्म होकर हमेशा के लिए जल सकती है, इसलिए समय पर देखभाल जरूरी है।



















