सर्दियों के आगमन के साथ ही मंडियों और बाजारों में ताजा आंवला खूब बिकने लगता है। पोषक तत्वों की दृष्टि से यह फल सेहत के लिए काफी लाभकारी माना जाता है, जिसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और कई आवश्यक तत्व मौजूद होते हैं। अपने प्राकृतिक कसैले और खट्टे स्वाद के लिए पहचाना जाने वाला यह फल भोजन की थाली में एक अलग ही रंग भर देता है। यदि आप सादे खाने को भी खास बनाना चाहते हैं, तो घर पर ही पारंपरिक ढंग से आंवले का खट्टा और तीखा अचार बनाकर रख सकते हैं। दाल और चावल की थाली हो, गरमा-गरम पराठे हों या फिर पूरी, थोड़ा सा यह अचार हर निवाले का स्वाद बढ़ा देता है। इसे घर पर बनाना बेहद सरल है और कुछ बुनियादी मसालों के साथ यह झटपट बनकर तैयार भी हो जाता है।
अचार तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री
आधा किलो यानी 500 ग्राम आंवले से यह स्वादिष्ट अचार बनाने के लिए आपको कुछ बुनियादी रसोई मसालों की आवश्यकता होगी। सबसे पहले 500 ग्राम ताजा आंवला लें। इसके अलावा मुख्य सामग्री के तौर पर सरसों का तेल, जीरा, खड़ा लाल मिर्च, राई अथवा पीली सरसों, सौंफ और मेथी दाना जुटा लें। साथ ही पिसे हुए मसालों में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, हींग और स्वादानुसार नमक की जरूरत होगी। अचार में चटपटेपन और अतिरिक्त खटास को संतुलित करने के लिए थोड़ा सा नींबू का रस भी अपने पास रख लें। सभी चीजें एक जगह व्यवस्थित कर लेने के बाद तैयारी आसान हो जाती है।
आंवला पकाने और फांकें अलग करने का चरण
अचार बनाने की प्रक्रिया में स्वच्छता सबसे पहला नियम है। आंवलों को पहले साफ पानी में अच्छी तरह धोएं और फिर किसी कपड़े से पोंछकर सूखा लें। इसके बाद इन्हें पकाने की बारी आती है। आप इन्हें भाप में रखकर पका सकते हैं अथवा किसी बर्तन में थोड़ा पानी लेकर तब तक उबालें जब तक कि ये छूने में थोड़े नरम न महसूस होने लगें। इस दौरान विशेष सावधानी बरतें कि आंवले बहुत अधिक न गलें, क्योंकि अधिक गलने से फांकें बिखरने लगती हैं। जब ये पक जाएं तो गैस बंद कर दें और ठंडा होने के लिए रख दें। पूरी तरह ठंडा हो जाने के बाद हाथों से दबाकर इनकी फांकों को अलग कर लें और अंदर के सख्त बीज को बाहर निकाल दें।
साबुत मसालों की भुनाई और दरदरा मिश्रण
अचार का असली स्वाद उसकी महक और भुने मसालों के संतुलन पर निर्भर करता है। गैस चूल्हे पर एक कड़ाही रखें और उसमें जीरा, राई, सौंफ और मेथी दाना डालकर हल्की आंच पर भूनें। थोड़ी देर बाद इसमें साबुत लाल मिर्च भी डाल दें। धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें जब तक कि मसालों से सौंधी खुशबू न आने लगे। खुशबू आते ही तुरंत आंच बंद कर दें ताकि मसाले जलने न पाएं। इन भुने मसालों को ठंडा होने दें और फिर मिक्सी या सिलबट्टे पर हल्का दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि इनका बारीक पाउडर नहीं बनाना है, दरदरापन ही अचार को खास बनावट देता है।
तेल पकाना और मसाले मिलाने का तरीका
अब कड़ाही में सरसों का तेल डालकर तेज आंच पर गर्म करें। जब तेल से हल्का धुआं निकलने लगे, तब गैस को बंद कर दें और तेल का तापमान सामान्य होने के लिए कुछ देर छोड़ दें। थोड़ा ठंडा होने पर इस तेल को किसी साफ भगोने में पलट लें। सबसे पहले गुनगुने तेल में हींग का छौंक लगाएं। इसके बाद दरदरा पीसा हुआ भुना मसाला इस तेल में डालें और अच्छी तरह चलाएं। अब इसमें नमक और हल्दी पाउडर मिलाकर पूरे मिश्रण को एकसार कर लें।
अंतिम मिश्रण और लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीक
तैयार किए गए मसालेदार तेल में उबाले हुए आंवले की फांकें डाल दें। चम्मच की सहायता से सभी चीजों को तब तक मिलाएं जब तक कि हर फांक पर मसालों की एक समान परत न चढ़ जाए। स्वाद को और निखारने के लिए इसी समय थोड़ा नींबू का रस भी ऊपर से छिड़क कर मिला दें। अब इस तैयार अचार को धूप में अच्छी तरह सूखे और साफ कांच के जार में भरें। जार को एक से दो दिन तक किसी साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें और प्रतिदिन सूखे चम्मच से ऊपर-नीचे करते रहें। चूंकि इस तरीके में आंवले को पानी या भाप में पकाया जाता है, इसलिए इसमें नमी की मात्रा रह सकती है। इसे खराब होने से बचाने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज के अंदर ही स्टोर करें।



















