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राज कपूर के निर्देशन में बने झरने वाले दृश्य पर मंदाकिनी ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं पवित्रता ही फिल्म का असल संदेश थाबॉलीवुड
19 सित॰ 2026, 7:21 pm (39 दिन पहले)· 1

राज कपूर के निर्देशन में बने झरने वाले दृश्य पर मंदाकिनी ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं पवित्रता ही फिल्म का असल संदेश था

मंदाकिनी ने अपनी पहली फिल्म के चर्चित झरने और स्तनपान वाले दृश्यों पर खुलकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि राज कपूर के निर्देशन में शूट किए गए इन पलों का मकसद कभी अश्लीलता फैलाना नहीं था।

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ दृश्य ऐसे रहे हैं जिन्होंने रिलीज के वक्त जितनी हलचल मचाई, दशकों बाद भी उनकी गूंज फीकी नहीं पड़ी। वर्ष उन्नीस सौ अस्सी के दशक में जब मंदाकिनी ने महज 16 वर्ष की आयु में बड़े पर्दे पर कदम रखा था, तब उनके एक खास दृश्य ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया था। राज कपूर के निर्देशन में तैयार हुई आखिरी फिल्म में सफेद पारदर्शी साड़ी में झरने के नीचे फिल्माया गया वह दृश्य रातोंरात चर्चा का केंद्र बन गया था। कई तबकों ने इसे जरूरत से ज्यादा साहसिक और अनुचित ठहराया, जबकि इसी दृश्य ने उस नौजवान अदाकारा को उस दौर की शीर्ष हस्तियों में ला खड़ा किया। अब इतने सालों के फासले के बाद खुद मंदाकिनी ने उस पूरे घटनाक्रम और अपनी मनोदशा पर स्थिति साफ की है।

सोलह साल की उम्र में पहली बार कैमरे का सामना

जब किसी नवोदित कलाकार को पहली ही फिल्म में ऐसा किरदार मिले जो भारतीय समाज के गहरे अंतर्विरोधों को उजागर करता हो, तो चुनौतियां कई गुना बढ़ जाती हैं। मंदाकिनी जब इस सिनेमाई सफर का हिस्सा बनीं, तब वह महज 16 वर्ष की एक अल्हड़ किशोरी थीं। फिल्म उद्योग की बारीकियों और दर्शकों की भविष्य की प्रतिक्रियाओं का अंदाजा लगाना उनके लिए उस उम्र में नामुमकिन था। उन्होंने पर्दे पर 'गंगा' नाम की एक पहाड़ी लड़की की भूमिका निभाई थी, जिसकी मासूमियत और पवित्रता की कहानी दर्शकों के दिलों को छू गई। हालांकि, फिल्म के प्रदर्शन के बाद जो विवाद खड़ा हुआ, उसकी धुरी वह झरना बना जहां 'तुझे बुलाएं ये मेरी बाहें' गीत फिल्माया गया था।

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पारिवारिक माहौल में हुआ था कठिन दृश्यों का फिल्मांकन

एएनआई से बात करते हुए मंदाकिनी ने स्पष्ट किया कि सेट पर काम करने का माहौल बेहद शालीन और सुरक्षित था। उन्होंने बताया कि निर्देशक के काम करने की शैली इतनी आत्मीय थी कि मन में किसी भी प्रकार की शंका या झिझक का भाव ही नहीं आता था। उन्होंने अपनी यादें साझा करते हुए कहा,

उनका तरीका ऐसा था कि आप उनसे कोई सवाल ही नहीं करते थे।
मंदाकिनी के अनुसार, राज कपूर किसी दृश्य की मांग को इतनी नजाकत और अपनेपन से समझाते थे मानो परिवार का ही कोई बुजुर्ग सदस्य काम करवा रहा हो। कैमरे के सामने खड़े होकर उन्हें कभी यह आभास नहीं हुआ कि वह कुछ ऐसा कर रही हैं जो फूहड़ या असहज करने वाला हो।

पवित्रता बनाम अशुद्धता की लड़ाई

झरने के दृश्य के अलावा नवजात शिशु को स्तनपान कराने वाले एक अन्य प्रसंग पर भी उस जमाने में तीखी बहस छिड़ी थी। मंदाकिनी ने उन तमाम व्याख्याओं को खारिज किया है जिनमें इन दृश्यों को केवल सनसनी फैलाने का जरिया माना गया था। उनके मुताबिक, समूची पटकथा का मूल विचार पवित्रता और उसकी रक्षा के इर्द गिर्द घूमता था। समाज के भ्रष्ट तत्व उस पहाड़ी कन्या की सहज शुद्धता को तार-तार करना चाहते थे, लेकिन उसका आत्मिक स्वरूप अंत तक निष्कलंक बना रहा। मंदाकिनी ने साफ किया कि फिल्मांकन के दौरान किसी के भी मन में कोई विकृत या अवांछित विचार नहीं था, बल्कि निर्देशक का सारा जोर उस किरदार की नैसर्गिक सादगी को उभारने पर था जिसे बाद के दौर में केवल एक विवादित कोण से देखा जाने लगा।

सवाल-जवाब

मंदाकिनी ने किस उम्र में इस चर्चित फिल्म से डेब्यू किया था?
मंदाकिनी ने महज 16 वर्ष की उम्र में अपनी पहली फिल्म में काम करना शुरू किया था।
फिल्म में झरने वाला दृश्य किस गीत के दौरान फिल्माया गया था?
यह प्रसिद्ध दृश्य फिल्म के गीत 'तुझे बुलाएं ये मेरी बाहें' के दौरान फिल्माया गया था।
सेट पर राज कपूर का व्यवहार कैसा था?
मंदाकिनी के अनुसार राज कपूर बहुत आत्मीयता और प्यार से काम समझाते थे, जिससे सेट पर पारिवारिक माहौल बना रहता था।
मंदाकिनी के अनुसार फिल्म का मुख्य संदेश क्या था?
फिल्म का मूल विचार गंगा की पवित्रता और समाज की अशुद्धता के बीच के संघर्ष को दर्शाना था।
क्या मंदाकिनी को शूटिंग के दौरान कोई असहजता महसूस हुई थी?
मंदाकिनी ने बताया कि उन्हें उस समय बिल्कुल भी असहजता या अश्लीलता का अहसास नहीं हुआ था।
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