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रणबीर और सलमान को छोड़िए, जानिए कौन है हिंदी सिनेमा का असली और सबसे सफल स्टारकिडबॉलीवुड
9 सित॰ 2026, 1:01 am (49 दिन पहले)· 3

रणबीर और सलमान को छोड़िए, जानिए कौन है हिंदी सिनेमा का असली और सबसे सफल स्टारकिड

हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर से लेकर आधुनिक युग तक कई बड़े स्टारकिड्स ने चमक बिखेरी है, लेकिन कपूर खानदान के एक दिग्गज ने वैश्विक स्तर पर जो इतिहास रचा, वह आज भी बेजोड़ है।

भारतीय फिल्म उद्योग में पीढ़ियों से परिवारों का दबदबा रहा है, जहां कई कलाकारों के बच्चों ने अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। हिंदी सिनेमा के शुरुआती इतिहास पर नजर डालें तो कपूर परिवार का योगदान सबसे गहरा और पुराना माना जाता है। इस प्रतिष्ठित खानदान की नींव रखने वाले पृथ्वीराज कपूर ने साल 1920 के दशक में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। वह मूल रूप से लाहौर के रहने वाले थे और वहां रंगमंच पर सक्रिय रूप से नाटक किया करते थे।

बंबई का रुख और परिवार की शुरुआत

साल 1928 में पृथ्वीराज कपूर ने बंबई का रुख किया और फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते तीस के दशक तक वह हिंदुस्तानी सिनेमा के सबसे चमकते हुए सितारों में शुमार हो गए। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए उनके छोटे भाई त्रिलोक कपूर ने भी अभिनय को ही अपना पेशा चुना। त्रिलोक ने साल 1933 में रिलीज हुई फिल्म ‘चार दरवेश’ के साथ इस इंडस्ट्री में कदम रखा और अपनी एक अलग जगह बनाई।

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राज कपूर का सिनेमाई पदार्पण

इस महान परिवार की अगली पीढ़ी में राज कपूर का नाम सबसे ऊपर आता है, जिन्हें हिंदी सिनेमा का पहला असली स्टारकिड कहा जा सकता है। उन्होंने साल 1935 में आई फिल्म ‘इंकलाब’ में एक बाल कलाकार के रूप में काम किया था। इसके बाद साल 1946 में उन्होंने बतौर मुख्य अभिनेता अपनी पारी की शुरुआत की और फिल्म ‘नील कमल’ से उन्हें पहली बड़ी सफलता हाथ लगी। उन्होंने अपने पिता की विरासत को न केवल संभाला बल्कि उसे एक नए मुकाम तक पहुंचाया।

रिकॉर्ड तोड़ सफलता और शिखर

महज 25 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते राज कपूर भारतीय सिनेमा के शीर्ष कलाकारों में शामिल हो चुके थे। उन्होंने ‘बरसात’ और ‘अंदाज’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया। साल 1949 तक आते-आते उन्होंने कमाई के पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। इन फिल्मों की बदौलत वह दिलीप कुमार और देव आनंद जैसे अपने दौर के दिग्गजों की पंक्ति में आकर खड़े हो गए। पचास और साठ के दशक में उनका प्रभाव पूरे फिल्म जगत पर गहराई से छाया रहा।

आवारा फिल्म का वैश्विक डंका

राज कपूर ने केवल पारंपरिक और व्यावसायिक फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक और सुधारवादी मुद्दों पर आधारित ‘आवारा’ जैसी फिल्म का निर्माण भी किया। महज 27 साल की उम्र में उन्होंने इस तीसरी निर्देशित फिल्म को बनाया, जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस फिल्म ने देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों का भरपूर प्यार बटोरा। दुनिया भर में इस फिल्म ने 15 करोड़ रुपये का कारोबार कर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर का खिताब अपने नाम किया। यदि आज के समय के अनुसार इसका मूल्यांकन किया जाए, तो यह लगभग 2000 करोड़ रुपये कमाने वाली फिल्म साबित होती है, जो इसे सबसे कामयाब फिल्मों की श्रेणी में खड़ा करता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना

अपनी व्यावसायिक सफलताओं के साथ-साथ राज कपूर ने समीक्षकों की वाहवाही भी खूब बटोरी। उनकी फिल्म ‘आवारा’ को कान्स फिल्म फेस्टिवल में सबसे बड़े पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। इसके अलावा उनके द्वारा निर्मित फिल्म ‘बूट पॉलिश’ को भी इसी समारोह में बाल कलाकार के लिए विशेष उल्लेख मिला। साल 1956 में आई उनकी फिल्म ‘जागते रहो’ ने कार्लोवी वेरी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का प्रतिष्ठित क्रिस्टल ग्लोब अवॉर्ड अपने नाम किया था।

अन्य सितारों से तुलना और उनका प्रभाव

फिल्मी दुनिया में कई ऐसे नाम आए जिन्होंने अपने माता-पिता की विरासत को आगे बढ़ाया। खुद राज कपूर के परिवार में ऋषि कपूर, शशि कपूर, शम्मी कपूर और उनके पौते रणबीर कपूर ने अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों का दिल जीता। इसके अलावा सलमान खान और आमिर खान जैसे सितारे भी इसी श्रेणी में आते हैं। दक्षिण भारत के सिनेमा में भी नागार्जुन, अल्लू अर्जुन, प्रभास, जूनियर एनटीआर, नंदमुरी बालाकृष्णा और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे कई बड़े परिवार दशकों से राज कर रहे हैं।

एक संपूर्ण फिल्मकार के रूप में योगदान

इन सभी के बीच राज कपूर का कद इन सबसे कहीं बड़ा नजर आता है क्योंकि उन्होंने अभिनय, निर्देशन और निर्माण तीनों ही क्षेत्रों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की। एक अभिनेता के रूप में उन्होंने कुल 63 फिल्मों में काम किया जिनमें से 17 सुपरहिट रहीं, जिनमें 5 ब्लॉकबस्टर और 2 महा-ब्लॉकबस्टर शामिल थीं। उनकी फिल्मों ने भारत के अलावा रूस के बाजारों में भी एक नया रास्ता तैयार किया। निर्देशक के रूप में उनकी 10 में से 8 फिल्में सफल साबित हुईं। उन्होंने ‘संगम’ के जरिए विदेश में शूटिंग की परंपरा शुरू की और ‘मेरा नाम जोकर’ में एक विशाल अंतरराष्ट्रीय स्टारकास्ट को एक मंच पर लाए। ऋषि कपूर, डिंपल कपाड़िया और जीनत अमान जैसे कई कलाकारों को बड़े पर्दे पर लॉन्च करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।

सवाल-जवाब

हिंदी सिनेमा में कपूर परिवार की शुरुआत कब और किसने की थी?
पृथ्वीराज कपूर ने साल 1920 के दशक में बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरुआत की थी और वे 1928 में लाहौर से बंबई शिफ्ट हुए थे।
राज कपूर ने पहली बार किस फिल्म में काम किया था?
राज कपूर ने साल 1935 में आई फिल्म ‘इंकलाब’ में पहली बार बतौर बाल कलाकार काम किया था।
फिल्म ‘आवारा’ ने दुनिया भर में कितनी कमाई की थी?
फिल्म ‘आवारा’ ने दुनियाभर में 15 करोड़ रुपये की कमाई की थी, जिसे आज के दौर के हिसाब से 2000 करोड़ रुपये की फिल्म माना जाता है।
राज कपूर की किस फिल्म ने कार्लोवी वेरी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार जीता था?
राज कपूर की साल 1956 में आई फिल्म ‘जागते रहो’ ने कार्लोवी वेरी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में क्रिस्टल ग्लोब अवॉर्ड जीता था।
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