मिर्जापुर जिले में इन दिनों एक बेहद अनोखा और खास गुड़ चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर लोग सामान्य गुड़ का सेवन भोजन के बाद या पानी के साथ करते हैं, लेकिन यहां बनने वाले इस विशेष गुड़ का स्वाद और इसका रूप एकदम अलग है। पारंपरिक आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर तैयार किए जाने वाले इस गुड़ में कई तरह की जड़ी-बूटियों और मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे आम गुड़ से बिल्कुल जुदा बनाते हैं।
इस अनूठे गुड़ को बनाने की प्रक्रिया में पारंपरिक सामग्रियों का खास ध्यान रखा जाता है। इसमें मुख्य गुड़ के साथ-साथ सौंठ, सौंफ, मरीच और मुलेठी को एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है। इसके अलावा, इसे देखने में चॉकलेट जैसा आकर्षक रूप दिया जाता है ताकि लोग इसे बड़े चाव से खा सकें। इसका यह खास स्वरूप और बेहतरीन स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष गुड़ को उन्हीं की देखरेख में तैयार कराया जाता है। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को पारंपरिक और सेहतमंद सामग्री का स्वाद एक नए अंदाज में उपलब्ध कराना है। चॉकलेट की तरह छोटे टुकड़ों में तैयार होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना और खाना बेहद आसान हो जाता है, यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग और चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है।
इस अनोखे उत्पाद को बनाने का विचार श्याम सुंदर केसरी को सोनभद्र के आदिवासी अंचलों के दौरों से मिला था। उन्होंने बताया कि वह पूर्व में कई बार सांसद रामचन्द्र के साथ सोनभद्र के विभिन्न ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जाया करते थे। वहीं पर उन्होंने स्थानीय जनजातीय लोगों को इस प्रकार का विशेष गुड़ तैयार करते और उसका सेवन करते हुए देखा था। आदिवासी संस्कृति में स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद उपयोगी माने जाने वाले इस नुस्खे ने उनका ध्यान अपनी ओर खींचा था।
सोनभद्र के दौरे के दौरान उन्होंने स्थानीय निवासियों से इस गुड़ को बनाने की पूरी विधि और इसमें डाली जाने वाली सामग्रियों के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई। आदिवासी समाज सदियों से जिस पारंपरिक और प्राकृतिक पद्धति से इस तरह का गुड़ तैयार करता आ रहा है, उसी प्राचीन विधि को उन्होंने मिर्जापुर में भी जमीन पर उतारने का फैसला किया।
इस गुड़ में मिलाई जाने वाली सामग्रियां जैसे सौंठ, सौंफ, मरीच और मुलेठी स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद गुणकारी मानी जाती हैं। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इन सभी तत्वों को शरीर के लिए फायदेमंद बताया गया है। दूसरी तरफ, गुड़ अपनी प्राकृतिक मिठास और ऊर्जा के लिए जाना जाता है। इन दोनों का यह अनूठा मेल आम उपभोक्ताओं को एक बिल्कुल नया और अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
शिल्प और स्वाद की इस अनूठी प्रक्रिया के पीछे जुड़ाव की भावना भी बेहद खास है। श्याम सुंदर केसरी का मानना है कि जब किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तल्लीनता और सकारात्मक भाव से तैयार किया जाता है, तो उसका स्वाद स्वतः ही बढ़ जाता है। उनका यह भी कहना है कि महिलाओं के हाथों से बनने वाले भोजन में एक विशेष जादू और स्वाद होता है, और इसी पारंपरिक भाव व समर्पण के साथ इस गुड़ को तैयार कराया जा रहा है, जिससे इसकी गुणवत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है।


















