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मिर्जापुर में आदिवासियों के पारंपरिक नुस्खे से बन रहा खास गुड़, स्वाद और रूप में चॉकलेट जैसाखानपान
9 सित॰ 2026, 1:02 am (51 दिन पहले)· 4

मिर्जापुर में आदिवासियों के पारंपरिक नुस्खे से बन रहा खास गुड़, स्वाद और रूप में चॉकलेट जैसा

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति और आदिवासी इलाकों की प्रेरणा से एक विशेष गुड़ तैयार किया जा रहा है। सौंठ, सौंफ, मरीच और मुलेठी के मिश्रण से बनने वाला यह गुड़ चॉकलेट के आकार में आता है और अपनी अनोखी खूबियों के चलते लोगों को खूब भा रहा है।

मिर्जापुर जिले में इन दिनों एक बेहद अनोखा और खास गुड़ चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर लोग सामान्य गुड़ का सेवन भोजन के बाद या पानी के साथ करते हैं, लेकिन यहां बनने वाले इस विशेष गुड़ का स्वाद और इसका रूप एकदम अलग है। पारंपरिक आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर तैयार किए जाने वाले इस गुड़ में कई तरह की जड़ी-बूटियों और मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे आम गुड़ से बिल्कुल जुदा बनाते हैं।

इस अनूठे गुड़ को बनाने की प्रक्रिया में पारंपरिक सामग्रियों का खास ध्यान रखा जाता है। इसमें मुख्य गुड़ के साथ-साथ सौंठ, सौंफ, मरीच और मुलेठी को एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है। इसके अलावा, इसे देखने में चॉकलेट जैसा आकर्षक रूप दिया जाता है ताकि लोग इसे बड़े चाव से खा सकें। इसका यह खास स्वरूप और बेहतरीन स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष गुड़ को उन्हीं की देखरेख में तैयार कराया जाता है। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को पारंपरिक और सेहतमंद सामग्री का स्वाद एक नए अंदाज में उपलब्ध कराना है। चॉकलेट की तरह छोटे टुकड़ों में तैयार होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना और खाना बेहद आसान हो जाता है, यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग और चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है।

इस अनोखे उत्पाद को बनाने का विचार श्याम सुंदर केसरी को सोनभद्र के आदिवासी अंचलों के दौरों से मिला था। उन्होंने बताया कि वह पूर्व में कई बार सांसद रामचन्द्र के साथ सोनभद्र के विभिन्न ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जाया करते थे। वहीं पर उन्होंने स्थानीय जनजातीय लोगों को इस प्रकार का विशेष गुड़ तैयार करते और उसका सेवन करते हुए देखा था। आदिवासी संस्कृति में स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद उपयोगी माने जाने वाले इस नुस्खे ने उनका ध्यान अपनी ओर खींचा था।

सोनभद्र के दौरे के दौरान उन्होंने स्थानीय निवासियों से इस गुड़ को बनाने की पूरी विधि और इसमें डाली जाने वाली सामग्रियों के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई। आदिवासी समाज सदियों से जिस पारंपरिक और प्राकृतिक पद्धति से इस तरह का गुड़ तैयार करता आ रहा है, उसी प्राचीन विधि को उन्होंने मिर्जापुर में भी जमीन पर उतारने का फैसला किया।

इस गुड़ में मिलाई जाने वाली सामग्रियां जैसे सौंठ, सौंफ, मरीच और मुलेठी स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद गुणकारी मानी जाती हैं। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इन सभी तत्वों को शरीर के लिए फायदेमंद बताया गया है। दूसरी तरफ, गुड़ अपनी प्राकृतिक मिठास और ऊर्जा के लिए जाना जाता है। इन दोनों का यह अनूठा मेल आम उपभोक्ताओं को एक बिल्कुल नया और अनूठा अनुभव प्रदान करता है।

शिल्प और स्वाद की इस अनूठी प्रक्रिया के पीछे जुड़ाव की भावना भी बेहद खास है। श्याम सुंदर केसरी का मानना है कि जब किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तल्लीनता और सकारात्मक भाव से तैयार किया जाता है, तो उसका स्वाद स्वतः ही बढ़ जाता है। उनका यह भी कहना है कि महिलाओं के हाथों से बनने वाले भोजन में एक विशेष जादू और स्वाद होता है, और इसी पारंपरिक भाव व समर्पण के साथ इस गुड़ को तैयार कराया जा रहा है, जिससे इसकी गुणवत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है।

सवाल-जवाब

मिर्जापुर में तैयार किए जा रहे इस खास गुड़ की मुख्य विशेषता क्या है?
यह गुड़ पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति से बनता है और इसे चॉकलेट के आकार में तैयार किया जाता है।
इस खास गुड़ में कौन-कौन सी सामग्रियां मिलाई जाती हैं?
इसमें मुख्य गुड़ के साथ सौंठ, सौंफ, मरीच और मुलेठी का इस्तेमाल किया जाता है।
इस तरह का गुड़ बनाने का विचार सबसे पहले कहां से आया?
यह विचार सोनभद्र के आदिवासी इलाकों के दौरों और वहां के स्थानीय लोगों के खानपान को देखकर आया था।
इस विशेष गुड़ को तैयार कराने के पीछे किसकी मुख्य भूमिका है?
नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी इस खास गुड़ को अपनी देखरेख में तैयार करवा रहे हैं।
इसे खाने में कौन लोग अधिक रुचि दिखा रहे हैं?
चॉकलेट के आकार में तैयार होने के कारण बच्चे और बड़े दोनों ही इसे खाने में काफी रुचि दिखा रहे हैं।
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