फिल्म जगत के जाने-माने निर्देशक संजय गुप्ता के अचानक चले जाने से उनका परिवार गहरे आघात में है, लेकिन इसी गमगीन माहौल के बीच सोशल मीडिया पर एक विवाद खड़ा हो गया। मुंबई में संपन्न हुए अंतिम संस्कार के दौरान उनकी बेटी दलई का एक क्लिप इंटरनेट पर तेजी से फैल गया, जिसमें वह कैमरों और पैपराजी की मौजूदगी से परेशान होकर कथित तौर पर आपत्तिजनक इशारा करती दिख रही थीं। इस फुटेज के सामने आते ही इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने अलग-अलग तरह से टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। अब इस संवेदनशील मामले को लेकर दिवंगत फिल्मकार की पत्नी अनुराधा लेखी गुप्ता सामने आई हैं और उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी है।
पिता के वियोग में बिलखते बच्चों की मानसिक स्थिति
अनुराधा लेखी गुप्ता ने निर्देशक मिलाप जावेरी के जरिए एक औपचारिक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने उस मुश्किल घड़ी का जिक्र किया। अनुराधा ने स्पष्ट किया कि उनके बच्चे कभी भी फिल्मी दुनिया की चकाचौंध या पैपराजी के शोर-शराबे के आदी नहीं रहे हैं। ऐसे में जब सिर से पिता का साया अचानक उठ गया हो, तब अंतिम विदाई के नाजुक पलों में चारों तरफ कैमरों का जमावड़ा देखकर बच्चे घबरा गए और अत्यधिक तनाव में आ गए।
शोक और सदमे की इस भयानक स्थिति में बच्ची की तरफ से अनजाने में जो भी प्रतिक्रिया हुई, उसके लिए अनुराधा ने खेद प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह पूरे दिल से क्षमा चाहती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि लोगों को इस पूरे वाकये को एक शोकाकुल संतान के मानसिक बिखराव के संदर्भ में देखना चाहिए, जो अपने सबसे बड़े सहारे को खोने के असहनीय दर्द से जूझ रही है।
इंटरनेट से तस्वीरें और फुटेज हटाने की भावुक गुहार
अपने वक्तव्य में अनुराधा ने मीडियाकर्मियों, सोशल प्लेटफॉर्म्स और आम दर्शकों से एक विशेष दरखास्त की है। उन्होंने अनुरोध किया कि इस दुखद अवसर पर रिकॉर्ड की गई बच्चों की तस्वीरों और वीडियो क्लिप्स को डिजिटल मंचों से तुरंत हटा दिया जाए। उनका मानना है कि इस तरह की क्लिप्स लंबे समय तक ऑनलाइन मौजूद रहने से बच्चों के कोमल मन पर बहुत गहरा और नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार और बच्चों को इस गहरे सदमे से उबरने के लिए शांति, एकांत और पर्याप्त समय दिया जाना बेहद जरूरी है। समाज को चाहिए कि वह ऐसी घड़ी में सहानुभूति दिखाए और बच्चों के घावों पर किसी भी तरह की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करके उनके कष्ट को और न बढ़ाए। इस समय पूरा कुनबा किसी भी प्रकार की सार्वजनिक चर्चा से दूर रहकर आपस में एक-दूसरे का संबल बनना चाहता है।
घर में दुर्घटनावश गिरने से हुआ था निधन
संजय गुप्ता का देहांत 30 अक्टूबर 2026 को 57 वर्ष की आयु में हुआ। मुंबई स्थित अपने आवास पर अचानक गिर जाने की वजह से उनके सिर में अत्यंत गंभीर चोट आई थी, जिसके चलते उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके इस अप्रत्याशित निधन की खबर से पूरी हिंदी फिल्म बिरादरी स्तब्ध रह गई और प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।
बॉलीवुड में तीन दशक लंबा गौरवशाली सफर
संजय गुप्ता ने भारतीय सिनेमा में तीन दशक से अधिक का लंबा और उल्लेखनीय सफर तय किया। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में अपना पहला कदम वर्ष 1994 की एक्शन फिल्म 'आतिश: फील द फायर' के जरिए रखा था। इसके बाद उन्होंने अपराध और थ्रिलर विधा में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ते हुए 'जंग', 'कांटे', 'मुसाफिर', 'शूटआउट एट वडाला' और 'काबिल' जैसी कई यादगार फिल्मों का निर्माण व निर्देशन किया। हिंदी सिनेमा में अपने विशिष्ट विजुअल स्टाइल और प्रभावशाली कथावाचन के लिए वह हमेशा याद किए जाएंगे।



















